डॉ. अनुराग विजयवर्गीय
लेखक आयुर्वेद चिकित्सक हैं।
नींद का हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। आयुर्वेद महर्षियों के अनुसार ठीक तरीके से नींद का सेवन करने से हमारे शरीर को अत्यंत सुख की प्राप्ति होती है। इससे हमारा शरीर पुष्ट बनता है। इसी से हमारे तन-मन को ज्ञान की प्राप्ति होती है। यौन-सुख को भी नींद के ही अधीन माना गया है। आयुर्वेद महर्षि चक्रपाणि के अनुसार जब हम पूरी मात्रा में नींद नहीं लेकर अधिक मात्रा में जागते हैं, तो हमारा तन एवं मन थकते चले जाते हैं और शरीर में कफ नामक दोष अल्प होता चला जाता है तथा पित्त-दोष बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप अनेकानेक पित्तसम्बंधी रोग पैदा होने लगते हैं। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि नींद की कमी से होने वाली हानियां इस प्रकार हैं – दुख, कमजोरी, दुबलापन, नपुंसकता, अज्ञान तथा क्रमश: मृत्यु की प्राप्ति।
कुछ घरेलू उपचार
- रात के समय जल्दी सोने एवं सुबह जल्दी उठने का नियम बनाएं।
- दिन के समय भूलकर भी नहीं सोएं।
- नींद की गोलियों के सेवन से बचें।
- शरीर को टेढ़ा-मेढ़ा करके नहीं सोए।
- अपने भोजन में मिर्च-मसालों, फास्ट-फूड के सेवन करने से बचें।
- सोने से पहले भूलकर भी चाय-कॉफी अथवा पानी का सेवन नहीं करें। हलका, सुपाच्य एवं पूर्णत: शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करें। भोजन खूब चबा-चबाकर खाएं। हां, रात को
- सोने से पहले एक ग्राम हलदी मिला हुआ एक गिलास दूध अवष्य ही नियमित रूप से सेवन करते रहें।
- अधिक मात्रा में नमक का सेवन करने से भी नींद नहीं आती है। ऐसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करें, जो डिब्बाबंद होते हैं, क्योंकि इनमें संरक्षण के लिए नमक अधिक मात्रा में डाला जाता है।
- नियमित रूप से दोनों नाक के छिद्रों में बादाम रोगन अथवा देषी गाय का घी अवश्य डालें। दिन भर में कई बार यह प्रयोग किया जा सकता है। इसी प्रकार सवेरे स्नान के पहले तथा रात को सोने से पहले नाभि में रोगन बादाम अवश्य ही डालें।
- दोनों पैरों के तलवों की तेल से मालिश करने से भी गहरी नींद आती है। इसी प्रकार पूरे शरीर की मालिश करने से भी लाभ होता है।
- किसी सुयोग्य एक्यूप्रेशर सूजोक विशेषज्ञ के द्वारा पिट्यूटरी ग्लैंड सम्बंधी बिंदुओं पर उपचार देने से भी बहुत लाभ मिलता है।
- सोते समय सिरहाना हमेशा पूर्व दिशा की ओर ही रखें। यदि बुरे स्वप्न आते हैं, तो बिस्तर के नीचे पानी से भरा हुआ पात्र रखें।
- नियमित रूप से आठ से दस गिलास पानी पिएं। सवेरे बिस्तर से उठने के बाद चाय के स्थान पर दो चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास हलके गरम पानी तथा दो चम्मच शहद के साथ मिलाकर पिएं। सवेरे नाश्ते में रात को पानी में भिगोए हुए किशमिश के तीस दानों को खूब चबा-चबाकर खाएं। इसके साथ ही एक गिलास मुसम्मी का ताजा रस पिएं। अपने आहार में अंकुरित मूंग का सेवन भी करें।
- अनिद्रा रोग से पीडि़तों को विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी तथा डी, कैल्शियम मैग्नीशियम मैंगनीज, पोटेशियम तथा जिंक से भरपूर आहार-द्रव्यों का नियमित सेवन करने से बहुत लाभ होता है। इन सबसे महत्वपूर्ण है विटामिन बी 1 जिसे थायमिन नाम से भी जाना जाता है। इस विटामिन के बेहतरीन कुदरती स्रोत हैं – दालें, साबुत अनाज जैसे दलिया और मेवे।
