वैद्य मनीषा शर्मा
BAMS , Prakriti consultant एवं मर्म चिकित्सा विशेषज्ञ
- हेमंत ऋतु शीतकालीन ऋतु है। इसका समय काल आमतौर पर मध्य नवम्बर से मध्य जनवरी तक जाता है, लेकिन हाल के बरसों में मौसम में हो रहे लगातार बदलाव से इसके लक्षण कुछ देर से देखे जा रहे हैं। भारतीय महीनों के हिसाब से यह समय मार्गशीर्ष से पौष तक का होता है। इसमें ठिठुरा देने वाली ठंड होती है। वैसे, माना जाता है कि ये देवताओं की प्रिय ऋतु है। इसे वर्ष का आभूषण भी कहा जाता है। जब यह चरम पर होती है, सूर्य की किरणों का स्पर्श प्रिय लगने लगता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इसे सबसे बेहतर समय माना गया है।इस ऋतु में चन्द्रमा की शक्ति सूर्य की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होती है। इसलिए इस ऋतु में औषधि, वृक्ष, पृथ्वी की पौष्टिकता में भरपूर वृद्धि होती है व जीव जंतु भी पुष्ट होते हैं। इस ऋतु में प्रकृति भी शरीर व स्वास्थ्य की स्थिति को सुधारने में सहायता करती है। इस ऋतु में शरीर में कफ का संचय होता है तथा पित्त दोष का नाश होता है।
शीत ऋतु में स्वाभाविक रूप से जठराग्नि तीव्र रहती है। अत: पाचन शक्ति प्रबल रहती है। ऐसा इसलिए होता है कि हमारे शरीर की त्वचा पर ठंडी हवा और हवा और ठंडे वातावरण का प्रभाव बारंबार पड़ते रहने से शरीर के अंदर की उष्णता बाहर नहीं निकल पाती और अंदर ही अंदर इक_ी होकर जठराग्नि को प्रबल करती है। अत: इस समय लिया गया पौष्टिक और बलवर्धक आहार वर्षभर शरीर को तेज, बल और पुष्टि प्रदान करता है। - इस ऋतु में चिकनाई युक्त, मीठा, भारी व मीठा भोजन लेना चाहिए।
- गरम गरम भोजन के साथ घी का सेवन करें।
- विविध प्रकार के पौष्टिक पाक, मोदक ( लड्डू) मोगर के लड्डू, गोंद के लड्डू अश्वगंधा-पाक, कौंच-पाक, मेथी के लड्डू, ब्रह्म-रसायन, च्यवनप्राश आदि का सेवन करना हितकर है।
- नये शाली चावल का सेवन करना चाहिए।
- सूखे मेवे व उससे बने पदार्थ का प्रयोग करना चाहिये।
- बलवर्धक आयुर्वेदिक रसायनों का आयु के अनुसार प्रयोग श्रेष्ठ है।
- ताकत चाहने वाले व्यक्ति इच्छित मात्रा में आहार का सेवन कर सकते हैं।
- स्नान के समय शरीर पर तेल की मालिश, उबटन करके गुनगुने जल से स्नान करना चाहिए।
- गर्म व गहरे रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए। ऊनी वस्त्रों को ओढ़कर सोएं।
- सिर, कान, नाक व पैर के तलुओं में विशेष रूप से तेल मालिश करें।
- हाथ-पांव धोने के लिए गुनगुने जल का उपयोग करना चाहिए।
- ठंडी तासीर वाले, ठंडे विशेष रूप से फ्रिज में रखे अर्थात् वात बढ़ाने वाले पदार्थाे का सेवन न करें।
- कम भोजन और बहुत पतला आहार जैसे-जल में घुले सत्तू आदि का निषेध है।
- इस ऋतु में दिन में नहीं सोना चाहिए। नंगे पांव नहीं रहना चाहिए।
- हल्के एवं सफेद रंग के सूती वस्त्र न पहनें। च





