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क्या संस्कृत पढऩे से अर्थार्जन नहीं हो सकता?

October 4, 2017

श्रीश देवपुजारी समाज में एक भ्रम फैलाया गया है कि संस्कृत पढऩे से छात्र अर्थार्जन नहीं कर सकता। उसे केवल शिक्षक बनना पड़ता है या पुरोहित। इस प्रकार की...

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श्राद्ध और पितृपक्ष का वैज्ञानिक महत्व

September 29, 2017

डॉ. ओमप्रकाश पांडे लेखक अंतरिक्ष विज्ञानी हैं। श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्म...

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भाषाएँ और एकात्मता

September 29, 2017

प्रो. हेमराज मीणा दिवाकर लेखक केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के पूर्व प्राध्यापक हैं। भारत के सात बहन-राज्य पूर्वाेत्तर में हैं। असम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर...

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स्वाभाविक राष्ट्र है भारत

September 29, 2017

प्रो. कुसुमलता केडिया लेखिका धर्मपाल शोधपीठ, भोपाल की निदेशक हैं। यह आज हमें पता है कि भारत का वर्तमान स्वरूप 15 अगस्त 1947 की देन है। आज अखंड भारत की...

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राज्य, समाज, व्यक्ति और निन्यानबे का फेर

September 22, 2017

रवि शंकर कार्यकारी संपादक बाप बड़ा न भैय्या, सबसे बड़ा रुपैय्या। यह कहावत जिसने भी बनाई होगी, उसने सोचा नहीं होगा कि कभी एक समय पूरा देश उसकी कहावत के...

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अर्थव्यवस्था में राष्ट्र की संस्कृति का प्रतिबिम्ब हो

September 22, 2017

जवाहरलाल कौल लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। शास्त्र के रूप में अर्थशास्त्र जैसा अमेरिका में पढ़ाया जाता है, उसी प्रकार हमारे देश में भी पढ़ाया जाता रहा है। ...

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स्वास्थ्य, जीवनशैली और अर्थव्यवस्था

September 21, 2017

पिछले दिनों कुछ खबरें ऐसी आई हैं जिन पर हमारे देश के अर्थनीति बनाने वालों को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। यह अलग बात है कि उन्हें इन खबरों का आर्थिक म...

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त्याग में छिपा है भोग का सही मार्ग

September 21, 2017

भारत विश्व का सबसे प्राचीन लोकतान्त्रिक राष्ट्र है। मानव जाति का विकास सर्व प्रथम इसी धरा से आरम्भ हुआ। सभ्यता की पहली किरण इसी भूमि से निकली। वैश्विक...

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