अवसाद एवं अनिद्रा को दूर करने के लिए योग प्राणायाम
(1) नियमित रूप से पांच बार भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करें। तथा सात बार उद्गीथ प्राणायाम का अभ्यास करें। ज्ञान मुद्रा का भी नियमित अभ्यास करने से नींद आने लगती है।
(2) सवेरे तथा सायंकाल अवश्य ही थोड़ा टहलें।
(3) सुबह के समय मेडीटेशन अवश्य करें। सोने से पहले शवासन का अभ्यास अवश्य ही करें।
आयुर्वेदिक औषधियां
अभ्रक भस्म, स्वर्ण माक्षिक भस्म, ताप्यादी लौह, केपसूल तगर, कैपसूल अश्वगंधा, सर्पगंधाघन वटी, ब्राह्मी वटी (सुवर्ण), प्रवाल पिष्टी, मुक्ता पिष्टी, द्राक्षासव, अश्वगंधारिष्ट एवं सारस्वतारिष्ट इत्यादि औषधियों का यथायोग्य सेवन आयुर्वेद विशेषज्ञ की देखरेख में करने से अमृतवत लाभ होता है।मेरे रामबाण नुस्खे
नुस्खा नम्बर 1
अश्वगंधा 50 ग्राम
ब्राह्मी 50 ग्राम
शंखपुष्पी 50 ग्राम
वच 50 ग्राम
मुलहठी 50 ग्राम,
आंवला 50 ग्राम
अर्जुन छाल 50 ग्राम
जटामांसी 50 ग्राम
असली खुरासानी अजवायन 50 ग्राम
मालकांगनी 25 ग्राम,
स्वर्णमाक्षिक भस्म 15 ग्राम,
अकीक पिष्टी, मुक्ता शुक्ति पिष्टी 10-10 ग्राम।निर्माण विधि
इन सबको अलग-अलग पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। तत्पश्चात एक साथ मिलाकर किसी बरतन में सुरक्षित रखें।
मात्रा – रात को सोने से पहले 3 ग्राम
अनुपान – हलका गरम दूध ।होने वाले लाभ
1. नीद नहीं आने की शिकायत दूर होती है।
2. इस औषधि के प्रभाव से बिना सपनों वाली गहरी नींद आने लगती है।
3. यही औषधि बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को भी सामान्य कर देती है।
4. इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसका सेवन करने से ऐलोपैथिक दवा की भांति सुस्ती आना, मदहोशी जैसी छाई रहना जैसे लक्षण पैदा नहीं होते हैं। यह इस औषधि का अद्भुत प्रभाव है कि इस औषधि का रात को सेवन करने के बाद सवेरे व्यक्ति पूरी तरह से तरो-ताजा महसूस करता है। इसके सेवन से शरीर एवं मन हलकापन आता है। धनवान लोग इसमें मोती पिष्टी बीस ग्राम तक भी मिला सकते हैं। जवाहर मोहरा नम्बर 1 की गोली भी साथ में ले सकते हैं।नुस्खा नम्बर 2
आप बाजार से बनी-बनाई दवा सर्पगंधा घनवटी 2 गोली रात को दूध से ले सकते हैं। चाय और कॉफी का सेवन रात को न करें। ‘रोगन खसखस’ को रात को सोते समय नाक में 3-4 बूंद डालें। माथे पर भी हलके हाथों से इस तेल की मालिश करें। पैरों के तलवों में सरसों के तेल या देशी घी की मालिश करनी चाहिए। बहुत लाभकारी है। कई रोगियों पर आजमाया है। - सुबह बिस्तर से उठने पर रात भर तांबे के बरतन में पानी डालकर भिगोई हुई मुनक्का दाख के पच्चीस दाने खूब चबा-चबाकर खाएं।
- नाश्ते में ताजा फल, एक गिलास दूध, एक मु_ी भर कच्चे काजू-बादाम जैसे मेवे लें।
- दोपहर भोजन में एक कटोरा भर ताजी उबली हुई सब्जियां, दो-तीन चपातियां, एक गिलास लस्सी लें।
- अपराह्न में एक गिलास फलों या तरकारियों से बना हुआ ताजा जूस लें।
- रात्रि भोजन में बड़ा कटोरा भर ताजा सलाद तथा अंकुरित मूंग लें।
- रात का खाना सोने से लगभग दो-तीन घंटे पहले तथा भूख से थोडा कम लें। भोजन ग्रहण करने के बाद अवश्य टहलें।




