भारतीय धरोहर
गर्मियों की शुरुआत होते ही देशी पेय सत्तू का ही ध्यान आता है। गर्मी में सेहत और स्वाद के साथ ही औषधीय गुणों में भी अव्वल पाया जाता है सत्तू।
सत्तू का नाम सुनते ही आपको अपना बचपन याद आता है न। जैसे ही गर्मियों के मौसम का आगमन होता था जौ, चना, गेहूं इत्यादि फसल पक कर तैयारी होती थी। गाँवों में सत्तू बनाने की तैयारी प्रारंभ हो जाती थी।
आज फास्टफूड का जमाना है। न तो किसी के पास खाना बनाने का पर्याप्त समय है और न ही आराम से खाने खाने का। इस भागमभाग वाली जिंदगी में लोगों को अच्छा स्वास्थ्य तो चाहिए पर पिछले 15 से 20 वर्षो में कोल्ड ड्रिंक्स, फास्टफूड, एनर्जी ड्रिंक का ऐसा समय आया कि हमारा समाज बाजारवाद और फर्ज़ी सेलब्रेटीयों के चक्कर में फंसकर बिना विचार किए पैकेट बंद, बोतल में बंद आहारों की ओर तेजी से आकर्षित हुआ और फास्टफूड के नाम पर मैगी, चाउमीन, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स जैसे नुकसानदायक भोज्य पदार्थ को बड़े चाव से खाने लगा जबकि हमारे पूर्वजों, ऋषि मुनियों ने विचार पूर्वक प्रत्येक मौसम और देशकाल के अनुसार ग्राह्य आहार के विषय बताया है।
बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में प्रमुख आहार रहा है सत्तू। बीच के कुछ वर्षों में लुप्त प्राय: सा दिखने लगा था लेकिन नया नौ दिन पुराना सौ दिन के तर्ज़ पर एक बार फिर तेजी से चलन में आ रहा सत्तू।
जिस कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, पैक्ड फूड को हम अमृत समझ खा-पी रहे थे अब उनकी सच्चाई सामने आने लगी है। स्वास्थ्य के लिए जागरूक जनता अब कुछ-कुछ देशी का महत्व समझने लगी है ।
ग्रीष्म ऋतु में सत्तू के सेवन प्रचलन हमेशा से ही भारत वर्ष में रहा है, सत्तू के बारे में आयुर्वेद सहिंताओ में काफी वर्णन उपलब्ध है। अष्टांग ह्रदय के सूत्रस्थान में बताया गया है कि सभी प्रकार के सत्तू लघु होते हैं अर्थात पचने में हल्के होते हैं।
सत्तू ऐसा फास्टफूड है जो किसी कथित फास्टफूड से तेजी से बन सकता है और कही भी लेकर आसानी से जाया जा सकता है, कोई मौसम के कारण खराब होने डर नही होता। इस तरह सत्तू फास्टफूड के साथ एनर्जी ड्रिंक्स और सुपरफूड भी है।
सत्तू निर्माण की विधि
जौं, चना, मसूर, गेहूं आदि को धूप में सुखाने के बाद भूंजकर पीस लिया जाता है, जिसे सत्तू कहते है। देश के विभिन्न भागों में अलग अलग प्रकार से सत्तू बनाया जाता है लेकिन सर्वाधिक प्रचलित सत्तू जौं और चने का है।
सत्तू के लाभ
सत्तू भूख प्यास, थकावट, नेत्ररोग तथा घाव को नष्ट करता है।
ये पीने तृप्ति कारक होते। बल कारक होते है अर्थात तुरंत एनर्जी देने वाला होता है।
मधुमेह रोगियों के लिए, पेट के रोगियों के लाभकारी होता है।
अगर आप मोटे है तो जौ के सत्तू का सेवन करें
पतले है तो गेहूं के सत्तू का सेवन करें।
सत्तू लेने की सावधानियां
सत्तू दिनभर में एक बार ही लेना चाहिए।
सत्तू को रात में नही खाना चाहिए
खाने के तुरंत बाद और तुरंत पहले नही लेना चाहिए
सत्तू को आटा की भाती सान कर या चबा चबा कर नही खाना चाहिए । सत्तू को घोलकर पीना ही उचित बताया गया है।
अधिक मात्रा में भी सत्तू का सेवन नही करना चाहिए।





