थायराइड से ऐसे बचें

थायराइड से ऐसे बचें

आजकल की जीवनषैली ऐसी हो गई है जिससे सभी तेजी से गंभीर बीमारियों का षिकार हो रहे हैं। इन्हीं बीमारियों में एक गंभीर बीमारी थायराइड की है जो आजकल बहुत आम हो गई है। थायराइड की चपेट में महिलाएं अधिक आती हैं क्योंकि महिलाओं में हार्मोन तेजी से बदलते हैं और थायराइड एक तरह से हार्मोनल बीमारी ही है।
थायराइड एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थायरायड ग्रंथि हमारी गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्रा के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है जो तितली के आकार की होती है। यह थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जो एनर्जी को संतुलित करने, मांसपेशियों के अंदर के मेटाबॉलिज्म में मदद करने, दिमाग में अन्य हार्मोन के साथ मिलकर काम करने में मदद करता है।
यदि हार्मोन बनना बंद हो जाता है तो ऐसे में थायराइड ग्लैंड का आकार बढ जाता है। हार्मोन की मात्रा न बढे तो इसे हाइपो थायराइडिज्म कहते हैं। वहीं हार्मोन ज्यादा हो तो यह स्थिति हाइपर थायराइडिज्म कहलाती है। महिलाओं में हाइपर थायराइडिज्म की समस्या अधिक पाई जाती है।

थायराइड के लक्षण
 – शारीरिक व मानसिक वृद्धि का धीमा होना।
 – बच्चों में इसकी कमी से ‘क्रेटिनिज्म’ नामक रोग होना।
दिल की धडकन व श्वास की गति मंद होना
हड्डियों की वृद्धि रुक जाती है और वे झुकने लगती हैं।
 – मेटाबालिज्म की क्रिया मंद हो जाती है।
 – शरीर का वजन बढने लगता है एवं शरीर में सूजन आ जाती है।
सोचने व बोलने की क्रिया मंद पड जाती है।
त्वचा रुखी हो जाती है व आँख की पलकों में सूजन आ जाती है।
शरीर का ताप कम हो जाता है व बाल झडने लगते हैं।

हाइपर थायराइडिज्म के लक्षण
 – शरीर के तापमान में वृद्धि।
 – दिल की धडकन व श्वास की गति का बढना।
 – अनिद्रा, उत्तेजना एवं घबराहट।
 – शरीर का वजन कम होना।
 – हाथ-पैर की उंगलियों में कम्पन।
 – गर्मी सहन करने की क्षमता कम हो जाती है।
 – मधुमेह रोग होने की प्रबल सम्भावना।
 – घेंघा रोग।
 – शरीर में आयोडीन की कमी।

थायराइड का उपचार
आहार में शामिल करें ये खाद्य पदार्थ
थायराइड रोगियों को अपने आहार में ऐसे खाद्य-पदार्थों को शामिल करना चाहिए जिसमें आयोडीन की भरपूर मात्रा हो। क्योंकि आयोडीन की मात्रा थायराइड फंक्शन को प्रभावित करती है। समुद्री जीवों में सबसे ज्यादा आयोडीन पाया जाता है। समुद्री शैवाल, समुद्र की सब्जियों और मछलियों में आयोडीन की भरपूर मात्रा होती है।
कॉपर और आयरन युक्त आहार के सेवन करने से भी थायराइड नियमित रहता है। काजू, बादाम और सूरजमुखी के बीज में कॉपर की मात्रा होती है। हरी और पत्तेदार सब्जियों में आयरन की भरपूर मात्रा होती है।
पनीर और हरी मिर्च तथा टमाटर थायराइड ग्रंथि के लिए फायदेमंद हैं।
विटामिन और मिनरल्स युक्त आहार खाने से थायराइड फंक्शन में वृद्धि होती है।
प्याज, लहसुन, मशरूम में ज्यादा मात्रा में विटामिन पाया जाता है।
अखरोट का सेवन थायराइड रोगियों को विषेष लाभ पहुंचाता है क्योंकि इसमें सेलेनियम पाया जाता है जो गले की सूजन को काफी हद तक कम करता है।
कम वसायुक्त आइसक्रीम और दही का भी सेवन थायराइड में फायदेमंद है।
गाय का दूध भी थायराइड के मरीजों को पीना चाहिए।
नारियल का तेल भी थायराइड फंक्शन में वृद्धि करता है। नारियल तेल का प्रयोग सब्जी बनाते वक्त भी किया जा सकता है।
इन्हें खाने से बचे
थायराइड रोगियों के लिए सोया तो दुष्मन माना गया है। इसलिए सोया और उससे बने खाद्य-पदार्थों का सेवन बिलकुल मत कीजिए।
जंक और फास्ट फूड भी थायराइड ग्रंथि को प्रभावित करते हैं। इसलिए फास्ट फूड को अपनी आदत मत बनाइए।
ब्रोकली, गोभी जैसे खाद्य-पदार्थ थायराइड फंक्शन को कमजोर करते हैं।

