भारत के प्राचीन ज्ञान विज्ञान पर शोध के लिए समुचित निवेश करे समाज और सरकार

विजय शंकर तिवारी
मुख्य संपादक


हम भारतीय अक्सर कल्याण मंत्र और शान्ति मंत्र का पाठ करते हैं। हम चाहते हैं कि सब सुखी हों और सब जगह शान्ति और संतुलन हो। हमारे ऋषियों ने ये मंत्र केवल पाठ करने के लिए नहीं बताए थे, उन्होंने इनके अनुसार जीवन जीने के लिए कहा था। भारत के गाँव-गाँव में ये मंत्र लोगों के जीवन का हिस्सा बने हुए हैं। वनस्पतियों को शान्त करते हैं वे। तुलसी, पीपल, बरगद आदि वृक्षों को संभालना उन्हें आता है। इन वृक्षों को हमने पूजा के साथ जोड़ दिया। हमारा शरीर जिन पंचतत्त्व से बना है, उन पाँचों तत्त्वों को भी शान्त करने की बात कही गई है। वे पाँचों तत्त्व शान्त होंगे तो हमारा शरीर और मन शान्त होगा, सभी हम सुखी और समृद्ध होंगे। इस चिन्तन के आसपास ही भारतीय धरोहर ने अपना काम प्रारंभ किया।
इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमने 14 वर्ष पहले पत्रिका निकालना प्रारंभ किया था। जिस ज्ञान-विज्ञान के आधार पर भारत विश्वगुरु और सोने की चिडिय़ा बना था, उस ज्ञान-विज्ञान पर काम करने वाले लोगों के काम को पत्रिका के माध्यम से सबके सामने लाने का प्रयास हम कर रहे हैं। ऐसे लोग बहुत हैं, उन्हें और उनके काम को सम्मानित करना, उसे लोगों तक पहुँचाना, यही हमारा काम है। हमने श्रेष्ठ संतान के विज्ञान, मानव प्रकृति, आहार-विहार आदि विषयों पर भी काम कर रहे हैं। इन सभी विषयों पर साहित्य भी प्रकाशित कर रहे हैं।
श्रेष्ठ संतान के विज्ञान की आयुर्वेद में काफी विवरण दिया गया है। हम श्रेष्ठ और मनचाही संतान प्राप्त कर सकते हैं यदि आयुर्वेद के निर्देशानुसार योजना बनाएं। इसके लिए हम एक प्रकल्प भी चला रहे हैं। हमारा मानना है कि हरेक अस्पताल में श्रेष्ठ संतान परामर्श के लिए ओपीडी होनी चाहिए। इसी प्रकार हमने विगत आठ वर्ष से लोगों को अपनी प्रकृति का ज्ञान कराने के लिए अभियान प्रारंभ किया है। लोगों को अपनी राशि, रक्त समूह आदि की जानकारी होती है, परंतु अपनी प्रकृति की नहीं। भारतीय धरोहर ने इसके लिए कई गतिविधियां प्रारंभ की हैं। हमारा एक और काम है आहार-विहार का। लोग पूरी आयु निरोग और स्वस्थ रहें, इसके लिए आहार-विहार को ठीक रखना होता है। हिमाचल प्रदेश में हमने इसके 150 से अधिक कार्यक्रम करने वाले हैं। इनमें आयुर्वेद के जानकार उचित आहार-विहार की जानकारी लोगों को देंगे। इन कार्यक्रमों को करने के लिए पाठक मंडल की रचना की जा रही है।
अनेक सम्मानों की बात होती है। लेकिन भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के गंभीर अध्येताओं के लिए किसी सम्मान की बात सुनने को नहीं मिलती। हम मानते है कि देश दूनिया की अनेक समस्याओं की कुंजी प्राचीन ज्ञान विज्ञान में छिपी हुई है। आवश्यकता इस बात की है कि इस विषय पर गंभीर अध्ययन किया जाए। और इस कार्य के लिए समाज और शासन समुचित निवेश करें। इसलिए हमने इस बार से भारतीय धरोहर सम्मान देना प्रारंभ किया है। हरेक वर्ष हम ऐसी किसी विभूति को सम्मानित करेंगे जिन्होंने भारतीय ज्ञान-विज्ञान को प्रासंगिक बनाने का काम किया है।
(भारतीय धरोहर वार्षिक सम्मेलन, 2018 में दिए गए वक्तव्य से )