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बस्तर के इतिहास में रामायण की पैठ

0 January 21, 2015

राजीव रंजन प्रसाद लेखक प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यासकार हैं। रामायण को ले कर प्रगतिशील कहे जाने वाले समाज के अपने पूर्वाग्रह हैं तथा उसके बीच अंतर्निहित अ...

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भारतीय रैनेसाँ या लोकोत्थान युग की आहट

0 October 13, 2014

हम आज ऐसी बातों पर लड़ रहे हेैं जो लड़ाई के मुद्दे हो ही नहीं सकते।  वैचारिक लचीलेपन का दावा करने के बावजूद हम हर पचास सौ सालों में पैदा होने वाले पंथ...

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गांवों और कस्बों तक भी पहुंचे शास्त्रीय संगीत

0 September 9, 2014

– उमाकांत गुंदेचासबसे पहले अपनी ध्रुपद यात्रा के बारे में बताएं, कैसे और कब प्रारम्भ हुई?बचपन से गाने का शौक था, गुनगुनाते रहते थे, पिताजी को भी...

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एशिया में सुरक्षित हमारे शब्द

0 September 9, 2014

डॉ. एन.एस.शर्मा इ तिहास के पन्ने साक्षी हैं कि विश्व की विभिन्न संस्कृतियों का लोप हो जाने के बावजूद अपने अंतर्निहित शाश्वत तत्वों के कारण भारतीय संस्...

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लोगों की गाडग़ंगा

0 September 3, 2014

मीनाक्षी अरोड़ा और केसर : उ फरैखाल, पौड़ी, चमोली और अल्मोड़ा तीन जिलों के बीच स्थित गांव है। जो जिम कार्बेट नेशनल पार्क के उत्तर में और समुद्र तल से 6...

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