भारतीय धरोहर अखिल भारतीय कार्यकारी समिति बैठक-2025

भारतीय धरोहर की अखिल भारतीय कार्यकारी समिति की वार्षिक बैठक गत 15 जून, 2025 को नोएडा में आयोजित हुई। इस बैठक में भारतीय धरोहर के न्यासी, संरक्षक और देशभर के विचार मंडलों ने भाग लिया। बैठक में बड़ी संख्या में भारतीय धरोहर के शुभचिंतकों के द्वारा भारतीय धरोहर पत्रिका, वैद्यशाला, प्रकृति परीक्षण, नि:शुल्क आयुर्वेदिक परामर्श शिविरों और पूर्व में भोजन से भेषज, श्रेष्ठ संतान, देश के विभिन्न हिस्सों में आहार-विहार स्वस्थ जीवन का आधार जैसे कार्यों के विषय में उत्साह जनक विचार और सुझाव दिए गए। इसके साथ ही भारतीय धरोहर के रजत जंयती वर्ष तक के आगामी लक्ष्यों पर गंभीर चिंतन और विमर्श हुआ।

भारतीय धरोहर के संगठन मंत्री एवं संपादक श्री प्रवीण शर्मा जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि संपूर्ण विश्व में सम्मान अर्जित करना है और सद्भाव भी प्रसारित करना है तो अपनी प्राचीन ज्ञान संपदा पर विमर्श खड़ा करना होगा और विमर्श करने के बाद जो उपयोगी सूत्र निकलते हैं उनका क्रियान्वयन प्रारंभ कराना होगा। ये सूत्र एक भी हो सकते है, दो भी हो सकते हैं, दस भी हो सकते है, अनेक हो सकते है। मेरा तो मानना है कि उनकी कल्पना करना कठिन है वो अनेकों है जो भारत को एक विश्व शक्ति बना सकते हैं। सामान्यत: हम बहुत प्रसन्न होते है कि हम विश्व की बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति हैं लेकिन ये हमारी जनसंख्या के अनुपात में बहुत कम है। हमको बहुत आगे जाना है और बहुत आगे जाने के लिए हमें आधुनिक ज्ञान में विशेषज्ञता तो करनी ही पड़ेगी, जो हमारी प्राचीन ज्ञान संपदा है उस पर बहुत काम करने की आवश्यकता है।

भारतीय धरोहर के वाइस चेयरमैन संजीव गोयल जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय धरोहर का पंच लाइन ”भारत के प्राचीन ज्ञान विज्ञान एवं संस्कृति का संरक्षण, शोध एवं संवर्धन” है। उन्होंने भारतीय धरोहर के द्वारा पिछले 20 वर्षों में किए गए उत्कृट कार्यों को रुपरेखा प्रस्तुत किया और इसके साथ ही भारतीय धरोहर के रजत जंयती पूर्ण होने तक के लक्ष्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हम हर दिन आयुर्वेद हर घर आयुर्वेद के अनुसार नि:शुल्क आयुर्वेदिक मोबाईल वैन प्रारंभ करेंगे। इसके अलावा भारतीय धरोहर विचार मण्डलों के द्वारा नि:शुल्क आयुर्वेदिक प्रकल्प चल रहे हैं, जिसको आने वाले समय में एनसीआर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विचार मण्डलों के सहयोग से आगे बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है।

भारतीय धरोहर के महामंत्री एवं प्रधान संपादक श्री विजय शंकर तिवारी जी ने अपने संबोधन में बताया कि श्रेष्ठ संतान का विज्ञान विषय पर भारतीय धरोहर के द्वारा पिछले कई वर्षों से कार्य किया जा रहा है, राष्ट्र का नागरिक श्रेष्ठ होगा तो राष्ट्र स्वयमेव उन्नत होगा। प्रत्येक दंपत्ति की कामना होती है कि उनकी संतान श्रेष्ठ हो, गुणवान हो और ये ज्ञान आयुर्वेद में है। हमने श्रेष्ठ संतान विषय पर एक पुस्तिका भी प्रकाशित की है। भारतीय धरोहर की वैद्यशाला में वैद्य स्वाती त्यागी जी इस विषय पर सफल कार्य कर रही हैं।

भारतीय धरोहर की अखिल भारतीय कार्यकारी समिति की बैठक में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के डीन और भारतीय धरोहर संस्था के संयुक्त महामंत्री प्रोफेसर महेश व्यास जी ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि अगर आहार विहार का विशेष ध्यान दिया जाए तो व्यक्ति जीवनभर पर स्वस्थ रह सकता है। व्यक्ति बीमार ना हो उसके लिए भारतीय धरोहर संस्था के द्वारा सर्वप्रथम जो कार्य प्रारंभ किया गया था, वह था ”भोजन से भेषज”। कई प्रकार की व्याधियों का उपचार आहार विहार के माध्यम से किया जा सकता है। अगर हमारा आहार विहार ठीक होगा तो हम जीवन भर बिना औषधियों के स्वस्थ रह सकते हैं। भारतीय धरोहर के द्वारा प्रकृति परीक्षण विषय पर भी पिछले 15 वर्षों से गंभीरता पूर्वक कार्य किया गया है तथा देश भर में 30 से अधिक संगोष्ठियों का आयोजन भी किया है।

प्रख्यात भागवत कथा वाचक आचार्य पवन नंदन जी ने कहा कि भारतीय धरोहर को, भारतीय संस्कृति और संस्कारों को बचाना है तो संस्कृत भाषा को बचाना बहुत आवश्यक है। आज के समय में कॉन्वेट शिक्षा पद्धति के द्वारा सर्वाधिक ह्रास किसी भाषा का हुआ है तो वो है हमारी देव भाषा संस्कृत। जब हमारे बच्चों को संस्कृति भाषा का ज्ञान ही नहीं होगा तो हम कैसे उन्हें अपने धर्म ग्रंथों के बारे में शिक्षा दे पाएंगे। बच्चे तो छोड़ों बच्चों के अधिकतर माता-पिता को भी संस्कृत भाषा का ज्ञान नहीं है। संस्कृत तो छोडि़ए अब तो कॉन्वेट स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को हिन्दी भी सही से नहीं आती है तो मेरा मानना है कि भारत की धरोहर को बचाना है तो संस्कृत भाषा व अपनी मातृ भाषा हिन्दी को भी बचाना होगा अन्यथा जिस प्रकार से अंग्रेजीकरण का दौर चल रहा है कहीं ऐसा न हो जाए कि संस्कृत और हिन्दी भाषा विलुप्त हो जाए।