हलधर नाग : ओड़िशा के लोककवि, जिनपर पाँच ने किया पीएच.डी.

प्रतिभा किसी पीएच.डी. या डिग्री की मोहताज नहीं होती। सन्त तुलसी, कबीर या मीरा ने किस विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की थी? लेकिन उनके पदों पर हजारों छात्र पीएच.डी. कर चुके हैं। ऐसी ही एक प्रतिभा हैं ओड़िशा के 66 साल के हलधर नाग, जो कोसली-भाषा के प्रसिद्ध कवि और लेखक हैं। ख़ास बात यह है कि हलधर नाग ने तीसरी कक्षा तक भी पढ़ाई नहीं की है, लेकिन पांच छात्रों ने उनकी कविताओं पर पीएच.डी. की है।

हलधर नाग ने जो भी कविताएं और 20 महाकाव्य अभी तक लिखे हैं, वे उन्हें ज़ुबानी याद हैं। अब संभलपुर विश्वविद्यालय में उनके लेखन के एक संकलन ‘हलधर ग्रन्थावली-2’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है।

वर्ष 1950 में ओडिशा के बरगाह जिले के घींस गाँव के एक गरीब परिवार में जन्मे हलधर को तीसरी कक्षा में ही पढ़ाई छोड़कर काम करना पड़ा; क्योंकि उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। घर चलाने के लिए हलधर ने पास ही की एक मिठाई की दुकान में बर्तन मांजने का काम शुरू कर दिया। दो साल के बाद गाँव के सरपंच ने हलधर को पास ही के एक स्कूल में खाना पकाने के लिए नियुक्त कर लिया जहाँ उन्होंने 16 साल की उम्र तक काम किया। इसी दौरान उनके इलाके में कई नए स्कूल खुले और उन्होंने बैंक से 1000 रूपये का लोन लेकर अपनी दुकान शुरू की जहाँ वह स्टेशनरी और खाने-पीने की चीजें बेचते थे।

वर्ष 1990 में हलधर ने पहली कविता ‘धोधो बारगाजी’ नाम से लिखी, जिसे एक स्थानीय पत्रिका ने प्रकाशित किया और उसके बाद हलधर ने पत्रिका को 4 कविताएं भेजीं और सभी प्रकाशित हुईं। इसके बाद हलधर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह आसपास के गांव से भी कविता सुनाने के लिए बुलाए जाने लगे। लोगों को हलधर की कविताएं इतनी पसंद आईं कि वे उन्हें ‘लोककवि रत्न’ के नाम से बुलाने लगे। हलधर समाज, धर्म, मान्यताओं और बदलाव जैसे विषयों पर लिखते हैं। उनका कहना है कि कविता समाज के लोगों तक संदेश पहुंचाने का सबसे अच्छा तरीका है। हलधर की प्रमुख कृतियां निम्नलिखित हैं :
• लोकगीत
• सम्पर्द
• कृष्णगुरु
• महासती उर्मिला
• तारा मन्दोदरी
• अछिया
• बछर
• शिरी समलाइ
• बीर सुरेन्द्र साइ
• करमसानी
• रसिया कवि (तुलसीदास की जीवनी)
• प्रेम पाइछन
• राति
• चएत् र सकाल् आएला
• शबरी
• माँ
• सतिआबिहा
• लक्ष्मीपुराण
• सन्त कबि भीमभोइ
• ऋषि कबि गंगाधर
• भाव
• सुरुत
• हलधर-ग्रन्थावली-१ (फ्रेण्ड्स पब्लिशर्स, कटक)
• हलधर-ग्रन्थावली-२ (सम्बलपुर विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित; पाठ्यक्रम में सम्मिलित)

हलधर ने कभी किसी भी तरह का जूता या चप्पल नहीं पहना है। वह केवल एक धोती और बनियान पहनते हैं। सादा लिबास, सफेद धोती, गमछा और बनियान पहने, हलधर नाग नंगे पैर ही रहते हैं। वह कहते हैं कि इन कपड़ों में वह अच्छा और खुला महसूस करते हैं।

ऐसे सादगी-संपन्न और प्रतिभा-संपन्न व्यक्तित्व हलधर नाग को वर्ष 2016 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ‘पद्मश्री’ सम्मान से अलंकृत किया है।