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ईश्वरीय न्याय

January 21, 2015

यह कहानी 1917 की लिखी हुई है। प्रेमचंद ईश्वरीय न्याय को सर्वोपरि मानते हैं। यह न्याय ईमान का है, आत्मा का है और कानूनी न्याय से भी ऊपर है। कानून का न्...

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जिहाद

November 17, 2014

आश्चर्य होता है कि प्रेमचंद ने इस्लामी आतंकवाद पर आज से लगभग 75 वर्ष पहले इस कहानी को लिखा था। इस कहानी का महत्व यह है कि यह प्रेमचंद ने लिखी है और इस...

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प्रेरणा – मुंशी प्रेमचंद

October 13, 2014

मेरी कक्षा में सूर्यप्रकाश से ज्यादा ऊधमी कोई लड़का न था, बल्कि यों कहो कि अध्यापन-काल के दस वर्षों में मुझे ऐसी विषम प्रकृति के शिष्य से साबका न पड़ा...

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पूर्व-संस्कार

September 9, 2014

प्रेमचंदसज्जनों के हिस्से में भौतिक उन्नति कभी भूल कर ही आती है। रामटहल विलासी, दुव्र्यसनी, चरित्रहीन आदमी थे, पर सांसारिक व्यवहारों में चतुर, सूद-ब्य...

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गर्भवती कौशल्या का तप

September 9, 2014

महाराजा दशरथ के यहाँ पुत्र नहीं था तो उन्होंने एक पुत्रेष्टि याग कराया था। मुझे यह याग स्मरण आ रहा है। वशिष्ठ मुनि महाराज ने महर्षि श्रृंगी से पुत्रेष...

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अमावस्या की रात्रि : मुंशी प्रेमचन्द

September 1, 2014

दीवाली की संध्या थी। श्रीनगर के घरों और खंडहरों के भी भाग्य चमक उठे थे। कस्बे के लड़के और लड़कियां सुसज्जित थालियों में दीपक लिए मंदिर की ओर जा रही थी...

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बोध :प्रेमचंद :

August 31, 2014

पंडित चंद्रधर ने अपर प्राइमरी में मास्टरी तो कर ली थी, किन्तु सदा पछताया करते थे कि कहां से इस जंजाल में आ फंसे। यदि किसी अन्य विभाग में नौकर होते, तो...

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परीक्षा

August 31, 2014

(प्रेमचंद) जब रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजानसिंह बूढ़े हुए तो परमात्मा की याद आयी। जा कर महाराज से विनय की कि दीनबंधु ! दास ने श्रीमान् की सेवा चा...

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