मधुमेह में कारगर है ज्योतिष

डॉ. पवन सिन्हा :रोगों के संबंध में कुछ लोगों की धारणा यह है कि रोग आहार-विहार की अनियमितता के कारण उत्पन्न होते हैं परन्तु व्यवहार में ऐसा नहीं है। इस धारणा से अनुवांशिक रोग, महामारी, दुर्घटना से उत्पन्न रोगों के कारणों की भली भांति व्याख्या नहीं की जा सकती। ज्योतिष शास्त्र में रोगों का कारण पूर्व कर्मों का प्रभाव दोषों का प्रकोप, वात-पित्त और कफ का असंतुलन माना जाता है। ज्योतिष आपको यह बता सकता है कि आपके शरीर की क्या प्रकृति है और उससे आपको कौन से रोग हो सकते हैं?
ज्योतिष के माध्यम से आप कुछ उपाय करके उन प्रवृत्तियों को समाप्त कर सकते हैं, जो आपको रोग दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी लड़की या स्त्री को पैर बाहर की ओर करके चलने की आदत है तो उसके पैरों में तकलीफ हो सकती है क्योंकि यह संकेत है कमजोर मंगल और शुक्र का। अब एक और उदाहरण, यदि किसी व्यक्ति को हर समय धन की चिंता रहती है, उसका शनि व बुध चंद्रमा को प्रभावित कर रहे हैं या कुंडली के सप्तम भाव को प्रभावित कर रहे हैं तो ऐसे लोगों को रीढ़ की हड्डी के बीच के भाग से थोड़ा नीचे या तो दर्द होगा या फिर सहजता नहीं रहेगी। इन सारी प्रवृत्तियों का आप अपने शरीर में उत्पन्न लक्षणों से पहचान सकते हैं। फिर उसके उपाय करके आने वाले रोगों से मुक्ति पा सकते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि क्या ज्योतिष वहां भी कारगर साबित हो सकता है जहां आदमी पहले से बीमारी का शिकार है। इसका उत्तर है-हां। ज्योतिष वहां भी सफल है। आपने कई बार देखा होगा कि बीमारी हो गई और आप कुशल चिकित्सक व उत्कृष्ट दवाओं का उपयोग कर रहे हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। दूसरी बात, कई बार ऐसा भी होता है कि मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों ज्यों दवा की। क्योंकि मर्ज कुछ और है और दवा कुछ और। यकीन कीजिए आप कुण्डली से अपनी उस मूल प्रवृति को जान सकते हैं जिसके कारण रोग हो रहा है। फिर दवा के साथ-साथ उस ग्रह का भी उपाय कर लें तो बहुत जल्द फायदा होगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को यह शिकायत है कि उसे नींद नहीं आती। उसने दवाई ली, जिसके असर से वह सो गया। कुछ दिन तो वह ठीक से सोया, फिर नींद उडऩे लगी। अब दवाई की मात्रा या फिर पावर बढ़ा दी तो फिर कुछ दिन नींद ठीक आई, पर उसके बाद फिर नींद उडऩे लगी। हमने उसका हाथ देखा तो पाया कि उसकी तर्जनी का निचला हिस्सा बहुत मोटा है, चंद्र पर्वत अंदर दबा हुआ है और ऊपरी मंगल उठा हुआ है। ईश्वर को याद करके उसे सलाह दी कि अनुलोम विलोम प्राणायाम करो। उन्होंने किया, उन्हें नींद ठीक आने लगी और धीरे-धीरे दवा भी छूट गई। नींद न आने का कारण यह था कि मंगल और बृहस्पति के खराब होने के कारण पेट के अंदर गैस बनती थी और सीधे मस्तिष्क यानी चंद्रमा पर असर करती थी जिससे नींद नहीं आती थी। अनुलोम-विलोम प्राणायाम एक ऐसा उपाय है जिससे चंद्र-सूर्य का उत्तम संतुलन शरीर में स्थापित हो जाता है। मन और शरीर को आराम मिलता है और नींद आने लगती है।
