देशनिन्दकों से बचें

देशनिन्दकों से बचें

अरुण उपाध्याय


भारत विचित्र देश हो गया है। जैसे ही कोई भगवान् की या देश की निन्दा करता है, उसे महापण्डित मान लिया जाता है। राहुल सांकृत्यायन ने श्वेताश्वतर उपनिषद् के नाम से अर्थ निकाला कि ऋषि लोग केवल घोड़े की हड्डी का सूप पीते थे (अश्व = घोड़ा, उसका श्वेत भाग हड्डी, तर = सूप)। बस, वे महापण्डित हो गये। भण्डारकर तथा अन्य लोगों ने गाय को चुना।

उत्तर रामचरित में एक वाक्य मिल गया। वसिष्ठ मुनि राजा दशरथ के पास किसी चर्चा के लिए गये तो उनको वत्सतरी दी गयी। वह लेने पर-वत्सतरी मडमडायते। वत्सतरी = 2 वर्ष की बछिया। उसे चबाने पर हड्डी टूटने से मडमड की ध्वनि हुई। यह पता नहीं किया कि 2 वर्ष की बछिया को मगरमच्छ भी नहीं चबा सकता है। वह छोटी बकरी को भी कष्ट से निगलता है तथा धीरे-धीरे दिन भर में पचाता है, अचानक चबा कर हड्डी नहीं तोड़ा।

इसका मतलब है कि भण्डारकर व्याख्या के अनुसार वसिष्ठ का मुंह मगरमच्छ से तीन गुणा बड़ा था तथा जबड़ा इतना मजबूत था कि बछड़े की हड्डी को तोड़ दे। यदि काट कर भी पकाया जाय तो उसमेँ तीन घण्टे लगेंगे। तब तक वसिष्ठ तथा दशरथ सब काम छोड़कर बैठे रहेंगे। बाहर का अतिथि भी भूखा प्यासा बैठा रहेगा। यदि हर अतिथि का ऐसा सत्कार हो तो तीन मास में देश की गायें नष्ट हो जायेंगी। इस वाक्य के बाद दशरथ ने कहा कि आपने मधुपर्क ले लिया, अब काम की बात करें। पर इन विद्वानों के जीवन का उद्देश्य पूरा हो चुका था, अत: उसे नहीं देखा। बाहर से अतिथि आता है तो रास्ते में थकावट तथा पानी की कमी हो जाती है। अत: उसे पानी के साथ मीठा तथा थोड़ा नमक देते हैं। यह बच्चों को डीसेन्ट्री में दिया जाता है। इससे बच्चे भी तृप्त होते हैं, अत: मधुपर्क ही वत्सतरी है।

इसी प्रकार दशहरा आते ही रावण भक्ति की बाढ़ आ जाती है तथा उसे एकमात्र महापण्डित तथा सर्व विद्या में श्रेष्ठ बना देते हैं। यह ठीक है कि रावण शासन चलाने के लिए कुछ पढ़ा लिखा भी था, पर ज्ञान के किसी क्षेत्र में राम पक्ष की बराबरी में नहीं था। भगवान् राम ने सभी वेद पढ़े थे। स्वयं हनुमानजी को सभी वेदों का विद्वान् कहा है। इसके अतिरिक्त उनके पक्ष में वसिष्ठ, विश्वामित्र, भरद्वाज, अगस्त्य आदि मन्त्र द्रष्टा ऋषि थे। रावण पक्ष में ऐसा एक भी नहीं था। रावण को महान् इंजीनियर बताते हैं। पर पुष्पक विमान कुबेर से चुराया हुआ था। राम के इंजीनियर नल-नील द्वारा पुल के निर्माण का रावण को विश्वास नहीं हुआ।

एक अन्य झूठा प्रचार किया गया है कि रावण जैसा पण्डित तथा शिवभक्त कोई नहीं था, अत: रामेश्वरम् शिवलिंग की स्थापना के रावण को बुलाना पड़ा। रावण को अंधेरे में रखने के लिए राम ने तीन दिन समुद्र की प्रार्थना की थी। रावण को पता नहीं चल रहा था कि वे क्या करने वाले हैं। इस लिए शुक और सारण को जासूसी के लिए भेजा था। उसको यदि बुलाते, तो जासूसी की क्यों जरूरत होती? भगवान् राम को ही सर्वश्रेष्ठ शिवभक्त कहा जाता है जिसके कारण वहाँ के शिवलिंग का नाम रामेश्वरम् (राम के ईश्वर) हुआ। शिवलिंग पर 100 कमल चढ़ाने में एक कम हो रहा था तो राम स्वयं अपनी आंख चढ़ा रहे थे, क्योंकि उनको कमलनयन कहा जाता है। अत: तमिल में उनको वीजिनाथन कहा जाता है।

अभी तक मुरारी बापू अन्य सैकड़ों कथावाचकों की तरह थे। पर जबसे राम को लंका पर आक्रमण करने को दोषी घोषित किया, बलराम-श्रीकृष्ण को दिन रात शराब पीने वाल कहा तथा अली-मौला, या हुसेन कीर्तन आरम्भ किया, हजारों बुद्धि-जीवियों के अनुसार वे सर्वश्रेष्ठ विद्वान् तथा भक्त हो गये हैं। कुछ लोगों ने भगवान् के बदले मुरारी बापू को अपना आराध्य मान लिया है तथा उनका फोटो अपने फेसबुक प्रोफाइल में लगा लिया है। मुझे लगा कि ये लोग पढ़े लिखे हैं तथा समझाने पर समझ जायेंगे। पर बुद्धिजीवी बनने के नशे में वे मुझे हदीस, काफिर आदि के नये नये अर्थ समझा रहे हैं जिनका आज तक इस्लाम में किसी को पता नहीं चला था। इनका संग छोडऩे में ही भलाई है-
जाके प्रिय न राम वैदेही। तजिये ताहि कोटि वैरी सम,
यद्यपि परम सनेही। तज्यो पिता प्रह्लाद, विभीषण बन्धु, भरत महतारी।