पं डॉ गिरीश मिश्र
ज्योतिष आचार्य एवं उपाध्यक्ष, विश्व हिंदू पीठ
भारतीय पंचांग की सबसे विशिष्ट विशेषता यह है कि यह केवल तिथियों का गणना-पत्र नहीं, बल्कि प्रकृति और खगोलीय गति के साथ तालमेल बैठाने वाली एक अत्यंत सूक्ष्म और वैज्ञानिक प्रणाली है। इसी प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है पुरुषोत्तम मास, जिसे सामान्यत: ‘अधिक मास’ कहा जाता है। यह मास न केवल काल-गणना की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पवित्र माना जाता है।
पुरुषोत्तम मास
पुरुषोत्तम यह शब्द मुख्य रूप से भगवान श्री विष्णु या श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त होता है, जो क्षर (नाशवान) और अक्षर (अविनाशी) से परे है। और सर्वोच्च सत्ता का प्रतीक है। यह शब्द धार्मिकता, सद्गुण और परम पूर्णता का सूचक है। पुरुषोत्तम मास को अधिक मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह मास भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है।
इस वर्ष पुरुषोत्तम मास 17 मई, 2026 रविवार से प्रारंभ होकर 15 जून, 2026 सोमवार तक रहेगा।
पुरुषोत्तम मास, अधिक मास और मलमास में अंतर
1 पुरुषोत्तम मास—पौराणिक कथाओं (नारद पुराण, और पद्म पुराण) के अनुसार जब कोई भी देवता इस महीने का स्वामी बनने के लिए तैयार नहीं हुआ तब भगवान श्री विष्णु ने इस महीने को अपना नाम और स्वामित्व प्रदान किया और इसे मलमास से सबसे उत्तम पुरुषोत्तम मास बना दिया।
अहमेते यथा लोके प्रार्थत: पुरुषोत्तम: ।
तथायमपि लोकेषु प्रथित: पुरुषोत्तम: ।।
अधिक मास- यह हिंदू माह पंचांगो में अतिरिक्त 13 वां महीना है।
मलमास-
यास्मिन मासेन संक्रांति: संक्रांति: इमेव व।
मलमास: स विज्ञेयो मासे त्रिंशत्तमे भवेत् ।।
इस महीने में कोई भी सूर्य संक्रांति नहीं होने पर (सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करता) इस कारण इसे ज्योतिषी रूप से अशुद्ध या मलिन माना जाता है। इसलिए इसे मलमास कहते हैं। निष्कर्ष यह है कि तीनों एक ही महीने के अलग-अलग नाम हैं।
क्यों आता है यह 13वां महीना
भारतीय काल-गणना चंद्र और सूर्य दोनों की गति पर आधारित है, जिसे लूनी-सोलर प्रणाली कहा जाता है। एक चंद्र मास लगभग 29.5 दिनों का होता है, और इस प्रकार 12 चंद्र मास मिलकर लगभग 354 दिन बनाते हैं। दूसरी ओर, सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है। इस प्रकार हर वर्ष लगभग 11 दिन का अंतर उत्पन्न होता है। यदि इस अंतर को यथावत रहने दिया जाए, तो कुछ वर्षों में ऋतुओं और महीनों का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
इस असंतुलन को दूर करने के लिए भारतीय ज्योतिष में एक अद्भुत समाधान दिया गया है। लगभग हर 2.5 से 3 वर्ष में, जब यह अंतर लगभग 30 दिन (एक महीने) के बराबर हो जाता है, तब एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। यही अधिक मास आगे चलकर पुरुषोत्तम मास के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
अधिक मास के निर्धारण का आधार अत्यंत रोचक और खगोलीय नियमों पर आधारित है। सामान्यत: प्रत्येक चंद्र मास के भीतर सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, जिसे संक्रांति कहा जाता है। किंतु जब किसी चंद्र मास में सूर्य की कोई भी संक्रांति नहीं होती, अर्थात सूर्य उस पूरे महीने में राशि परिवर्तन नहीं करता, तब वह मास अधिक मास घोषित कर दिया जाता है।
पुरुषोत्तम मास में क्या करें क्या ना करें
क्या करें – यह महीना विशेष रूप से भगवान श्री हरि नारायण विष्णु को समर्पित है तो इस महीने में यज्ञ, अनुष्ठान, मंत्र जाप, हवन, पूजा पाठ श्रीमद् भागवत जी का पाठ, मानस पाठ एवं श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से विशेष फल एवं पुण्य लाभ प्राप्त होता है।
यह महीना आत्म शुद्धि एवं आत्म चिंतन, ध्यान योग साधना के लिए अच्छा माना जाता है।
क्या ना करें- इस महीने में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, शादी व्दिरागमन, जमीन की रजिस्ट्री, गृह प्रवेश, भवन निर्माण, किसी भी नए वस्त्र या चीजों को खरीदना, मुंडन,
यज्ञोपवीत आदि सभी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।





