नयन कैसे हो सुनयन

डॉ. भंवर लाल शर्मा
पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी


आपकी आंखों पर यदि काली पट्टी बांध दी जाए तो कल्पना करें आपको कैसा अनुभव होगा। आप कुछ भी नहीं देख पाएंगे। इसके बाद आप स्वयं ही अपने हाथों से उस बांधी पट्टी को हटा कर ही सहज महसूस करेंगे। वस्तुत हमारी आंखें स्वस्थ हों और परमपिता के बनाए संसार को देख पाएं तो मन हर्षित होता है। इससे हमें आंख से देख पाने का महत्व समझ में आता है। इसलिए हमारा और आपका यह दायित्व है कि हमारी आंखें स्वस्थ बनी रहें, ऐसे उपाय हमें करने चाहिए।
आंखों को ठीक रखने के लिए सर्वप्रथम हमें अपने आहार—विहार पर ध्यान देना पड़ेगा। अधिक मिर्च मसाले और खटाई का सेवन कम करना पड़ेगा। लाल मिर्च का अधिक प्रयोग आंखों के लिए अत्यन्त हानिकर है। दूसरे बहुत रोशनी या बहुत कम प्रकाश में पढऩा—लिखना छोडऩा पड़ेगा। सोते हुए पढऩा अथवा चलती बस या ट्रेन में पढऩा भी उचित नहीं है।
तमाम रोगों की जड़ है पेट की खराबी। यदि कब्ज़ रहता है तो त्रिफला आदि का सेवन कर पेट ठीक करना चाहिए। रेशेदार सब्जियां और चोकर समेत आटे से बनी रोटी भी इसमें सहायक है। आजकल जो जंक फूड का प्रचलन बढ़ गया है, यह भी चिन्ता का विषय है। अधिक मात्रा में चाय काफी, सिगरेट और शराब को भी छोडऩा पड़ेगा। देशी गाय के दूध और घृत का उपयोग आंखों के लिए फायदेमंद है।
दांतों का आंखों की ज्योति से संबंध है। इसलिए प्रतिदिन सुबह—शाम दातुन अवश्य करें। तंग जूते या रबर सोल वाले जूते आंख के लिए ठीक नहीं होते हैं। ठण्डी हवा के झोंकों और लू से आंखों को बचाना चाहिए। धूल, धुंआ और तेज धूप भी आंख के लिए ठीक नहीं है।
आजकल लोग घंटों कम्प्यूटर पर बैठ कर काम करते हैं। उन्हें भी बीच में काम छोड़ कर आंखों को विश्राम देना चाहिए। ठण्डे पानी के छींटो से आंख की थकान मिटती है।
ऐसी चीजों को देखने से बचना चाहिए, जिसे देखने से आंखें चौंधिया जाती हैं। सूर्य की ओर देखने से आंखें खराब हो जाती हैं। तेज धूप में घूमना—फिरना भी ठीक नहीं होता है।
हरियाली का आंखों से सीधा सकारात्मक संबंध है। प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठ हरे भरे बाग—बगीचों में घूमना चाहिए। हरी दूब पर नंगे पांव घूमना और भी अच्छा है। उदय होते सूरज की तरफ मुंह करके दस पन्द्रह मिनट भगवान भास्कर की रश्मियों का सेवन आंखों के लिए बहुत लाभकारी है।
पैरों के तलुओं पर सुबह—शाम सरसों के तेल की मालिश हमारी दृष्टि क्षमता को बनाए रखती है। जो लोग इस क्षमता को बनाए रखना चाहते हैं उन्हें जलनेति क्रिया रोज करनी चाहिए। एक नासापुट से जल पीकर दूसरे से निकालने की क्रिया को जल नेति कहते हैं। शुरू में थोड़ी गड़बड़ी हो सकती है, किंतु अभ्यास होने के बाद बहुत सहजता से यह संभव है। आवश्यक हो तो किसी जानकार से सहयोग लिया जा सकता है।
त्राटक क्रिया एक तरह का आंखों का व्यायाम है, जिसमें सुखासन में बैठ कर एक दो फीट की दूरी पर आंखों की सीध में दीये की लौ या एक कागज पर बना काला बिन्दु एकटक देखना होता है। यह भी आंखों के लिए बहुत अधिक उपयोगी क्रिया है।
उपवास का उल्लेख भी है। पर्याप्त जल पीना, दूध और फलाहार पर रहने से दोषों का पाचन होता है। पाचन प्रणाली सही होती है। इसका भी प्रभाव आंखों के स्वास्थ्य के लिए सहायक है।
आजकल हम भोजन के बाद नेपकिन या तौलिये से हाथ पोंछते हैं। यह सही नहीं है। भोजन के बाद गीले हाथों से आंखों को स्पर्श करना चाहिए। यही विज्ञान—सम्मत भी है।
हमारे यहां कहा गया है कि मल मूत्र के वेग को न रोकने वाले, प्रतिदिन आंखों में सुरमा लगाने वाले, नाक में शुद्ध सरसों तेल लगाने वाले तथा क्रोध, शोक और चिन्ता न करने वाले व्यक्तियों को आंखों के रोग नहीं होते। त्रिफला के पानी से आंखें धोने और त्रिफला घृत के सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ती है और आंखें स्वस्थ रहती हैं।
दृष्टि है तो दुनिया है। हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए कि हमारी आंखें जीवन भर स्वस्थ रहें। ह्व