कैसे करें त्वचा की आयुर्वेदकि देखभाल

ayurveda_holiday_852138राजेश कोटेचा
लेखक प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य हैंँ
त्वचा एक संस्कृत शब्द है और यह त्वक् संवरणे धातु से बना है जिसका अर्थ है शरीर को ढंकने वाला। त्वचा वात से निर्मित है। स्पर्श वायु का गुण है। त्वचा से स्पर्श की संवेदना को मस्तिष्क तक प्राण वायु ले जाती है। स्पर्श की संवेदना सबसे अधिक जीभ तथा अंगुलियों के अग्र भाग और आँखों में होती है। सुश्रुत में सात प्रकार की त्वचाओं का उल्लेख है:दृ अवभासिनी, लोहित, श्वेत, ताम्र, वेदिनी, रोहिणी और मांसधारा। दूसरी ओर चरक ने केवल छह प्रकारों की ही चर्चा की है। त्वचा के निर्माण में पित्त दोष की भी भूमिका होती है। त्वचा की चयापचय प्रक्रियाओं तथा शरीर के तापमान के लिए भ्राजक पित्त ही उत्तरदायी होता है। व्यान वायु त्वचा के रंग तथा पसीने की ग्रंथियों से पसीना निकलने को सुनिश्चित करता है। अब विभिन्न प्रकृति के लोगों की सामान्य तथा असामान्य त्वचा के बारे में जानते हैं।

वात प्रकृति
सामान्य त्वचाः वात प्रकृति की त्वचा सूखी, पतली और झूर्रीदार होती है। छूने पर ठंडी होती है और इसका रंग गहरा अथवा भूरा होता है। इन्हें पसीना काफी कम आता है और शरीर के बाल सूखे, विरल, घुंघराले होते हैं।
असामान्य त्वचाः त्वचा में चमक और रंग उड़ा हुआ होता है। त्वचा में रूखापन होता है और फटने की भी समस्या होती है। गहरे दाग भी दिखते हैं। शरीर के बाल रूखे और अत्यंत सूखे लगते हैं। सूखे चकत्ते, सूखा एक्जीमा आदि परेशानियां हो सकती हैं।

पित्त प्रकृति
सामान्य त्वचाः इनकी त्वचा मुलायम, चिकनी और तिलयुक्त होती है। छूने में गरम और रंग में साफ होती है। इन्हें काफी पसीना आता है और इस कारण इन्हें पसीने की दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। शरीर के बाल तैलीय, चिकने और ललहून भूरे होते हैं।
असामान्य त्वचाः त्वचा तैलीय होती है और प्राकृतिक रंग उड़ा हुआ होता है। शरीर के बाल गिरने लगते हैं और कई बार पकने भी लगते हैं। मुंहासे, फोड़े-फुंसियां, एलर्जिक चकत्ते, झुर्रियां तथा सूजन आदि की समस्या हो सकती है।

कफ प्रकृति
सामान्य त्वचाः ऐसे लोगों की त्वचा सामान्यतः तैलीय, मोटी और नम होती है। त्वचा का रंग पीला, चमकदार और छूने में मुलायम तथा शीतल होता है। पसीना कम आता है। शरीर के बाल में घने, काले, कठोर और मजबूत होते हैं।
असामान्य त्वचा: त्वचा बेजान और पीली दिखती है। शरीर के बाल तैलीय होते हैं। खुजली, फुंसियां, गुल्म आदि की समस्या होती है।

त्वचा की दैनिक देखभाल
1 आयुर्वेद के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्रकृति के अनुकूल गरम तेल की मालिश करनी चाहिए। वात प्रकृति के लिए तिल का, पित्त के लिए नारियल का और कफ प्रकृति के लिए सरसों का तेल उपयुक्त रहता है। मालिश चेहरे सहित पूरे शरीर की करनी चाहिए। इससे त्वचा मुलायम और रेशमी हो जाएगी, उसका बल और मजबूती बढ़ जाएगी और पूरे शरीर को पोषण मिलेगा।
2 इसके बाद 20-30 मिनट तक सूर्यनमस्कार तथा योगासन जैसे हल्के-फुल्के व्यायाम करें।
3 बेसन या औषधीय उबटन से शरीर को मलें। इससे त्वचा साफ और चिकनी हो जाएगी। त्वचा पर एकत्रा अतिरिक्त वसा इससे छंट जाती है।
4 इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें।

FullFacial54चेहरे की देखभाल
चेहरा हमारी पहचान और हमारे व्यक्तित्व का परिचायक होता है। इसलिए चेहरे की देखभाल करना काफी महत्वपूर्ण है। पानी इसका सबसे सस्ता और सबसे अधिक प्रभावी उपाय है। प्रतिदिन सुबह चेहरे को पानी से चेहरे को धोएं। उसके बाद दो चम्मच त्रिफला चूर्ण को पानी में मिला कर फेसपैक की तरह लगाएं। त्रिफला में तीन औषधियां होती हैं जो त्रिदोषों को संतुलित करती हैं। त्रिफला एक रसायन भी है। इसे पाँच मिनट के लिए लगाएं और फिर धो डालें। इसके बाद चौथाई चम्मच येष्ठीमधु (मूलेठी) चूर्ण को पानी में मिला कर पांच मिनट के लिए लगाएं और फिर धो डालें। यह त्वचा की नमी को बनाए रखता है और तीनों प्रकृति की त्वचा के लिए उपयुक्त है।
चेहरे की आयुर्वेदिक देखभाल में विभिन्न चरणों का क्रम में पालन करना चाहिए। पहले सफाई, फिर मालिश, फिर हल्का स्क्रब और फिर फेस पैक और माइस्चराइजिंग। इसी क्रम से चेहरे की देखभाल करें।

  • मकई का आटा, एक चम्मच चीनी और एक अंडे को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना ले। इसे चेहरे पर 15 मिनट लगाने के बाद धो ले। बेहतर परिणाम के लिए इसे हफ्ते में दो या तीन बार लगाएं।
  • एक कटोरी मसूर दाल को रात भर के लिए भिगों दे। इसे पीसकर इसमें पिसा आलू मिला ले। इसे चेहरे पर लगाएं सूखने के बाद इसे धो ले। यह चेहरे के बाल हटाने का कारगर उपाय है।
  • चीनी, दही, ओटमील स्क्रब, नींबू और शहद चेहरे के अनचाहे बालों से छुटकारा दिलाने में सहायक होते हैं।
  • चार चम्मच शहद और दो चम्मच नींबू के रस को अच्छी तरह मिलाएं। फिर इसे रूई के फाहे से चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट तक लगा रहने दें और फिर धो ले। बढ़िया परिणाम के लिए इसे सप्ताह में दो बार लगाएं।
  • जौ का दलिया बेहतरीन एकस्फोलिएटिंग एजेंट होने के साथ ही आपके चेहरे के बालों को हटाने में भी मदद करता है। आधा चम्मच जौ के दलिया में आठ बूंद नींबू का रस मिलाएं। इसे अच्छी तरह से मिला कर 15-20 मिनट चेहरे पर लगा रहने दें फिर धो ले। इसे सप्ताह में दो दिन लगाएं।
  • एक चम्मच शहद में दही मिलाकर इसे चेहरे पर 15 मिनट तक लगा रहने दें। इसे सूखने पर चीनी से हल्के हाथों से रगड़कर कर छुड़ाएं। चेहरा धुलने के बाद टोनर या मॉइस्चराइजर लगाएं।