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भुला दिया गया कलम का सिपाही

November 5, 2019

राजीव रंजन लेखक सुप्रसिद्घ साहित्यकार हैं। देश में विमर्श की दिशा एकांगी है। कतिपय समालोचक विचारधारा विशेष का कूडा-कचरा प्रेमचंद्र के स्तर का बता सकते...

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देशी चिकित्सा पद्धतियों को दें अधिक हिस्सेदारी

November 5, 2019

डॉ राम अचल लेखक आयुर्वेद चिकित्सक तथा वल्र्ड आयुर्वेद काँग्रेस के सदस्य हैं। आयुर्वेद के रसाचार्यो के बीच प्राचीन भारत की एक घटना का अक्सर उल्लेख किया...

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कैसे स्वस्थ हो देश ?

November 5, 2019

रवि शंकर कार्यकारी संपादक आज के राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र के तीन ही प्रमुख मुद्दे हैं – शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार। तीनों ही आज सरकार यानी रा...

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राष्ट्ररक्षा ही है राजनीति

July 8, 2019

रवि शंकर कार्यकारी संपादक राजनीति का सामान्य अर्थ है राज करने की नीति। राज करना यानी लोगों पर शासन करना नहीं होता। राज करने का अर्थ है लोगों को अभय या...

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प्राचीन भारत की सैन्य परंपरा

July 8, 2019

राजबहादुर शर्मा लेखक से.नि. ब्रिगेडियर और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ हैं। भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे पुरानी सामाजिक संस्कृति है। वायुपुराण में भरत की...

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भारतीय संस्कृति में सुरक्षा-सम्बन्धी चिन्तन

July 8, 2019

प्रवीण कुमार द्विवेदी लेखक संस्कृत के विद्धान हैं। सुरक्षा एक ऐसी अवस्था का नाम है जिसके रहने पर ही कोई भी कार्य सम्पादित हो सकता है। इसका तात्पर्य अच...

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लोकनियुक्त नहीं, लोकनियंत्रित हो शासन

May 17, 2019

बजरंग मुनि लेखक सामाजिक विचारक हैं। तानाशाही और लोकतंत्र बिल्कुल विपरीत प्रणालियां हैं। तानाशाही में शासन का संविधान होता है और लोकतंत्र में संविधान क...

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लोकतंत्र बनाम चुनावतंत्र कल, आज और कल

May 17, 2019

रवि शंकर कार्यकारी संपादक हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जाने जाते हैं। निश्चय ही यह पद बड़ा ही गौरवपूर्ण जान पड़ता है। इतिहास की बात करें...

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भव्य राम मंदिर बनाना ही है राजधर्म

April 10, 2019

रामेश्वर प्रसाद मिश्र पंकज लेखक वरिष्ठ विचारक हैं। हमें यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि राम मंदिर संबंधी मुद्दे के मूल में हमारे राज्य के आधारभूत स्...

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