भारत के महान चिकित्सक चरक ने मधुमेह के बारे में लगभग 2500 साल पहले चरक संहिता में लिख दिया था जबकि पश्चिमी चिकित्साशास्त्र जिसे आज हम बहुत उन्नत मानते हैं, को यह रोग लगभग 17वीं शताब्दी में पता लगा था। इस बीमारी में पैंक्रियाज ग्रंथि यानि स्वाद पिण्ड की स्वाद ग्रंथि सही काम नहीं करती जिससे इंसुलिन का स्राव कम होता है और शरीर का शुगर बढ़ जाता है। शुगर सीधे आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगी पर आपके शरीर में रोगों की प्रवृति बढ़ा देती है। या यूं भी कह सकते हैं कि हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है जिससे हम बीमारियों से नहीं लड़ पाते। जैसे किसी के दांत कमजोर हैं तो वह जल्दी गिर जाएंगे, किसी की आंखें कमजोर हैं तो अंधापन जल्दी बढ़ेगा, शरीर में कोई जख्म हो गया तो वह आसानी से नहीं भरेगा। मधुमेह दो तरह का होता है। पहले प्रकार का मधुमेह केवल इंसुलिन के इंजेक्शन से ही काबू में रहता है। मधुमेह का यह प्रकार दवाओं से भी अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया है। दूसरा मधुमेह का प्रकार वह होता है, जो अगर समय रहते पता लग लाए तो पूरी तरह ठीक हो जाता है।
अब हम कैसे पहचानें कि हमें शुगर की बीमारी हो सकती है या नहीं। मधुमेह खराब बृहस्पति, शुक्र, चंद्र और मंगल कमजोर होने की वजह से होता है। वृष, मिथुन, कन्या, तुला और वृश्चिक लग्न के जातक आसानी से इस रोग की पकड़ में आ जाते हैं। इसलिए इस लग्न के लोगों को अपना अधिक ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले जानते हैं मधुमेह में बृहस्पति ग्रह की भूमिका।
बृहस्पति
यदि बृहस्पति कमजोर होगा या कोई खराब ग्रह उस ग्रह से या उसकी दृष्टि से प्रभावित होगा या वक्री होगा तो वह लीवर खराब करेगा और लीवर में जो बाइल जूस होता है, उसके स्राव में रुकावट करेगा जिसके कारण इंसुलिन का कार्य बाधित होगा।
लक्षण : जिनका बृहस्पति खराब होगा उन्हें एसिडिटी बहुत होगी। वह खाने के भी बहुत शौकीन होंगे, विशेषकर चटपटे खाने के या फास्ट फूड के या कोल्ड ड्रिंक्स के। उनका पेट शरीर के मुकाबले भारी होगा और उनके व्यवहार में निरंकुशता होगी लेकिन बहुत सजग होगी। ऐसे लोग पैर पटककर चलते हैं और जब चलते हैं तो पड़ोसी भी समझ जाते हैं कि भाई साहब टहल रहें हैं।
शुक्र
जिनका शुक्र खराब होगा या अधिक ताकतवर होगा उनका भी शुगर बढ़ेगा क्योंकि खराब शुक्र इंसुलिन का स्त्राव बाधित करता है।
लक्षण : जिन लोगों का शुक्र खराब होगा उनकी यूरिन संबंधी आदतें सही नहीं होगी। जैसे यूरिन कई बार आना या बहुत ही कम आना या यूरिन के दबाव को संभाल नहीं पाना। बहुत सारे बच्चों को काफी उम्र तक बिस्तर गीला करने की आदत होती है। इन बच्चों के मां-बाप को सावधान रहना चाहिए। जिनका शुक्र अच्छा नहीं होता उन्हें दूध या छेने की मिठाई पसंद होती है। ऐसे लोगों की आवाज मधुर और आंखे खास होती हैं। खराब शुक्र कफ बढ़ाता है और शरीर में मोटापा देता है। आवाज में नाक का भी इस्तेमाल ऐसे लोग अधिक करते हैं। शुक्र लोगों को आर्टिस्ट बनाता है, शुक्र प्रभावी जातक अच्छे कलाकार होते हैं लेकिन मधुमेह से वह बच नहीं पाते। ऐसे लोग अच्छे कलाकार तो होते हैं, पर कला को छोड़ देते हैं उसकी साधना नहीं करते। खास बात यह है कि शुक्र प्रेम का ग्रह है तो ऐसे लोग रोमांटिक बहुत होते हैं। यानि ज्यादा रोमंटिक लोगों को भी शुगर से सावधान रहना चाहिए।
