हृदय के लिए लाभकारी है सरसों का तेल

हाल के एक अध्ययन से पता चलता है सरसों का तेल हृदयाघात और हृदय की समस्याओं को 70 प्रतिशत कम कर देता है। अन्य खाना पकाने के तेल से, सरसों का तेल जो काफी सस्ता है और जिसका पोषक मूल्य भी अधिक है, एक अच्छा विकल्प है। सरसों के तेल के लाभों के बारे में ऑल इंडिया इंस्टीटृयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) और सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक अध्ययन के माध्यम से यह बात सामने आई है। इसके अनुसार, सरसों का तेल अपने दिल के लिए सबसे अच्छा है।

विभिन्न खाद्य तेलों की एक तुलनात्मक अध्ययन से पता चला है कि खाना पकाने के माध्यम के रूप में सरसों का तेल 70 प्रतिशत से अधिक हृदय रोगों के खतरे को कम कर सकता है। यह अध्ययन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) और सर गंगा राम अस्पताल के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। इसमें खाना पकाने के विभिन्न तेलों जैसे कि जैतून का तेल, कनेला तेल, सरसों तेल और सूरजमुखी तेल में वसा सामग्री की तुलना की गई और निष्कर्षों को प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी की पत्रिका के फरवरी अंक में प्रकाशित किया गया।

सर गंगा राम अस्पताल में हृदय रोग के सीनियर कंसल्टेंट व लेख के सह लेखक डॉ. एससी मनचंदा ने बताय कि एक दिल के अनुकूल तेल को कोलेस्ट्रॉल व ट्रांस वास मुक्त, संतृप्त वसा में कम और मोनोअनसेचुरेटेड वसा व पॉलीअनसेचुरेटेड वसा से भरपूर होना चाहिए। इसमें N3, N6 एसिड अनुपात उचित होना चाहिए और एक उच्च स्मोकिंग पॉइंट होना चाहिए। सरसों का तेल इन सभी मानदंडों को पूरा करता है और सही कारण है कि यह खाना पकाने का सबसे अच्छा तेल है। उन्होंने कहा कि कनेला का तेल जोकि सरसों ( ब्रेसिका परिवार) की ही प्रजाति का है, भी उतना ही फायदेमंद है, लेकिन यह शायद ही कभी रूप में पाया जाता है।

बहुप्रचारित और पांच गुणा महंगे जैतून के तेल के बारे में डॉ. मनचंदा ने कहा, ‘‘इसमें कई अच्छे गुण हैं। उदाहरण के लिए अन्य सभी तेलों की तुलना में इसमें MUFA का प्रतिशत उच्चतम (75 प्रतिशत) है जिसके कारण यह वसा का सबसे अच्छा प्रकार है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट के विविध प्रकार भी उपलब्ध हैं लेकिन इसकी मुख्य कमी है कि इसमें (N6) ओमेगा 6 और (N3) ओमेगा-3 का आदर्श अनुपात नहीं है जोकि दिल की जटिलताओं को कम करने में उपयोगी फैटी एसिड होता है।’’

अमेरिका में किए गए एक अध्ययन में विभिन्न तेलों का एक तुलनात्मक विश्लेषण किया गया था। अनुसंधान का विषय था सरसों का तेल क्यों सूरजमुखी, कुसुम, सोयाबीन और अन्य ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर तेलों से श्रेष्ठ है।इसके अनुसार, हृदय के स्वास्थ्य के पांच स्तंभ हैं – ओमेगा-3, एंटीऑक्सीडेंट, पोटेशियम व मैग्नीशियम, विटामिन बी और फल व सब्जियां। इससे यह स्पष्ट कि ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर तेल अच्छे स्वास्थ्य और चयापचय प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं। उपभोग के लिए आदर्श तेलों का प्रकार एक अंतहीन वैज्ञानिक बहस का विषय हैं। पिछले कुछ दशकों में, विभिन्न तेलों के आदर्श आहार का सेवन के बारे में सभी प्रकार के सिद्धांत प्रस्तावित किये गये हैं। हालांकि, इस बारे में कोई आम सहमति चिकित्सा समुदाय में नहीं बन पाई है कि कौन सा तेल खाना चाहिए और कितना मात्रा में खाना चाहिए। सामान्यतः यह सलाह दी जाती है कि नित्य आहार ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर तेलों को शामिल करना चाहिए।

