भारतीय धरोहर भारत के समृद्ध ज्ञान विज्ञान और परम्पराओं पर शोध, संरक्षण एवं उसके प्रचार प्रसार में संलग्न संस्थान है। प्राचीन काल में ऋषियों ने समाज को सम्पन्न और प्रसन्न बनाने के लिए अनेक प्रयोग किए थे। वास्तु, अर्थशास्त्र, गणित, व्याकरण, आयुर्वेद, शल्यक्रिया, नाड़ी विज्ञान, उत्तम संतान प्राप्ति का विज्ञान, वस्त्र विज्ञान, रसायन विज्ञान, स्थापत्य, धातु शिल्प जैसे अनेकों अनुसंधान भारत की विशेषता रहे हैं। कहते हैं समाज जिस काल में तकनीकी रूप से सक्षम होता है उस समय  वहां सम्पन्नता होती है। इसी कारण हमारा देश समृद्ध था। भारतीय ऋषियों के द्वारा किए गए उन कार्यों को लोगों के सामने लाना, उस पर शोध करना एवं उनका प्रचार-प्रसार करना भारतीय धरोहर का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्थान विद्वानों एवं वैद्यों के सान्निध्य में ‘भारतीय धरोहर पत्रिका का प्रकाशन’ और ‘आहार विहार’, ‘प्रकृति परीक्षण’, ‘नाड़ी परीक्षण’ व ‘नाड़ी प्रशिक्षण’ तथा ‘उत्तम संतान भारतीय विज्ञान’ जैसे लोकहित के विषयों पर कार्य कर रहा है।

‘भारतीय धरोहर पत्रिका’

भारतीय धरोहर पत्रिका में भारतीय जीवन मूल्यों की समझ रखने वाले विद्वानों के लेख प्रकाशित किए जाते हैं। समय-समय पर पत्रिका के विशेषांक भी प्रकाशित होते हैं। समस्यायें सनातन होती हैं। हर काल में रहती हैं। आज जिन राष्ट्रीय, सामाजिक, व्यक्तिगत समस्याओं के  हम मार्ग खोजते हैं, प्राचीन समय में उन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए किए गए प्रयोगों को भारतीय धरोहर पत्रिका में प्रकाशित किया जाता है।