भारतीय धरोहर प्रतिनिधि
गत 21 सितंबर, 2024 को एन. डी. एम. सी. कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में ”भारतीय धरोहर” का वार्षिक सम्मान समारोह आयोजित हुआ। इसके मुख्य अतिथि थे हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला। कार्यक्रम की अध्यक्षता की राज्यसभा सांसद श्रीमती संगीता यादव ने। इस अवसर पर ”भारतीय धरोहर सम्मान—2021″ से प्राचीन भारतीय इतिहासकार स्व. श्री राजेंद्र सिंह जी को सम्मानित किया गया। उनका सम्मान उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रंजिता कौर जी ने ग्रहण किया। ”भारतीय धरोहर सम्मान—2022″ से विभूषित हुए प्रख्यात फिल्मकार, निर्देशक, लेखक और चाणक्य धारावाहिक के माध्यम से जन—जन के मन में राष्ट्र जागरण का भाव पैदा करने वाले डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी जी। ”भारतीय धरोहर सम्मान—2023″ से सम्मानित हुए एकल विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय समाज में शिक्षा की लौ जलाने वाले प्रसिद्ध उद्योगपति श्री लक्ष्मी नारायण गोयल। इन तीनों विभूतियों को महामहिम राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला ने मानपत्र और एक लाख रुपए का चेक देकर सम्मानित किया।
सम्मान समारोह में भारतीय धरोहर के चेयरमैन श्री रमेश कपूर, वाइस चेयरमैन श्री संजीव गोयल, श्री सुधीर गुप्ता, भारतीय धरोहर के संगठन मंत्री श्री प्रवीण शर्मा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।
कार्यक्रम के विधिवत् उद्घाटन के पश्चात् भारतीय धरोहर संस्था के महामंत्री श्री विजय शंकर तिवारी ने बताया कि कैसे भारतीय धरोहर संस्था का श्रीगणेश हुआ। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान—मनीषा की शून्यता को दूर करने के उद्देश्य से 2005 में भारतीय धरोहर संस्था को प्रारम्भ किया गया था। ”भारतीय धरोहर” पत्रिका का पहला अंक ”धरोहर” नाम से प्रकाशित किया गया और यह अंक आयुर्वेद पर केंद्रित था। क्योंकि उस समय यह ध्यान में आया कि कोई सजीव, जीवंत धरोहर है तो वह है आयुर्वेद। इसलिए भारतीय धरोहर संस्था प्रयास कर रही है कि आयुर्वेद घर—घर तक पहुंचे। इसके लिए भारतीय धरोहर संस्था राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अनेक स्थानों पर नि:शुल्क आयुर्वेदिक परामर्श केंद्र खोलने जा रही है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य स्वस्थ कैसे रहे, उसका खान—पान कैसा हो, उसके लिए भारतीय धरोहर ने नोएडा में प्रकृति परीक्षण केंद्र प्रारंभ किया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में बहुत सारे क्षेत्र हैं, जहां पर भारत की ज्ञान—मनीषा पर काम करने वाले लोग हैं, लेकिन उनके काम को न सम्मान मिलता है और न उनको सम्मान मिलता है। पश्चिम में तो नोबेल पुरस्कार है, लेकिन भारत के ”नोबेल” को कौन प्रारंभ करेगा! इसलिए भारतीय धरोहर संस्था भारतीय संस्कृति, भारतीय इतिहास, भारतीय धरोहर आदि के क्षेत्र में कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मान करती है। आशा है कि यह सम्मान भारत का ”नोबेल पुरस्कार” सिद्ध होगा।
सम्मान ग्रहण करने के पश्चात् डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि जब हम धरोहर की बात करते तो मेरे सामने प्रश्न आता है कि इस देश के 5,000 साल का उत्तराधिकारी कौन है! आज हमारी सबसे बड़ी चुनौती है कि हम अपनी धरोहर को मान नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने 5,000 वर्ष के इतिहास को संभालने और उसे जन—जन तक पहुंचाने के लिए कार्य करना चाहिए। हमारे पुरखों ने पांडुलिपियों के माध्यम से ज्ञान का भंडार छोड़ा है। इस भंडार से ज्ञान की गंगा बह सकती है, बशर्ते हम उन पांडुलिपियों का अनुवाद करें। उन्होंने कहा कि विश्व का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान एक वक्ता ने एक श्रोता को दिया है। कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान अर्जुन को दिया है। यह ज्ञान वे भीष्म, युधिष्ठिर आदि को भी दे सकते थे। यही नहीं, आकाशवाणी के माध्यम से भी वे युद्ध क्षेत्र में सभी सैनिकों को दे सकते थे, लेकिन उन्होंने इसके लिए अर्जुन को चुना, क्योंकि बदलने के लिए एक व्यक्ति ही काफी होता है। कुछ ऐसा बदलाव का कार्य कर रही है भारतीय धरोहर संस्था। उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी अपनी धरोहर और संस्कृति का सम्मान करें। ऐसा करने से ही इन्हें सहेजा और संवारा जा सकता है।
श्री लक्ष्मी नारायण गोयल ने कहा कि अपनी धरोहर, अपनी संस्कृति का संरक्षण करना उतना ही आवश्यक है, जितना कि एक जीव के जीवन में भोजन महत्व रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि धरोहर को संरक्षित करने के साथ ही समाज को एकजुट रखने का भी कार्य होना चाहिए। हमारी एकजुटता ही भारत के भविष्य को तय करेगी।
महामहिम राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला कहा कि व्यक्ति का सम्मान नहीं होता है, बल्कि उसके कर्म का सम्मान होता है। धरोहर घर—घर में होती है। दादी, मां की कहानियों से लेकर प्रतिदिन आप जिससे भी मिलते हैं, वह किसी न किसी रूप में शिक्षा होती है, धरोहर होती है। उन्होंने भारतीय धरोहर संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति, भारतीय ज्ञान—परंपरा के लिए अभिनंदनीय कार्य कर रही है।
समारोह का बहुत ही कुशल संचालन अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के डीन वैद्य महेश व्यास ने किया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् से हुआ।
भारतीय धरोहर संस्था आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, भारतीय ज्ञान—परंपरा के लिए अभिनंदनीय कार्य कर रही है। इस संस्था को चलाने वाले सभी महानुभावों का अभिनंदन!
— शिव प्रकाश शुक्ला
राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश
अपनी धरोहर को संरक्षित करने के साथ ही समाज को एकजुट रखने का भी कार्य होना चाहिए। हमारी एकजुटता ही भारत के भविष्य को तय करेगी।
—लक्ष्मी नारायण गोयल
प्रसिद्ध उद्योगपति
हमें अपने 5,000 वर्ष के इतिहास को संभालने और उसे जन—जन तक पहुंचाने के लिए कार्य करना चाहिए। हमारे पुरखों ने पांडुलिपियों के माध्यम से ज्ञान का भंडार छोड़ा है। इस भंडार से ज्ञान की गंगा बह सकती है, बशर्ते हम उन पांडुलिपियों का अनुवाद करें।
—डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी
प्रख्यात फिल्म निदेशक
यदि कोई सजीव, जीवंत धरोहर है तो वह है आयुर्वेद। इसलिए भारतीय धरोहर संस्था प्रयास कर रही है कि आयुर्वेद घर—घर तक पहुंचे। इसके लिए संस्था राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अनेक स्थानों पर नि:शुल्क आयुर्वेदिक परामर्श केंद्र खोलने जा रही है।
—विजय शंकर तिवारी
महामंत्री, भारतीय धरोहर





