वैद्य प्रो. महेश व्यास
लेखक अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, दिल्ली के डीन (पीएचडी) हैं।
व्यक्ति को जीवत रहने के लिए शुद्ध वातावरण की आवश्यकता होती है। शुद्ध वातावरण के लिए हमे शुद्ध वायु एवम शुद्ध जल की आवश्यकता होती है। शुद्ध वायु, शुद्ध जल मिले तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है, कही ना कही प्रदूषण वायु को प्रदूषित करता है और वायु तो शरीर के लिए, जीवन के लिए मुख्य है। प्रदूषण एक प्रकार का विष है और इस प्रकार विष के लिए आयुर्वेद में जनपदोध्वंस कहा गया है यानि कि वायु प्रदूषण अधिकतम लोगों को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण का प्रभाव सबसे पहले फेफड़ो पर पड़ता है, लंग्स पर होता है फेफड़ो नली में जाकर उसको नुकसान पहुंचाता है। जिसके कारण मनुष्य को फेफड़ो की बीमारी होने लगती है। प्रदूषण के कारण मनुष्य को निमोनिया, सांस लेने में तकलीफ, खासी, अस्थमा जैसी समस्याएं होने लगती है। इन समस्याओं का संबंध श्वांस के साथ रक्त से हो जाता है। रक्त के साथ मिलने के कारण वायु प्रदूषण केवल वायु प्रदूषण नही रहता है शरीर के सभी अवयवों को, धातुओं को प्रभावित करने लगता है। जो व्यक्ति ज्यादा बाहर रहेगा उनके ह्रदय पर , फेफड़ो पर, लंग्स पर, त्वचा पर, आंखों पर प्रभाव पडऩे लगता है। वायु प्रदूषण की स्थिति में गर्भवती महिलाओं को घर से कम से ही बाहर निकलना चाहिए और आर्युवेदिक औषधियों का प्रयोग भी वैध के परामर्श के बाद ही करना चाहिए।
आयुर्वेद में वायु प्रदूषण से बचाव के लिए कई छोटे छोटे उपाय बताए गए हैं-
1. बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग करे।
2. आंखों पर चश्मे का प्रयोग करें क्योंकि वायु प्रदूषण का प्रभाव आंखों पर भी पड़ता है।
3. बाहर जाते समय दोनों नाकों में तिल का तेल या अणु तेल लगाएं आयुर्वेद में इसे नस्य कहते हैं इसे करने से नाक के माध्यम से प्रदुषित वायु अंदर प्रवेश नहीं करती है।
4. घर के अंदर वायु को शुद्ध करने वाले पौधें लगाएं जैसे नागदंती है और अनेक पौधे आते हैं जो वायु को शुद्ध करते हैं।
5. घर में कपूर, नीम इत्यादि द्रव्यों से धूपन करें।
6. तुलसी के अर्क का सेवन करे, तुलसी का अर्क गले के लिए काफी अच्छा होता है इसके साथ ही भाप लें।
8. काली मिर्च, लौंग, पुदीना, इलाइची का काढ़ा लें।
9. सोंठ का पानी पिए, कम मात्रा में ही।
10. ताबे के पात्र में पानी पीना चाहिए, जो रक्त को शुद्ध करेगा।
11. आंखों में जलन हो रहा है तो त्रिफला भिगोकर उसके पानी से आंखों को धोए।
12. बाहर की चीजों को ना खांए।
और अगर योग प्राणायाम की बात करे तो इस समय पार्कों में जाकर योग प्राणायाम ना करें घर पर ही अनुलोम, विलोम, सूर्य नमस्कार इत्यादि करें।





