बृजेश मिश्र, सह संपादक
भगवान राम की नगरी अयोध्या में पिछले 28 से 30 अक्टूबर तक भव्य और दिव्य दीपोत्सव मनाया गया। इस वर्ष दीपोत्सव पिछले वर्ष से भी अधिक भव्य रहा। 25 लाख दीप प्रज्वलित किए गए। इसके साथ ही अयोध्या के सभी मंदिरों को दीपों से सजाया गया। पिछले साल 22.23 लाख दीपक प्रज्जवलित किए गए थे। इस बार लक्ष्मण किला घाट से नया घाट तक 1100 वेदाचार्यों के साथ सरयू आरती करके गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड बनाया गया। साथ ही अनगिनत दीपों की झिलझिल में सरयू धारा, राम की पैड़ी पर पानी के बीच बने मंच से कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। लेजर शो ने भक्तों को रोमांचित कर दिया।
अयोध्या में दीपोत्सव का इतिहास हजारों साल पुराना है। अधर्मी रावण के वध के बाद प्रभु श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तब पूरी अयोध्या के निवासी उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े थे। अयोध्या के लोगों ने दीप प्रज्वलित कर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली मनाई जा रही है।
वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड सर्ग 127 में उल्लेख मिलता है कि श्रीराम का नंदीग्राम में भव्य स्वागत किया गया था। उस दौरान अयोध्या के सभी आठों मंत्री और राजा दशरथ की तीनों रानियां हाथियों पर सवार होकर नंदीग्राम पहुंचे। उनके साथ अयोध्या के सभी नागरिक भी नंदीग्राम आए थे। अयोध्या से नंदीग्राम तक मार्ग साफ करके आसपास की सारी भूमि पर बर्फ की तरह ठंडे जल का छिड़काव किया गया था। नगर के सभी मकानों को सुनहरी पुष्प मालाओं से सजा दिया गया था। मंत्रियों और रानियों ने देखा कि श्रीराम पुष्पक विमान से धरती पर उतरे। सभी ने विमान पर विराजमान श्रीराम के दर्शन किए और वे उन्हें लेकर अयोध्या गए।
श्रीरामचरित मानस के उत्तरकांड में श्रीराम के अयोध्या आगमन पर भव्य स्वागत का उल्लेख मिलता है। इससे जुड़ी एक चौपाई देखिए—
सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद।
चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नगर नारि नर बृंद॥
अर्थात् आनंदकंद श्रीराम जी अपने महल को चले, तो मानो आकाश से फूलों की वृष्टि हो रही हो और नगर के स्त्री और पुरुष अटारियों पर चढ़कर उनका दर्शन कर रहे हैं।
कहते हैं कि कार्तिक अमावस्या को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। जब प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटे तो सभी शहरवासी उनके आगमन के लिए उमड़ पड़े। भगवान श्रीराम के आगमन पर अयोध्या के नगरवासियों ने सोने के कलशों को सजा कर अपने—अपने घरों के सामने रख लिया था। सारी गलियां सुगंधित पदार्थों से महक रही थीं। स्त्रियां निछावर कर रही थीं। सोने की थाली में दीपक रखकर राम जी की आरती की जा रही थी।
यह हिंदुओं के लिए बहुत ही अच्छी बात है कि त्रेताकालीन वह परंपरा, वह रौनक, वह भव्यता अयोध्या में एक बार फिर से दिखने लगी है। 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही यह संभव हुआ है। इससे पहले वोट बैंक की राजनीति करने वाले अयोध्या और श्रीराम की बात भी नहीं करते थे। उन्हें लगता था कि वे यदि ऐसा करेंगे तो उनका वोट बैंक टूट जाएगा।
अब हिंदुओं की एकता ने अयोध्या की भव्यता को वापस कर दिया है। यह भव्यता और दिव्यता हजारों वर्ष तक बनी रहे। इन्हीं कामनाओं के साथ सभी को दीपोत्सव की बधाई!! ह्व





