पालतू पशुओं से प्यार करें लेकिन… संभल कर

डॉ. राजेश कुमार सिंह
पशु रोग विशेषज्ञ, जमशेदपुर


जानवरों की वे बीमारियां जो लोगों को हो सकती हैं उन्हें ज़ूनोसिस कहते हैं। मनुष्यों को प्रभावित करने वाली कई बीमारियों का कारण जानवर या जानवरों के उत्पाद हो सकते हैं। आपको सीधे जानवर से बीमारी हो सकती है, या अप्रत्यक्ष रूप से, पर्यावरण से हो सकती है। मवेशियों से बीमारियां हो सकती हैं। यदि आप उन्हें छूते हैं या उनके संपर्क में आने वाली चीजों को छूते हैं, जैसे मेड़ या बाल्टियां तो अपने हाथ अच्छे से धोएं। वयस्कों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खेतों में जाने पर या पशुओं को छूने के बाद बच्चे अपने हाथ अच्छे से धोएं।
जंगली जानवर प्यारे और गोद में लेने लायक हो सकते हैं, लेकिन वे कीटाणु, विषाणु और परजीवी फैलाते हैं। हिरण और डियर माइस में किलनी हो सकती है जिसकी वजह से लाइम रोग होता है। कुछ जंगली जानवरों में रेबीज हो सकते हैं। जंगली जीवन का दूर से आनंद उठाएं। पालतू जानवर भी आपको बीमार बना सकते हैं। साँपों में विशेष रूप से जोखिम होता है। कछुए, साँप, और गोह अपने मालिकों में साल्मोनेला कीटाणु संचारित कर सकते हैं। संक्रमित कुत्ते से आपको रेबीज हो सकता है या संक्रमित बिल्ली का मलमूत्र छूने पर टोक्सोप्लाज़मोसिज़ हो सकता है।
आजकल अनेक लोग अपने घरों में बिल्ली और कुत्ते पाल रहे हैं, लेकिन उनमें से कई लोगों को मालूम नहीं कि पालतू पशुओं से छूत की बीमारी लगने का भी खतरा होता है। ऐसी बीमारी कैसे पालतू पशुओं से मानव तक पहुंचती है, पशु से मानव तक रोग के संक्रमण का क्या रास्ता है, इस सब के बारे में जानकारी हासिल करने की बड़ी आवश्यकता है। विभिन्न रोगों के मानव तक फैलने के रास्ते अलग-अलग हैं। इनमें से चार प्रमुख मार्ग हैं, श्वास नली, आहारनाल, त्वचा और कीट। पक्षियों का निमोनिया श्वास नली के जरिये ही पक्षी से मानव तक फैलता है। किसी भी पक्षी से इस रोग का फैलाव होने की संभावना रहती है। बत्तख और हंस के जरिये तक यह रोग फैल सकता है। आहारनाल के जरिये टायफायड रोग फैल सकता है। लोगों को पशुओं के मल से प्रदूषित खाद्य पदार्थ खाने के बाद ज्वर हो सकता है। टायफायड के रोगी को पेट दर्द, दस्त तथा ज्वर की शिकायत होती है। अगर कोई आदमी अक्सर पशुओं को चूमता है, तो उसे इस रोग का खतरा हो सकता है। श्लेषमा के जरिये पागल कुत्ते का रोग होने का खतरा होता है। पागल कुत्ते के काटने या बिल्ली के पंजे से चोट लगने के बाद मनुष्य के शरीर में रोग के विषाणु पहुंचते हैं। लोगों को पागल कुत्ते का रोग होने के बाद बड़े खतरे का मुकाबला करना पड़ता है।
कीटों से मानव तक फैलने वाला एक गंभीर रोग प्लेग है। प्लेग का विषाणु चूहों के शरीर में रहता है। बिल्ली और कुत्ते के चूहे खाने पर इस रोग का विषाणु उनमें आ जाता है, लेकिन वे चूहे खाने के बावजूद स्वयं बीमार नहीं होते। पर मच्छर या अन्य कीटों के ऐसे बीमार पशुओं को काटने के बाद मनुष्य को काटने पर यह रोग मनुष्य तक पहुंचता है।
