कोरोनाकाल की प्रमुख रोगचर्या

कोरोनाकाल की प्रमुख रोगचर्या

कोरोना वैसे तो किसी को भी हो सकता है, परंतु फिर भी मधुमेह, हृदय और दमा के रोगियों को इसके होने का खतरा सबसे अधिक है। इतना ही नहीं, कोरोना हो जाने पर अन्यान्य रोगियों को मृत्यु का भय कम है, परंतु उपरोक्त रोगों के पीडि़तों को अधिक। इसलिए इन तीन रोगों की रोगचर्या यहाँ दी जा रही है।

खांसी, जुकाम और दमा

  • उबलते पानी में थोडा़ बाम डाल कर, बन्द कमरे में सिर ढक कर गहरी सांस लें और छोड़ें। इससे अन्दर जमा हुई श्लेष्मा आसानी से बाहर निकल जाती है। सायनस के रोगी को आराम मिलता है।
  • सर्दियों में ठंड से बचें। घर को गरम रखें तथा गरम कपड़े पहनने में कोई संकोच न करें। यहां तक कि वर्षा ऋतु में भी ठंड से बचें। इस ऋतु में जहां तक हो सके, बारिश के पानी से बचना चाहिए।
  • तापमान के शीघ्र परिवर्तन अर्थात ठंडा गरम से शरीर को बचाना चाहिए। जैसे बाहर कड़ी धूप में घूम कर आना और तुरन्त ए.सी. या कूलर में बैठ जाना या फ्रिज से निकाल कर ठंडा पानी पी लेना आदि।
  • ठंडे पेय (कोल्ड ड्रिंक्स आदि) और विशेष रूप से फ्रिज से तत्काल निकाली हुई खाद्य साम्रगी न लें।
  • चलती हवा या पंखे की हवा से बचना चाहिए। सिर और छाती को ढंकना हितकर है।
  • दमे के रोगी को नियमित रूप से भुजंग आसन करना चाहिए।
  • पानी उबाल कर और सौंठ डालकर पीना चाहिए।
  • गर्म, पतला सूजी या बेसन का हलवा हितकर है।
  • बादाम, मंगूफली, दही, लस्सी आदि का सेवन न करें।

रात में देर तक न जगें और जल्दी सो जाएं ताकि पूरी नींद ली जा सके।

हृदय रोग


  • मन को शान्त रखें, चिन्ता, शोक, भय, क्रोध आदि उद्वेगों से बचें।
  • फलाहार अधिक मात्रा में करें।
  • छोटी इलायची कोलेस्ट्रॉल को कम करती है तथा हृदय को शक्ति प्रदान करती है।
  • मुलहठी का उपयोग हृदय के लिये हितकर है।
  • मुलहठी, छोटी इलायची, काली मिर्च और तुलसी की चाय लाभकारी है।
  • हृदय रोगी को सरल योगासन तथा नाड़ी शोधन प्राणायाम नियमित रूप से करना चाहिए।
  • आयुर्वेद में घी का निषेध नहीं होता किन्तु मात्रा कम और नियमित रखें। सन्तुलित आहार लेना चाहिए। तीखे, तले हुए तथा गरिष्ठ खाद्य पदार्थ बिलकुल नहीं खाने चाहिए।
  • कभी भी आवश्यकता से अधिक या अनियमित भोजन नहीं करना चाहिए।
  • गुलकन्द का सेवन करें, यह हृदय की शक्ति को बढ़ाता है।

मधुमेह


  • सामान्यत: मधुमेह का कारण कफ और मेद (वसा) की विकृति है।
  • धागे वाली मिश्री या गुड़, शक्कर आदि का सीमित मात्रा में प्रयोग करें। सफेद चीनी बहुत अधिक हानिकारक है।
  • सिंथैटिक मीठा जैसे सैक्रीन की गोली या शुगर फ्री आदि चीनी का ही कैमिकल विकल्प हैं। इन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • गेहूं में चने का आटा या बेसन मिला कर रोटी बनाएं। काले चने का बेसन तथा बाजरे का उपयोग हितकर है।
  • सलाद, ताजे या कम मीठे फल, सब्जियां प्रतिदिन नींबू का रस डाल कर खाएं।
  • योग, प्राणायाम, नियमित भ्रमण करें। आरामतलबी छोड़े और सक्रिय रहें।
  • भोजन तिल के शुद्ध तेल में बनाएं। यह तेल मधुमेह के लिए रामबाण है।
  • मीठा व नमक का सेवन कम करें। कटु तथा खट्टे रस का सेवन अधिक करें।
  • चिन्ता छोड़कर जीवन का आनन्द लेने का प्रयत्न करें तथा खुश रहें।
  • कोल्ड डिंक्स, आइस्क्रीम, गुड़ और दही का सेवन न करें।
  •  भोजन के बाद कम से कम सौ कदम अवश्य चलें।
  • मोटापा दूर करें यह मधुमेह के लिए घातक है।
  • चौलाई, मैथी की सब्जी, दाना मैथी, मखाना तथा तिल का उपयोग करें।
  • ऑवले का सेवन जूस, चूर्ण अथवा अचार के रूप में करें।
  • हल्दी को अचार के रूप में अथवा घी में भून कर तैयार किए हुए लगभग चौथाई चम्मच चूर्ण को गर्म पानी अथवा दूध के साथ प्रयोग करें।