प्रो कपिल कपूर
भारतीय धरोहर के द्वारा 30 सितम्बर 2023 को सत्य सांई ऑडिटोरियम नई दिल्ली में भारतीय धरोहर सम्मान समारोह (2019 और 2020) का आयोजन किया गया जिसमें 2020 के सम्मान समारोह कार्यक्रम के लिए पद्म विभूषण प्रो कपिल कपूर को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम के संबोधन में कपिल कपूर जी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के दो केन्द्र बिन्दु हैं, धर्म और ब्रह्म है अगर आप भारत की बौद्धिक परंपरा लिखना चाहेंगे, विमर्श करना चाहेंगे तो इन दो शब्दो पर हजारों वर्ष तक विमर्श हुआ है।
हमारे चार पुरुषार्थ हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इन चारों पर धर्म और मोक्ष का ब्रैकेट रहता है, तो समाज समरस रहता है, समाज प्रसन्न रहता है लेकिन आजकल धर्म और मोक्ष का ब्रैकेट हटा हुआ है। आजकल तो अर्थ और काम समाज हो गया है।
लोग पूछते हैं कि धर्म किसमें है तो धर्म ज्ञान में है, उपनिषदों में है, धर्म कठोपनिषद के नचिकेता में है जो पूछता है कि सच क्या है, मृत्यु क्या है, मृत्यु के बाद क्या होता है, किसकी मृत्यु नहीं होती है।
महाभारत की लड़ाई के बाद लोगों का विश्वास वैदिक संस्कृती से हट गया और लोगों का विश्वास भौतिकवाद में बढ़ गया जो चलकर गौतम बुद्ध तक गया। जो फिर से भागवत काल और भक्ति काल में वैदिक संस्कृति में धीरे धीरे बढऩे लगा।
भारत का ज्ञान ग्रंथो तक सीमित नहीं है बल्कि आम जनमानस तक है। हमारी ज्ञान परंपरा के प्रचार प्रसार के तीन मुख्य आधार रहे हैं। पहला आदि शंकराचार्य के प्रवचन का तरीका, दूसरा अनुवाद का तरीका 9वीं सदी में कंबन ने वाल्मीकि रामायण का तमिल में अनुवाद किया,14वीं शताब्दी में असमिया में अनुवाद हुआ। तीसरा लोकभाषाओ में 11वीं सदी में जब रामानुजाचार्य जी ने ब्रह्म सूत्र पर तमिलनाडु में लोकभाषाओं में बोलना प्रारंभ किया तो राजा ने उनको निकाल दिया, तब माल्या के राजा ने रामानुजाचार्य जी को शरण दिया। 12 सालों तक नारायण के मंदिर रहकर प्रचार प्रसार किया, उनका लिखा हुआ श्री भाष्य संस्कृत में मिलता है।
तो कहने का मतलब भारत का ज्ञान केवल इलीट क्लास के लिए नही है जो विश्विद्यालय अंग्रेज़ी में पढ़ते पढ़ाते हैं, बल्कि इन्हे तो मालूम ही नहीं है क्योंकि आज हमारे स्कूलों, विद्यालयों, विश्व विद्यालयों भारतीय ग्रंथ नही है, सबकुछ अंग्रेज़ी में लिखे हैं, अंग्रेज़ी जानने वालों के द्वारा, अंग्रेजों के द्वारा, अमेरिकियों के द्वारा लिखे हैं। भारत का ज्ञान आम जनमानस तक है।
भारतीय सभ्यता ज्ञान का केंद्र पहले दिन से है क्योंकि हमारे पास दुनियां का सबसे पुरानी किताब संस्कृत में है, दुनियां का सबसे पुराना अर्थशास्त्र है, दुनियां का सबसे पुराना ज्योतिष शास्त्र है, दुनियां का सबसे पुराना राजनीति शास्त्र है, हमारे पास दुनियां का सबसे पुराना व्याकरण है जो आज से 2800 साल पहले लिखा गया था उस वक्त यूरोप के लोग जंगलों में रहा करते थे।
जितना ज्ञान ग्रंथ भारत के चार ज्ञान भाषाओं (संस्कृत, पाली, प्राकृत और पुरानी तमिल) में मिलता है। उतना पूरे विश्व के सारे ग्रंथो को रख दें तब भी हमारे ग्रंथ उनसे कई गुना अधिक है।





