अयोध्या के वैभव के बारे में वेद, पुराण, श्रीरामचरितमानस, वाल्मिकी रामायण में बहुत ही विहंगम वर्णन मिलता है।
विगत कई शताब्दियों से अयोध्या अपने गौरव की पुन:प्रतिष्ठा की प्रतीक्षा में थी। प्रभु श्रीराम की अनुकंपा से करोड़ों रामभक्तों की प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त हुई और उनकी सनातन आस्था की विजय हुई। लगभग 500 वर्षों के संघर्ष एवम् लाखों राम भक्तों के बलिदान के बाद प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली धर्मनगरी श्रीअयोध्या जी की पावन भूमि पर भव्य और दिव्य राष्ट्र मंदिर की स्थापना की प्रक्रिया लगभग पूर्णता की ओर अग्रसर है और आगामी 22 जनवरी को प्रभु श्रीराम गर्भगृह में विराजमान होंगे जो ना सिर्फ़ भारतवर्ष में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के भक्तों के लिए सुखद अवसर होगा बल्कि विश्व के कोने-कोने में रहने वाले प्रत्येक सनातनी एवम् मर्यादा पुरूषोत्तम राम में आस्था रखने वालों के लिए सुखद होगा।
नवंबर 2019 में जब सुप्रीम कोर्ट के द्वारा राम मंदिर के पक्ष में निर्णय आया था। तब से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और सम्पूर्ण अयोध्या के विकास के लिए बहुत तीव्र गति से कार्य हुआ है।
2017 में जब उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और रामभक्त सरकार सत्ता में पदारूढ़ हुई है तब से ही अयोध्या में प्रतिवर्ष दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित होने लगे। जिसके कारण अयोध्या नगरी को विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति और आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करने में सफलता प्राप्त हुई है और ये सब प्रभु राम की कृपा से हो रहा है। अयोध्या में दीपोत्सव और राम मंदिर निर्माण के कारण ही तीथार्टन और रोजगार के नए नए अवसर भी उपलब्ध हुए हैं। इन प्रयासों का ही परिणाम है कि अयोध्या जी में आने वाले श्रद्वालुओं की संख्या पिछले पांच वर्षो में लगभग पांच गुना बढ़ गई है। विदेशी पर्यटकों की संख्या भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है और स्थानीय लोगों के जीवनस्तर में परिवर्तन लाने में सार्थक सिद्ध हो रही है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में बनने वाले मिट्टी के दीये, माटीकला से जुड़े हस्तशिल्पियों और अन्य व्यवसायियों को व्यापार के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
केंद्र सरकार अयोध्या को पुन: भारत की सांस्कृतिक व आध्यत्मिक राजधानी के रूप में गौरवभूषित करने की है। इसे लक्ष्य मानकर देश और प्रदेश की सरकारें अयोध्या नगरी को सजाने-संवारने का काम कर रही है। पूरा विश्व अतिशीघ्र नव्य, दिव्य और भव्य अयोध्या का साक्षात्कार करेगा। अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर को राष्ट्र मन्दिर के रुप में देखा जा रहा है, तो वहीं विभिन्न विभागों की सैकड़ों से अधिक परियोजनाओं पर काम जारी है। सांस्कृतिक महत्व वाले ब्रह्मकुंड, संध्या कुंड, मनुमुनि कुंड, विद्या कुंड एवम् अन्य कुंडों के कायाकल्प का कार्य चल रहा है। रामायण परंपरा की ”कल्चरल मैपिंग” हो रही है तो राम वनगमन पथ पर रामायण चित्रशालाएं, रंगमहल का निर्माण की कार्यवाही प्रतिबद्धतापूर्वक जारी है। नव्य अयोध्या में पुरातन संस्कृति सभ्यता का संरक्षण तो हो ही रहा है। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए सभी आधुनिक नगरीय सुविधाओ को बढ़ावा मिल रहा है तथा देश विदेश के लोग बाहर से आकर अयोध्या में पूँजी लगा रहें है, नए नए होटल, रेस्टोरेंट, रिजॉर्ट बन रहे। इस मोक्षदायिनी नगरी में वैदिक सिटी, स्मार्ट सिटी, सोलर सिटी भी बनाई जाएगी इसके साथ साथ सरयू के तट पर 100 एकड़ में प्राकृतिक तट बनाया रहा है।
अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की परिधि में सभी धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों के जीर्णोद्धार का कार्य त्वरित गति से हो रहा है। यह प्रयास सांस्कृतिक संवर्धन और पर्यटन को प्रोत्साहन देने वाले होंगे साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी सृजित करेंगे। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माणाधीन है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम जिस मार्ग से वनवास के लिए गए थे श्रीराम वनपथ गमन मार्ग से जाना जाता है। जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश सरकार कर रही है और आने वाले समय में अयोध्या से चित्रकूट तक साढ़े तीन घंटे में ही पहुंचा जा सकेगा। नियोजित प्रयासों से यह नगरी वैदिक सिटी के रूप में विश्व मानचित्र पर प्रतिष्ठित होगी।
प्रधानमंत्री मोदी जी के कर कमलों से सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को समर्पित ”लता चौक” का उद्घाटन अभी कुछ दिन पहले ही नया घाट, सरयू तट पर किया गया है जो न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि संगीत-कला के साधकों के लिए भी गौरव एवं प्रेरणा स्थल बन रहा है।
आज संपूर्ण विश्व में रह रहे भारतीय और भारतवंशी अयोध्या की आस्था और आध्यात्मिकता से अपनी पहचान जोड़कर गौरवान्वित हो रहे हैं। भगवान श्रीराम की कृपा से अयोध्या नगरी का वैभव ना सिर्फ़ पुन: लौट रहा है।




