योगाभ्यास : सावधानियां

नवदीप जोशी

लेखक प्रसिद्ध योगाचार्य हैं।

आज योग बहुत से व्यक्तियों की दिनचर्या का अंग बनता जा रहा है किन्तु ऐसे बहुत लोग हैं जो योग को अपनाना तो चाहते हैं पर डरते हैं कि कहीं कुछ हानि न हो जाए। ऐसे साधकों को डरना नही, बल्कि कुछ सावधानियों का ध्यान रखना चाहिये।

 

  • सभी योग ग्रंथो में योगाभ्यास के लिए सर्वाधिक उचित समय ब्रह्म मुहूर्त अर्थात प्रातः  4 से 6 बताया गया है। इस समय वातावरण सबसे शांत और प्राण ऊर्जा से ओतप्रोत होता है। भोजन किए 7-8 घंटे हो जाते हैं। पेट हल्का रहता है और नींद लेने से शरीर और मन हल्का हो जाता है। शौच करने के बाद व्यक्ति जब योगासन करता है तो उसे किसी अन्य समय की तुलना में ज्यादा लाभ होता है, परन्तु योग चिकित्सा में जो शोध कार्य हुए हैं उनके अनुसार  किसी योग्य योगाचार्य की देखरेख में दिन में जब कभी भोजन किए हुए लगभग चार घंटे हो चुके हों योग किया जा सकता है।
  • योग में शरीर के साथ मन भी जुड़ा है। योग केवल व्यायाम या बल पूर्वक करने का अभ्यास नही है सबका शरीर अलग-अलग है। इसलिए योग अभ्यास जल्दबाजी मैं न करे। पूरी चेतना के साथ योग करने से हे इसका लाभ मिल पाता है। कुछ लोग योग अभ्यास न कर पाने से फौरन हताश हो जाते है और योग न करने का फैसला करते है। धैर्य रखे क्योकि जैसे जैसे आप आसन, मुद्रा और प्राणायाम करते जायेंगे शरीर का लचीलापन बढ़ेगा व क्षमता बढ़ती जाएगी।
  • योगासन करते समय कम्बल, दरी या योग मैट का प्रयोग करें। योग अभ्यास के समय शरीर मे प्राण ऊर्जा बनती है, धरती पर योगाभ्यास करने से पृथ्वी के ऊर्जा और शरीर की ऊर्जा से शरीर में असंतुलन हो सकता है। इसलिए इसे मैट, चटाई, दरी पर किया जाता है।
  • जल का प्रयोग कम करें। योग के समय रक्त प्रवाह बढने से धीरे-धीरे शरीर की ऊष्मा का स्तर बढ़ता है, लेकिन अगर इस दौरान ठंडा पानी पी लिया जाये तो ऊष्मा में तेजी से गिरावट आती है और उससे एलर्जी, कफ और जुकाम की समस्या हो सकती है। अधिक पानी पीने से पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है। योगाभ्यास के 15 मिनट बाद ही पानी पीना चाहिए।
  • योगाभ्यास करते समय अथवा उसके पूर्व मल-मूत्रा विसर्जन के लिए जाने की इच्छा हो तो अवश्य जाएं, आवेग को कभी भी न रोके।
  • योगाभ्यास करते समय वस्त्रा हल्के होने चाहिएं। क्योंकि आरम्भ में शरीर लचीला नहीं होता है और ऐसे में यदि वस्त्रा भी हल्के नही होगें तो योग करने में परेशानी होगी।
  • योग में शरीर के सभी अंगो की शुद्धि के लिए षट्कर्म क्रिया की जाती है। जिससे वात, पित्ता और कफ की शरीर से शुद्धि होती है। इससे योग सरल और आनंदायक हो जाता है।शरीर मे घड़ी, बैल्ट, स्टोन, जेवर आदि को न पहने। योग करते समय शरीर के सभी अंग स्वतंत्रा होने चाहिए जिससे कोई ब्लॉकेज न हो।
  • योग के लिए हवादार कमरा उचित स्थान है। वैसे तो योग के लिए खुला, हरा-भरा मैदान सब से उचित है। लेकिन कई बार ऐसे स्थानों पर चल रही अनेक गतिविधियों के कारण एकाग्रता नहीं बन पाती।
  • योग का प्रारम्भ अधिक गर्मी और अधिक सर्दी मे न करें। क्योंकि ऐसी स्थिती में शरीर की क्रियाएं मंद पड़ जाती है इसलिए शुरुआत में केवल सूक्ष्म यौगिक व्यायाम करंे। योगाभ्यास का प्रारम्भ आरामदायक मौसम में ही करें।