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नमक का दरोगा

May 18, 2017

प्रेमचंद जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपं...

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बड़े भाई साहब

December 22, 2016

मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैने शुरू किया था; लेकिन तालीम जैसे महत्व ...

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गुंडा

October 22, 2016

जयशंकर प्रसाद वह पचास वर्ष से ऊपर था। तब भी युवकों से अधिक बलिष्ठ और दृढ़ था। चमड़े पर झुर्रियाँ नहीं पड़ी थीं। वर्षा की झड़ी में, पूस की रातों की छाया मे...

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बालक

July 7, 2016

गंगू को लोग ब्राह्मण कहते हैं और वह अपने को ब्राह्मण समझता भी है। मेरे सईस और खिदमतगार मुझे दूर से सलाम करते हैं। गंगू मुझे कभी सलाम नहीं करता। वह शाय...

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मुबारक बीमारी

March 21, 2016

मुंशी प्रेमचंद रात के नौ बज गये थे, एक युवती अंगीठी के सामने बैठी हुई आग फूंकती थी और उसके गाल आग के कुन्दनी रंग में दहक रहे थे। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें दर...

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ज्योति

January 28, 2016

विधवा हो जाने के बाद बूटी का स्वभाव बहुत कटु हो गया था। जब बहुत जी जलता तो अपने मृत पति को कोसती – आप तो सिधार गए, मेरे लिए यह जंजाल छोड़ गए। जब ...

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महातीर्थ

December 7, 2015

मुंशी इन्द्रमणि की आमदनी काम थी और खर्च ज्यादा। अपने बच्चों के लिए दाई का खर्च न उठा सकते थे। लेकिन एक तो बच्चे की सेवा-सुश्रुषा की फिक्र और दूसरे अपन...

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सुभागी

October 12, 2015

यह कहानी एक कुभागी बाल विधवा की है, जो अपनी कर्मशीलता, दृढ़ निश्चय और सेवा-भाव से सुभागी बनती है। उसका नाम भी सुभागी है। वह गाँव की अशिक्षित तथा अबला ...

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बड़े घर की बेटी

0 May 28, 2015

१९१० में प्रकाशित हुई इस कहानी का ऐतिहासिक महत्त्व भी है क्योंकि यह मुंशी प्रेमचंद के नाम से प्रकाशित होने वाली पहली कहानी है। बड़े घर की बेटी प्रेमचं...

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