संयुक्त परिवार—व्यवस्था के समर्थक कलाम

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा रहे हैं। वह भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता थे। रामेश्वरम् से राष्ट्रपति भवन के लिए सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के राष्ट्रपति के रूप में उनकी यात्रा न केवल देशभर में बल्कि पूरे विश्व में सराहनीय और सम्मानित रही है। हम अभी भी उस विनम्रता और सादगी को याद करते हैं जिसे माननीय ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहिब ने जिया था। इसके साथ ही हम याद करते हैं कि उनका शानदार राष्ट्रपतित्व काल, जब उन्होंने सर्वसम्मतिवाले उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति भवन में प्रवेश किया और कार्यकाल पूरा होने के बाद इसे लोकनायक के रूप में छोड़ा। देश के अन्य किसी राष्ट्रपति को इतना जनसमर्थन कभी न मिल सका।

डॉ. कलाम संयुक्त परिवार व्यवस्था के बड़े समर्थक थे। वह प्रायः अपने उद्बोधनों में रामेश्वरम के अपने संयुक्त परिवार का ज़िक्र किया करते थे। 16 जुलाई, 2007 को अपने कार्यकाल के अन्तिम महीने में हुए ‘रामनाथ गोयनका अवॉर्ड्स समारोह’ में उन्होंने कहा कि वह राष्ट्र-निर्माण में मीडिया को भागीदार बनने के लिए उत्सुक हैं और उन्होंने देश के विकास के लिए क्रमशः ए, बी और सी का नामकरण करते हुए 3 महत्त्वपूर्ण सूत्र दिए : ‘ए’ = जीडीपी (आर्थिक विकास), ‘बी’ = 20 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से कैसे ऊपर उठाया जाए और ‘सी’ (जिसके विषय में कोई बात नहीं करता), वह है मूल्य-प्रणाली। आज कितने लोग संयुक्त परिवारों में रह रहे हैं? इस सभा में कितने लोग संयुक्त परिवारों में रह रहे हैं? इसे बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

आज भी संयुक्त परिवार को ही सम्पूर्ण परिवार माना जाता है। वर्तमान समय में भी एकल परिवार को एक मजबूरी के रूप में ही देखा जाता है।