बहुपयोगी है लौंग

cloves1हरेक घर की रसोई में लौंग निश्चित रूप से मिल जाएगी। आमतौर पर गरम मसाले में इसका प्रयोग किया जाता है। परंतु यह केवल एक मसाला भर नहीं है। अन्य मसालों की तरह लौंग में भी ढेर सारे औषधीय गुण हैं। संभवतः यही कारण है कि लौंग को हमारे पूर्वजों ने रसोईघर के मसालों में शामिल कर दिया ताकि हमेशा एक औषधि हमें उपलब्ध रहे। आइए, जानते हैं लौंग के औषधीय गुणों को।
लौंग पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में लौंग बेहद सहायक होती है। लौंग का काढ़ा, चूर्ण और तेल सभी रूप का प्रयोग किया जाता है। लौंग के तेल में ऐसे अंश भी होते हैं जो रक्त संचार को सामान्य रखते हैं और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं। उल्टियां होने पर भुनी लौंग के पाउडर को शहद में मिलाकर सेवन करने से तत्काल लाभ होता है।
हैजे के उपचार में भी लौंग बहुत उपयोगी साबित होती है। इसके लिए चार ग्राम लौंग को तीन लीटर पानी में डालकर पानी आधा रह जाने तक उबालें। इस पानी को ठंडा करके पीने से रोग के तीव्र लक्षण तुरंत काबू में आ जाते हैं।
पांच लौंग की कलियों को 30 मिली पानी में डालकर उबालें। दमा के रोगी को इसे शहद के साथ दिन में तीन बार पिलाएं। इससे जमी हुई कफ निकल जाएगी और दमा के रोगी को राहत मिलेगी। लौंग सेंककर मुंह में रखने से गले की सूजन और सूखे कफ का नाश होता है।
यदि गले में दर्द हो, कफ जम गया हो, खांसी आ रही हो तो नमक के साथ लौंग चबाने से तत्काल आराम होता है। इसके अलावा खांसी आने पर भुनी लौंग को चबा-चबाकर खाने से भी लाभ होता है।
पेशियों में ऐंठन होने पर लौंग के तेल की पुलटिस बनाकर प्रभावित क्षेत्रा पर लगाने से आराम मिलता है।
पेशियों में ऐंठन होने पर लौंग के तेल की पुलटिस बनाकर प्रभावित क्षेत्रा पर लगाने से आराम मिलता है।
एंटीसेप्टिक गुणों के कारण लौंग चोट, खुजली और संक्रमण में काफी उपयोगी होती है। इसका उपयोग कीटों के काटने या डंक मारने पर भी किया जाता है। इसे किसी पत्थर पर पानी के साथ पीस कर काटे गए या डंक वाले स्थान पर लगाना चाहिए, काफी लाभ होता है। लौंग का चूर्ण और हल्दी मिलाकर लगाने से नासूर मिटता है।
सिर दर्द में भी लौंग काफी कारगर है। लौंग को पीस कर सिर पर लेप करने से दर्द में राहत मिलती है। लौंग के तेल में नमक मिला कर सिर पर लगाने से ठंडक का अहसास होता है। नमक, लौंग और दूध को मिलाकर तैयार किया गया लेप भी सिरदर्द में आराम देता है।
खाना खाने के बाद एक लौंग सुबह शाम खाने से एसिडिटी ठीक हो जाती है। 15 ग्राम हरे आंवले का रस, पांच पिसी हुई लौंग, एक चम्मच शहद और एक चम्मच चीनी मिलाकर रोगी को पिलाएं। इससे एसिडिटी में राहत मिलती है। यदि जी मिचला रहा हो तो 2 लौंग पीस कर आधा कप पानी में मिला कर गर्म करके पीने से लाभ होगा। इसी प्रकार गर्भवती स्त्राी को यदि ज्यादा उल्टियां हो रही हों, तो लौंग का चूर्ण शहद के साथ चटाने से लाभ होता है।
4 लौंग पीस कर गर्म पानी से फांक लें। इस तरह तीन बार लेने से बुखार दूर हो जाएगा।
लौंग का तेल मिश्री पर डालकर लेने से पेट दर्द में लाभ होता है।
लौंग आंखों व दांतों के लिए बहुत लाभदायक है। दर्द के समय एक लौंग मुंह में रख लें और उसके मुलायम होने के बाद हल्के-हल्के चबाएं तो दांत दर्द बंद हो जाएगा।