धरोहर प्रतिनिधि
गत 21 सितंबर को नई दिल्ली स्थित आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में ”भारतीय धरोहर वार्षिक सम्मान समारोह—2025″ का आयोजन हुआ। इसके मुख्य अतिथि थे गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यपाल तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विद्वान आचार्य देवव्रत। ”भारतीय धरोहर” संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराजा अग्रसेन विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश के कुलाधिपति श्री नंदकिशोर गर्ग ने की, जबकि स्वागताध्यक्ष थे पूर्व सांसद श्री राजेंद्र अग्रवाल।
समारोह में आचार्य देवव्रत ने भारत और भारतीयता को बढ़ावा देने वाली तीन विभूतियों— श्री संतोष कुमार तनेजा, श्री नीरज गुप्ता और वैद्य बी. रविशंकर को ”भारतीय धरोहर वार्षिक सम्मान समारोह—2025″ से सम्मानित किया। सम्मान स्वरूप इन तीनों को एक—एक लाख रुपए और मानपत्र दिया गया। बता दें कि श्री संतोष कुमार तनेजा ”संकल्प” के संस्थापक हैं। यह संस्था छात्रों को सिविल सेवा की तैयारी कराने के साथ ही उनमें भारतीयता के बीज बोता है। इस कारण आज देश में हजारों ऐसे वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिनमें भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति एक अलग सोच पैदा हुई है। वे कुछ योजना बनाते समय भारतीयता को केंद्र में रखते हैं। श्री नीरज गुप्ता उस चौखंबा प्रकाशन की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, जो 132 वर्ष से भारतीय ज्ञान को संरक्षित और संवर्धित करने वाली पुस्तकें प्रकाशित करता है। वैद्य बी. रविशंकर लगभग चार दशक से भारतीय औषध विज्ञान और आयुर्वेद के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपने शोधों से आयुर्वेद को बढ़ाया है और इसके विशेषज्ञों की पौध खड़ी की है।
अपने संबोधन में आचार्य देवव्रत ने कहा कि हम सब बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म उस भारत में हुआ है, जो सदियों से अपनी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान के माध्यम से विश्व के कल्याण की कामना करता रहा है। दुर्भाग्य से मुस्लिम आक्रांताओं और अंग्रेजों ने लगभग 1000 वर्ष तक भारत पर शासन किया और इस कालखंड में हमारी संस्कृति और धर्म का नुकसान हुआ। लंबी गुलामी के कारण हम अपनी धरोहर और ज्ञान परंपरा से दूर हो गए। 1947 में हमें राजनीतिक स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन सांस्कृतिक स्वतंत्रता नहीं मिली। इस कारण हमारी सरकारों ने भारत की पुरानी परंपरा और ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य नहीं किया। अब समय बदला है और इस क्षेत्र में कार्य हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ऋषियों की धरती है। अंग्रेजी शब्द ”रिसर्च” ऋषि का अपभ्रंश है। ऋषियों ने हमें हर वह ज्ञान दिया है, जो हमें दुनिया से अलग पहचान देता है। ऋषियों ने हमें बताया कि जो टिके वह धर्म है और जो न टिके वह अधर्म है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. नंद किशोर गर्ग ने कहा कि आज जिन तीन विभूतियों को सम्मानित किया गया है वे अपने आप में संस्थाएं हैं। ऐसे लोगों के सम्मान से समाज में अच्छा संदेश जाता है। श्री राजेन्द्र अग्रवाल ने भारतीय धरोहर संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह भारतीय ज्ञान—संपदा को बचाने के लिए जो कार्य कर रही है वह अद्भुत है। ऐसी संस्थाओं से प्रेरणा मिलती है।
अपने सम्मान से गद्गद् श्री संतोष कुमार तनेजा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षण देना और उसे बढ़ाना बहुत ही आवश्यक है, क्योंकि यही हमारी पहचान है। वैद्य बी. रविशंकर ने कहा कि आयुर्वेद एक ऐसा पारंपरिक औषध विज्ञान है, जो दुनिया में 5000 साल से भी अधिक समय से जीवित है। दुनिया में दूसरा ऐसा कोई विज्ञान नहीं है।
इससे पूर्व कार्यक्रम के प्रथम चरण में ”भारतीय धरोहर” के महामंत्री श्री विजय शंकर तिवारी ने बीज वक्तव्य दिया। उन्होंने ”भारतीय धरोहर” की स्थापना से लेकर अब तक की उसकी यात्रा से परिचित कराया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ”भारतीय धरोहर” द्वारा प्रतिवर्ष कुछ ऐसी विभूतियों या संस्था को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने सामाजिक उत्थान तथा प्राचीन ज्ञान—संपदा के संरक्षण व संवर्धन के लिए विशिष्ट कार्य किए हों। ”भारतीय धरोहर” के वाइस चेयरमैन श्री संजीव गोयल ने बताया कि यह संस्था दिल्ली एन.सी.आर. में घर—घर तक आयुर्वेद को पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। प्रारंभ में अवश्य कुछ कठिनाइयां आईं, लेकिन समय बदलने के साथ ही संस्था की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इसके बाद प्रख्यात कवि सुदीप भोला ने देशभक्ति से ओतप्रोत कविताओं का पाठ कर दर्शकों को तालियां बजाने के लिए विवश कर दिया।
इस गरिमामय कार्यक्रम के मंच पर ”भारतीय धरोहर” के चेयरमैन श्री रमेश कपूर, कार्याध्यक्ष श्री प्रवीण शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ जन विराजमान थे।
अंत में भारतीय धरोहर के वाइस चेयरमैन श्री सुधीर गुप्ता ने मुख्य अतिथि, स्वागताध्यक्ष, अध्यक्ष सहित सभी अतिथियों और श्रोताओं के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। वंदे मातरम के गायन के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।