मंगल
यदि किसी का भी मंगल कमजोर होगा तो उसे रक्तजनित बीमारियां तो घेरेगी हीं, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होगी। डायबिटीज हमारे इम्यून सिस्टम पर हमला करती है, इसलिए यदि आपका मंगल कमजोर है तो आप इस हमले को झेल नहीं पाएंगे। डायबिटीज ही क्यों एक छोटा सा वायरस भी आपको बार-बार बुखार दे सकता है, थोड़ा सा भी दूषित भोजन खाया कि बीमार। इसलिए मंगल का मजूबत होना जरुरी है।
लक्षण : जिन लोगों का मंगल बहुत कमजोर होगा, उन्हें डर लगेगा। बिना किसी के सहयोग के, जीवन की चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएंगे। कल्पनाओं को साकार करने में झिझकेंगे और गुस्से को व्यक्त करने के बजाय भीतर ही जज्ब करते रहेंगे। ऐसे लोगों को अवसाद भी होगा। आंखों में तेज नहीं होगा, 24 वें साल से बाल झडऩे लगेंगे। कमजोर मंगल के कारण विवाह में देरी होगी, वैवाहिक जीवन में तनाव होगा, संतान होने में भी कष्ट होता है। साथ ही संतान भी कमजोर होती है। इसलिए मंगल के उपाय जरूर करने चाहिए।
चंद्र
चंद्रमा का विशेष उल्लेख करना इसलिए जरुरी है कि टाइप टू डाइबिटीज केवल जेनेटिक ही नहीं होती बल्कि आपके भोजन जीवनचर्या माहौल के साथ-साथ आपकी मानसिक स्थिति के कारण भी उत्पन्न होता है। आजकल हमारी जो दिनचर्या है और उसमें जो चिंताएं हमारे मन को प्रभावित करती हैं वह भी पैनक्रियाज के फंक्शन को बहुत प्रभावित करती है। चूंकि चंद्रमा मानसो जात:। अत: यदि चंद्रमा कमजोर होगा तो व्यक्ति मानसिक परेशानियों से हार जाएगा, उसे अवसाद घेर लेगा और उसका शुगर लेवल गढ़ जाएगा।
लक्षण : कमजोर चंद्रमा के लोग या जिसका चंद्रमा खराब युति से प्रभावित होता है, ऐसे लोग तनाव बहुत लेते हैं, कल्पनाएं बहुत करते हैं, इन्हें बहुत जल्दी अवसाद घेरता है, बहुत ही भावुक होते हैं, जरा-जरा सी बात पर रोते हैं, रिश्तों से बहुत अपेक्षाएं करते हैं, जरा-सी बात पर रूठ जाते हैं, खाना नहीं खाते, प्यास बहुत लगती है पर पानी कम पीते हैं।
उपाय
जो उपाय यहां बताये जा रहे हैं उसे वह लोग आजमा सकते हैं जिन्हें यह बीमारी हो गई है जिनमें डायबिटीज के लक्षण हैं या जिनके परिवार में डायबिटीज के मरीज हैं-
1. रुद्राक्ष की माला पहनें
2. करेला खाए
3. बेचैनी कम करें
4. मोटापे पर भी काबू करें
5. आंवले का प्रयोग करें
6. दो चुटकी हल्दी शहद के साथ चाटें या एक कप पानी के साथ निहार मुंह पिएं
7. मण्डूक आसन, योगमुद्रासन व अद्र्धमत्स्येन्द्रासन करें।
8. सादा भोजन करें, दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें।
9. अनुलोम विलोम कर सकते हैं
10. रात को मीठा न लें
11. सोने से पहले नींबू से फाड़कर दूध पिएं
12. तांबे का छल्ला या कड़ा जरुर पहनें। ह्व