इसेंशियल फैटी एसिड EFA वह आवश्यक वसा है जिसे मनुष्य का शरीर स्वयं संश्लेषित नहीं कर सकता है और आहार के माध्यम से प्राप्त किया जाना चाहिए। EFA का प्राथमिक कार्य है प्रोस्टा ग्लैंडिन्स का उत्पादन, जो हृदय की गति, रक्तचाप, रक्त के थक्के, प्रजनन, गर्भाधान और प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी शारीरिक क्रियाओं को नियमित करता है। ये बच्चों के समुचित विकास विशेषज्ञ तंत्रिका और संवेदी प्रणालियों के विकास व परिपक्वता के लिए भी आवश्यक हैं, भ्रूणों और स्तनपान कर रहे शिशुओं को भी मां के आहार सेवन के माध्यम से EFA की पर्याप्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है।

इस अध्ययन के अनुसार, EFA की कमी और विशेष रूप से ओमेगा-3 की कमी संयुक्त राज्य अमेरिका में आम है। EFA की कमी और ओमेगा 6/3 का असंतुलन का दिल के दौरे के रूप में गंभीर स्वास्थ्य की स्थिति, कैंसर, इंसुलिन प्रतिरोध, अस्थमा, अवसाद, त्वरित बुढापा, स्ट्रोक, मोटापा, मधुमेह, गठिया, एडीएचडी और इसके साथ ही अल्जाइमर रोग से भी गंभीर संबंध है।

इस अध्ययन का निष्कर्ष निकला है कि कनेाल के बीज का तेल ओमेगा-3 के सबसे सस्ते स्रोत है। यह जैतून, जो काफी महंगी है, की तरह का होता है। जबकि फ्लैक्स (सन) तेल में 5 गुना ओमेगा 3 एसिड है। इसे एक चम्मच की मात्रा में ताजा ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अध्ययन का यह भी दावा है कि कच्ची घानी (कोल्ड प्रैस्ड) सरसों तेल जैतून के तेल की तुलना में बेहतर है। जैतून के तेल की तुलना में कच्ची घानी जब बिना गर्म किए लिया जाए तो सबसे अच्छा परिणाम देता है। यह संयोग ही है कि सभी सस्ते तेल ओमेगा 3 से भरपूर हैं। सन, सोया, और कनोला।

इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि सरसों का तेल हृदय, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, रक्त तरलता, अस्थमा, गठिया, ऐंठन, वयस्क मधुमेह, मस्तिष्क, एमएस और चिकनी त्वचा के लिए लाभकारी है। सरसों का तेल मुख्य रूप से भारत के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में बहुलता में प्रयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है सरसों के तेल में मौजूद इरुसिक एसिड की उच्च मात्रा चूहों के लिए तो हानिकारक पाई गई है, लेकिन मनुष्यों पर इसका कोई हानिकारक प्रभाव नहीं है। इसकी पुष्टि में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विनोद वर्मा कहती हैं, ‘‘हमारे पूर्वज भी सदियों से सरसों के तेल का इस्तेमाल करते रहे हैं। सरसों का तेल सबसे अच्छा है यदि यह अपने शुद्ध रूप यानी कि कच्ची घानी के रूप में लिया जाए। ये भोजन के साथ साथ औषधि भी है व जितनी भी दर्दनिवारक औषधियां है, उनका यह मुख्य घटक होता है। इसे जितना नया प्रयोग किया जाए, उतना अच्छा है व भोजन में मसाला डालते समय गरम सरसों के तेल में डाला जाएं।’’