इस धरोहर को भी बचाईए

भारत में मीडिया का एक बड़ा वर्ग तथा राजनीति दल गंगा जमुनी तहजीब की बात करता हैं पर यहां ऐसी कोई तहजीब है ही नही। ऐसी कोई तहजीब होती भी नहीं है। वैसे भी गंगा में यमुना के मिल जाने के बाद उसे गंगा ही कहते हैं, गंगा-यमुना नहीं कहते। यदि ऐसा कहना ही हो तो फिर केवल गंगा-यमुना ही क्यों, इसे गंगा-भागीरथी-यमुना-गंडक आदि आदि कहना पड़ेगा, जो न तो व्यावहारिक है और न ही उचित। इसलिये बात जब भी होगी, हिन्दुओं की ही होगी, उसमें ही यहां के अन्य मतावम्बियों का भी हित है और इसमें मुसलमान भी शामिल हैं। आखिर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य-पूर्व में जो मुसलमान मारे जा रहे हैं, उसका बड़ा कारण तो इस्लामी राज्य ही है।
एक मान्य तथ्य यह है कि जहां हिन्दू अधिक हैं वहां सब सामान्य रहता है पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में इस प्रकार की बातें बेमानी सी है। अगर कोई ऐसी तहजीब विकसित ही करना है तो हिन्दू बाहुल्य होना जरूरी है। दो वर्ष पहले तक भारत में कोई सोच ही नही सकता था कि भारत माता की जय कहना अपराध होगा। पाकिस्तान जिंदाबाद कहने वालों के साथ संभ्रान्त और सुविख्यात लोग खड़े हो जाएंगे। सूर्यनमस्कार पर विवाद हो जाएगा और याकूब मेनन जिसे सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा दी थी वहां उस निर्णय को प्रभावित करने की भी कोशिश की जाएगी । यह सब अनायास नहीं हुआ।
देश की धरोहरों को समाप्त करने के लिए 70 वर्ष तक जो विष बेल पाले गए उनका नतीजा है देश विरोधी पाले में खड़े लोग। इस बारे में समूर्ण जांच आज की जरूरत बन गया है ताकि उन्हें बेनकाब करके दण्डित किया जा सके। अभी कैराना से हिन्दुओं के पलायन की चर्चा सभी संचार माध्यमों के द्वारा हो रही हैं। हमेशा की तरह मीडिया तथा राजनीतिक दलों का एक वर्ग इसे झुठलाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार की प्रक्रिया भारत में वर्षों से चलती आ रही है। दुनिया भर का आंकलन करगें तो ध्यान में आएगा कि अन्य देशों में वहां के अल्पसंख्यक पीडि़त होते हैं, शिकायतें भी की जाती हैं तो अल्पसंख्यक पीडि़तों के द्वारा की जाती हैं। भारत में बहुसंख्यक हिन्दू अल्पसंख्यक आयोग जाता है अपनी पीड़ा सुनाने।
इतिहास खुद को बार-बार दोहराता है कुछ लोग अपनी गलतियंा सुधार लेते हैं पर भारत में अभी तक ऐसा नहीं हो पा रहा है। 1980 के दशक में कश्मीर में कैराना जैसी ही स्थितियां थीं। वहां के हिन्दू परिवारों की लड़कियों को उठाना, बलात्कार करना, हत्या करना, व्यावसायियों को प्रताडि़त करना, उनको उद्योग धन्धे को छोड़कर जाने के लिए विवश करना, विद्यालयों, देवालयों में महिलाओं को छेडऩा, यह सब घटनाएं कश्मीर में हो रही थीं। परंतु प्रशासन मूक बनकर देखता रहा। परिणाम हुआ वहां से हिन्दू पलायन कर गया तो आज तक वापस नहीं जा पाया।
इसी प्रकार असम के 17 जिलों से हिन्दू पलायन कर रहे हंै। वहां भी प्रशासन मौन है। पश्चिम बंगाल के एक जिले में तो हिन्दुओं को अपनी दुकानों में बाकायदा कुरान रखने के लिए विवश किया जाता है। ऐसा देश में ना जाने कितने स्थानों पर हो रहा है पर वोट के लालच में शासन यह सब देखकर भी चुप है।
हिन्दू भारत की धरोहर है। हिन्दू यहां बहुसंख्यक है तभी यह देश भारत है। यहां हिन्दुओं का पलायन पुराना मामला हो सकता है पर आबादी का असंतुलन, वह भी दिल्ली के राजधानी के पास, बहुत ही षडय़न्त्रकारी लग रहा है। पिछले दिनों मथुरा में जो घटना घटी, वह किसी गम्भीर संकट की ओर इशारा करती है।
इसी प्रकार दिल्ली भारत की राजधानी है। उसे प्रभावित करने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। दिल्ली के आस पास उत्तर प्रदेश का इलाका हो या फिर हरियाणा का, यह सब कभी भी दिल्ली के लिए खतरा हो सकते हंै। समय रहते चेतने की अवश्यकता है। अब तो कुछ सख्त निर्णय ही भारत की धरोहर हिन्दुओं को बचा सकते हैं।