क्यों अच्छी है सब्जी?

संजीव कपूर {jathumbnail off}

नए साल में डाइटरी के संबंध में एक संकल्प है, जो आजकल चल रहा है, वह है ‘हरियाली का मंत्र’। अपरिहार्य रूप से हरा का विकल्प इन दिनों लोगों को आकर्षित कर रहा है। इसका कारण है हरे सब्जियों के आहार की सादगी और आधुनिक श्रमसाध्य जीवन शैली की माँग है। ज़्यादा से ज़्यादा लोग कई कारणों से नए साल का यही संकल्प ले रहे हैं। कुछ लोग जानवरों के कल्याण के बारे में चिंता करके या फिर नैतिक कारणों से क्योंकि वे जानवरों के मृत्यु को सहन नहीं कर पा रहे हैं। यह धार्मिक कारण भी हो सकता है। यह स्वास्थ्य का मुद्दा या घर के आर्थिक संतुलन का मामला भी हो सकता है। जो भी हो, मेरे विचार से कई तरह के कारणों को मिलाकर लोग हरियाली की तरफ दौड़ रहे हैं।

शाकाहारी आहार संपूर्ण आहार होता है। विशेषज्ञ के सलाहानुसार शाकाहारी आहार में यानि फलों और सब्जियों में कम मात्रा में सैचुरेटेड फैट, उच्च मात्रा में फाइबर, भरपूर मात्रा में कॉमप्लेक्स कार्बोहाइड्रेड रहता है। यह स्वास्थ्यवद्र्धक विकल्प और अच्छा संतुलित आहार है। बहुत लोगों का मानना है कि डाइट/आहार में बिना माँस के पौष्टिकता पूर्ण नहीं होती है। चलिए मैं आपको एक महत्वपूर्ण सच्चाई से अवगत कराता हूं, वह है संतुलित शाकाहारी आहार की जीवन के हर स्तर पर ज़रूरत होती है, जैसे – गर्भावस्था के दौरान, दुग्धदायिनी माँ के लिए, शिशु के लिए, बच्चे के लिए और वयस्कों के लिए सलाह दी गई है और स्वीकार भी किया गया है।

चलिए, हम स्वास्थ्य के क्षेत्र में सब्जियों से मिलने वालों लाभों की तरफ नजऱ डालते हैं। शाकाहारी आहार में फैट यानी कि वसा की मात्रा कम होती है और शाकाहारी खाने वालें माँसाहारी खाने वालें की तुलना में ज़्यादा पॉलीअनसैचुरेटेड फैट ग्रहण करते हैं। माँसाहारी ऐनिमल प्रोडक्ट और मीट से ज़्यादा सैचुरेटेड फैट ग्रहण करते हैं, जो नुकसानदेह होता है। शाकाहारी आहार में हरी पत्तेदार सब्जियाँ और ताजा फल रहते हैं जो सेल्युलोस और बायोएक्टिव कम्पाउन्ड से परिपूर्ण होते हैं और यह दो महत्वपूर्ण तत्व हमें बहुतायत मात्रा में स्वास्थ्य को लाभ पहुंचते है। हरी पत्तेदार सब्जियों में जरूरी मिनरल और एन्ज़ाइम होते है, जो जरूरी शारीरिक प्रणाली और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

शाकाहारी आहार को लेकर लोकप्रिय मिथकों को अच्छी तरह समझने का प्रयास करते हैं। पहला मिथक है कि ज्यादातर शाकाहारी आहार ग्रहण करने वाले प्रोटीन, फैट और विटामिन ज्यादा प्राप्त नहीं कर पाते हैं। सच यह है कि शाकाहारी करी और दाल के द्वारा रोज के जरूरत के प्रोटीन की आपूर्ति हो जाती है। दालें आसानी से हजम भी हो जाती हैं। दूसरा मिथक है कि शाकाहार में विटामिन बी12 पर्याप्त नहीं रहता है। सच यह है कि व्हीट(गेंहू) ग्लूटेन, सोया मिल्क, दही और दूध से शाकाहारी के बी12 की ज़रूरत पूर्ण हो जाती है। ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी ऐसिड शरीर खुद उत्पादन नहीं कर सकता है। शाकाहारी आहार में ऑलिव, ऑलिव आइल, अखरोट, टोफू, बादाम तेल, सूर्यमुखी तेल और कैनोला आइल से यह भी संभव हो जाता है।

इस प्रकार स्वास्थ्य लाभ ही सबसे बड़ा कारण है कि लोग हरियाली की तरफ दौड़ रहे हैं। सब्जी की जो श्रेष्ठता हमें अच्छा विकल्प देती है, वह है कम मात्रा में सैचुरेटेड फैट के साथ-साथ कोलेस्ट्रोल, कॉमप्लेक्स कार्बोहाइड्रेठ का ज़्यादा अंतग्र्रहण और डाएटरी फाइबर, पर्याप्त मात्रा में मिनरल और विटामिन। सालों के विभिन्न प्रकार के अनुसंधान से पता चलता है कि जो लोग शाकाहारी आहार ग्रहण करते हैं उन्हें हृदय संबंधी, मोटापा, हाइपरटेनशन, टाइप-2 मधुमेह, विपुटिता और ब्रेस्ट कैन्सर की बीमारी की संभावना कम हो जाती है।

पौष्टिकता के दृष्टि से शाकाहारी आहार संतुलित होता है। मैं सोचता हूं कि ज़रूरत के अनुसार पहले से योजना बनाकर, फल और सब्जियों के आहार के विभिन्नता को ऐसे सजाएँ कि वह रोचक लगे। हर घंटा और ज़रूरत हरियाली की ही माँग कर रहा है। इसलिए आश्चर्य नहीं होता है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोग हरियाली की तरफ अपनी दिशा को बदल रहे हैं।