योग से मिलेगा विषेष लाभ
थायराइड रोगियों को योग के जरिए विषेष लाभ मिलता है। खासकर कपालभाति थायराइड को दूर करने में सहायक है। हाइपो थाइरोइड की स्थिति में सर्वांगासन बहुत उपयोगी है। इसके अलावा विपरीतकर्णी, जनु शीर्षासन, मत्स्यासन, हलासन, मर्जरीआसान उपयोगी है। तेज गति से सूर्य नमस्कार करने से वजन नियंत्रित किया जा सकता है।
हाइपर थाइरोइड में सेतुबंध, मर्जरीआसान, शिशुआसन, शवासन लाभ पहुंचाते हैं। मंत्रा उच्चारण के साथ धीमी गति से किया गया सूर्य नमस्कार प्रभावी होता है।

थाइराइड के घरेलू उपाय
1. काली मिर्च से वजन और हाइपोथायर दोनो को सभांल सकते हैं। पिपेराईन एक खास रसायन है जो काली मिर्च में खूब पाया जाता है। यह कमाल का (वसानियंत्राक) फैट बर्नर है। अक्सर महिलाओं में थायराक्सिन लेवल कम होने से तेजी से वजन बढता है। पेपेराईन इस समस्या से छुटकारा दिला सकता है। जिन्हें हाईपोथायराइड की समस्या है वे सिर्फ 7 काली मिर्च कुचलकर 15 दिनों तक रोज सुबह एक बार एक साथ खा लें। सकारात्मक परिणाम आना तय है।
2. पचीस ग्राम शुद्ध दालचीनी लें। यह जितनी तीखी हो उतना अच्छा रहेगा। इसे पीस चूर्ण बना एक चुटकी चूर्ण प्याज रस में मिला सेवन करें। यह प्रयोग बासी मुंह 21 दिन करें। 21 दिन’ सेवन से थाइराइड सामान्य हो जाएगा। फिर कभी नहीं बढेगा। तीन महीने बाद में प्रयोग दोहराइए – अचूक लाभ होगा। जिसने लग्न व विश्वास से कर लिया, जिन्दगी भर दवा खाने से बच गया।
3. अगर किसी को थाईराइड से मुक्ति पानी है तो रसाहार चिकित्सा, मड चिकित्सा अपनाएं। इनसे थाईराइड का सफल ईलाज किया जा सकता है।

हाईपर थाईराडिज्म की चिकित्सा
हाईपर थाईराइडिज्म में अगर ’ग्रीन टी’ का प्रयोग दिन में 4 बार 2-2 कप लिया जाए तो चार से छह महिने में तो थाइराइड से मुक्ति मिल सकती है।
दो कप लौकी के रस मंे दो चम्मच अदरक का रस डालकर रोज रात को सोने से 1 घंटे पहले लें।
धनिया १ चम्मच $ सौंफ १ चमच $ जीरा १ चमच लेकर सुबह ३ ग्लास पानी मे उबाले। जब १ ग्लास पानी बचे तब छानकर ( ड्रम स्टिक ) दिनभर में तीन बार पीएं।