इस तरह हम पाते हैं कि पालतू पशुओं के साथ खेलते समय हमें होशियार रहने की जरूरत है। वास्तव में बहुत से लोग अपने पालतू पशुओं के विभिन्न रोगों से संक्रमित होने को लेकर सतर्क नहीं होते। पेइचिंग में रहने वाली सुश्री क्वो ने बताया कि वे हर हफ्ते अपने कुत्ते को नहलाती हैं, और इसके लिए साबुन का प्रयोग करती हैं, उन के विचार में ऐसा करना काफी है। लेकिन वास्तव में पशु को सिर्फ नहलाना ही काफी नहीं है। लोगों को अपने पालतू पशुओं को समय-समय पर कीटाणुमुक्त भी करना चाहिए। इसके साथ ही पालतू पशुओं के दड़बे, खाल और शौच जाने की जगह की भी अक्सर सफाई की जानी चाहिये। अगर कोई पालतू पशु आसामान्य दिखता है, तो उसकी पशु अस्पताल में जांच करवानी चाहिए।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि पालतू पशुओं वाले घर बिल्कुल साफ रखे जाने चाहिये। लोगों को अपने पालतू पशुओं के साथ घनिष्ठ संपर्क नहीं रखना चाहिये। कुछ लोग अपने पालतू पशुओं को बार-बार चूमते हैं, उन के साथ एक ही पलंग पर सोते हैं और उन्हें अपने हाथ-मुंह चाटने की इजाजत करते हैं पर यह सब ठीक नहीं है। पर सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग ठीक समय पर अपने पालतू पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए टीके लगवायें। लंबे समय तक साथ रहने के कारण पालतू जानवरों, पक्षियों से लोगों को काफी लगाव हो जाता है और ये जानवर भी घर के सदस्य जैसे ही बन जाते हैं। यह पशु-पक्षियों के प्रति मानव के स्वाभाविक प्रेम का परिचायक है लेकिन इन पालतू पशुओं से कुछ गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं, जिनमें से कुछ जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।
लेप्टोस्पोरोसिस वायरस – लेप्टोस्पोरोसिस वायरस जानवरों के मल-मूत्र से फैलता है। ये वायरस इंसान के शरीर में संक्रमित पानी पीने से, संक्रमित खाना खाने, आंख, मुंह और नाक के साथ चोट लगे हुए अंग पर तेज़ी से फैलता है। जब त्वचा संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आती है, तब यह शरीर को सीधे प्रभावित कर सकता है। यह रोग सीधे किडनी और लीवर को प्रभावित करता है। इस बात की भी संभावना बनी रहती है कि लेप्टोस्पोरोसिस वायरस अन्दुरुनी ब्लीडिंग के कारण मरीज की जान भी ले ले।
रेबीज़ रोग- कुत्ते के काट लेने से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है। उल्लेखनीय है कि इंसान के लिए घातक ये विषाणु अपने आश्रयदाता को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते मतलब इनसे जानवर को कोई नुकसान नहीं होता है। यह विषाणु संबंधित जीव-जंतु के पेशाब के माध्यम से बाहर निकलते रहते हैं। यह मनुष्य की कटी-फटी, छिली या गली हुई त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं।
कैंफिलोबैक्टर बैक्टीरिया- अधिकांश पालतू जानवरों के मल में कैंफिलोबैक्टर बैक्टीरिया होते हैं। ये बैक्टीरिया इन पशुओं को त्वचा व बालों के माध्यम से इंसानों में संक्रमण फैलाते हैं। जब हमारे शरीर में ये बैक्टीरिया पहुंच जाते हैं, तो फेफड़ों में तेज दर्द, दस्त और बुखार जैसी तकलीफें पैदा करते हैं। इसके अलावा, गायों से मेडकाउ रोग फैलता है और गाय, भैंसे व अन्य दुधारू पशुओं के दूध को कच्चा ही पीने से टी. बी. ब्रूसेला बीमारी हो सकती है। यह रोग पशुपालन का व्यवसाय करने वालों को भी होने की आशंका रहती है।
लाइम रोग – लाइम रोग एक जीवाणु Borrelia burgdorferi के कारण होता है। यह बैक्टीरिया टिक के माध्यम से फैलता है।

बचाव
* साबुन के साथ हाथ साफ या हाथ धो लें।
* पालतू जानवरों के आसपास सुरक्षित रहें।
* अपने आप को कुत्ते/बिल्ली के शरीर पर बैठने वाले मच्छरों, मक्खियों से बचाने के लिए उपाय करें।
* जानवरों से खरोंच या काटने से बचें।
*अपने पालतू जानवरो को नियमित रूप से टीकाकरण तथा अपने पशुचिकित्सक के आदेशानुसार उचित प्रबंधन करे।
* छोटे बच्चों को पेट्स के साथ सोने खेलने का परहेज करे।
* कुत्ते/बिल्ली के लिए सोने, रहने, खाने तथा खेलने की व्यवस्था अलग रखे।