प्राचीन भारत का विज्ञान समझाती पुस्तकें

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जब भी कभी भारत के गौरवमय अतीत की चर्चा की जाती है, अक्सर यह कहा जाता है कि भारत अध्यात्म में तो काफी आगे रहा है, कुछेक वैज्ञानिक सिद्धांत भी संभवत: पता रहे हैं, परंतु विज्ञान और तकनीकी में भारत में कभी कोई काम नहीं हुआ। यहां तो लोग बैलगाडिय़ों या फिर घोड़े तथा तांगे पर चला करते थे। कृषिप्रधान देश था और उद्योगों का कोई विकास नहीं हुआ था। इसलिए जब अखिल भारतीय विज्ञान कांग्रेस में किसी ने वैमानिकी ग्रंथ पर चर्चा करना चाहा तो उसका उपहास किया गया। दुखद बात यह भी है कि भारत में पढ़ाए जाने वाले विज्ञान विषय के पाठ्यक्रम में पहली कक्षा से लेकर शोध तक केवल और केवल यूरोप तथा अमेरिका में पैदा हुए आधुनिक विज्ञान और विज्ञानियों को ही पढ़ाया जाता है। इस कारण भी यह एक बात स्थापित हो जाती है कि भारत में विज्ञान की कोई परंपरा रही ही नहीं है। वैज्ञानिक शोध और प्रयोगों का यहां कोई स्थान नहीं रहा है। यह बात पूरी तरह गलत है और इसे गलत साबित करती हुई कुछेक पुस्तकें इस खंड में प्रस्तुत हैं। इन पुस्तकों को पढऩे से यह साफ हो जाता है कि भारत में न केवल विज्ञान के आधुनिकतम सिद्धांतों की जानकारी थी, बल्कि उन्होंने उनका उपयोग करके विभिन्न प्रकार के तकनीकियों का भी विकास किया था।