कुत्तों से प्यार, कहीं कर दे न बीमार

आशुतोष कुमार सिंह
लेखक स्वास्थ्य पत्रकार हैं।


एक प्रसिद्घ कहावत है – काटन चाटन श्वान के, दोऊ विधि विपरीत। तात्पर्य है कि कुत्ता चाहे काटे या फिर प्यार से चाटे, मनुष्य के लिए दोनों ही स्थितियाँ नुकसानदेह हैं। पिछले कुछ दशकों में हमने अपने पालतू जानवरों को अपने किचन से लेकर अपने बेडरूम तक में स्थान दे दिया है। खासतौर से अगर हम कुत्तों की बात करें तो यह बात कुछ ज्यादा ही सही है। लेकिन हम यह भूल गए हैं कि कुत्तों को अपने बेडरूम तक में स्थान देकर हम कितने रोगों को बुला रहे हैं। कुत्तों के प्यार में कई बार हम उसे चूमने लगते हैं, उससे अपना मुँह आदि चटवाने लगते हैं लेकिन यह प्यार आपको बहुत भारी पड सकता है।
आयुर्वेद में हिंसक जानवरों के दंश जैसे कुत्ता, व्याघ्र, भेडिया, भालू, लोमडी, लकडबग्घा आदि के दंश को विषाक्त माना गया है तथा इसे अलर्क विष कहते है। यही अलर्क विष आज रैबीज नामक बीमारी से जाना जाता है। चूंकि श्वान (कुत्ता) आज के समय में एक पालतू जानवर है तथा इसके लार में ही रैबीज वायरस पाया जाता है, अत:इससे बचाव करना चाहिए। इसलिए भारत में कभी भी जानवरों को कमरों में रखने की परंपरा नहीं रही। भारत में मांसाहारी पशुओं को हमेशा घर के बाहर और गाय, बकरी, घोड़े जैसे शाकाहारी पशुओं को घरों के अंदर दालान में रखने की परंपरा रही है। परंतु कमरे में किसी भी जानवर को स्थान नहीं दिया गया है। यह देखना काफी विडंबनापूर्ण ही है कि आज जहां एक ओर कुछ लोग कुत्ते-बिल्लियों के लिए प्रेम जताते हुए बेडरूम में सुलाने वाले लोग बडे शौक से पशुओं का मांस खाते हैं और खाने की वकालत भी करते हैं।
इस संबंध में बीबीसी हिन्दी ने एक केस स्टडी प्रकाशित किया है। उसके अनुसार, डॉ. जैको नेल कॉकर स्पैनियल नस्ल के अपने कुत्ते हार्वी के साथ खेल रहे थे जब उन्होंने अपने हाथ पर हल्की सी खरोंच देखी। उन्होंने खरोंच को साफ किया और फिर रोज के कामों में लग गए। दो हफ्ते तक सब ठीक रहा लेकिन उसके बाद उन्हें फ्लू जैसा कुछ हुआ। उन्हें समझ नहीं आया कि आंखिर हो क्या रहा है। दरअसल उन्हें कुत्ते की लार की वजह से सेप्टिसीमिया (एक तरह का संक्रमण) हो गया था जिससे उनके खून में जहर फैल गया और उनकी बीमारियों से लडने की ताकत जाती रही। सेप्टिसीमिया संक्रमण दुनिया भर में होने वाली मौतों के पीछे एक बडी वजह है। नेल मरे तो नहीं लेकिन वे मौत के बहुत करीब थे। दुनिया भर में हर साल तकरीबन दो करोड लोग सेप्टिसीमिया के शिकार होते हैं। नेल ने बताया कि इस दौरान वे बुरी तरह से चिडचिडे और अवसादग्रस्त हो गए थे। हालांकि तीन महीने के बाद वे दोबारा चलने लगे। लेकिन जो हुआ, उस पर उन्हें आज भी यकीन नहीं होता। नेल की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। अपने आप तकलीफ भोगने के बाद उन्हें एक और बेहद मुश्किल फैसला लेना पडा। उन्हें अपने प्यारे कुत्ते हार्वी को जान से मारना पडा ताकि कोई और उनकी तरह संक्रमित न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्तों के लोगों के चेहरे चाटने से बीमारी फैल सकती है। प्रोफेसर जॉन ऑक्सफोर्ड, लंदन विश्वविद्यालय के क्वीन मैरी में वायरोलॉजी और बैक्टीरियोलॉजी के एमेरिटस प्रोफेसर ने यह दावा किया कि वायरस कुत्तों से भी मनुष्यों में फैल सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि कुत्ते लगातार अपनी नाक और मुंह में गंदगी रखते हैं और उनमें कई तरह के वायरस भी हो सकते हैं जो संपर्क में आने से आप तक भी पहुंच सकते हैं किस करने या चाटने से। कुछ वायरस काफी घातक हो सकते हैं जो आपके लिए परेशानी खडी कर सकते हैं। अधिकांश लोग अपने कुत्तों को उनके चूमने और हाथों या मुंह को चाटने का विरोध नहीं कर पाएंगे। लेकिन वैज्ञानिकों ने चेताया कि उनके मुंह में 20 से 30 मिलियन तक वायरस हो सकते हैं।
केजीएमयू (किंग जॉज्र्स मेडिकल यूनिवर्सिटी) में जानलेवा बीमारी हाइडेटिड सिस्ट के तीन मरीज सामने आए हैं। यह बीमारी कुत्तों के संपर्क में आने से फैलती है। इसकी चपेट में आने से लिवर और फेफडे में झिल्ली बन जाती है। झिल्ली फटने से इन अंगों के फेल होने की आशंका रहती है। इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ पाविया के सहयोग से हुए शोध में तीन मरीज सामने आने के बाद केजीएमयू ने इनका मुफ्त इलाज करने का फैसला किया है। केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग के हेड डॉ. अभिनव अरुण सोनकर ने बताया कि पेरू, मोरक्को, बुल्गारिया, रोमानिया और अर्जेंटीना के बाद लखनऊ में शोध किया गया। इस दौरान तीन मरीज सामने आए। चौंकाने वाली बात यह है कि इन मरीजों में बीमारी के लक्षण नहीं दिख रहे थे। अब इटली की टीम जांच के लिए इनके ब्लड सैंपल भी ले जा रही है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने पालतू पशुओं को लेकर सतर्क रहें। उनको अपने घर में उतना ही स्थान दें जिससे हमें कोई बीमारी न हो। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि कुत्तों से प्यार करें परंतु उन्हें घरों में न घुसाएं। घरों में घुसाएं तो उनके साथ चूमा-चाटी न करें।