स्वास्थ्यरक्षक बर्फी

ममता रानी
लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं।

मीठा खाना किसे पसंद नहीं है। परंतु बीमारियों का भय हमें मीठे से दूर रखता है। ऐसे में यदि कोई मीठा ऐसा हो जो हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करे तो उसे कौन नहीं खाना चाहेगा। ऐसी ही एक मीठी बर्फी के बारे में यहाँ हम जानेंगे। यह मीठी बर्फी गिलोय के सत्व के पाउडर से बनाई जाती है।
आज गिलोय किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आयुर्वेद जगत में तो यह प्रसिद्ध था ही, परंतु पिछले कुछ वर्षों में डेंगू और चिकनगुनिया की मार ने इसे घर-घर में प्रसिद्ध कर दिया है। आज कैसा भी बुखार हो या फिर सर्दी-खांसी हो, हर दूसरा मरीज पतंजली के गिलोय घनवटी का उपयोग करता मिलता है। डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों में एलोपैथ के चिकित्सक भी गिलोय का सेवन करने की सलाह देने लगे हैं। गिलोय से निकाले स्टार्च को गिलोय या गुडूची सत्व कहा जाता है। इसे बनाने के लिए गिलोय के तने को इकठ्ठा करके, छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इसे फिर कूटा जाता है और पानी में रात भर के लिए भिगो दिया जाता है। सुबह इसे अच्छे से मसला जाता है जिससे स्टार्च निकल जाए। फिर इसे कपड़े से छान लिया जाता है और पानी को इकठ्ठा कर लिया जाता है। पानी को कुछ घंटे पड़ा रहने देते हैं और नीचे बैठे स्टार्च को अलग कर सुखा लेते हैं। यह बाजार में भी बना-बनाया पाउडर के रूप में मिलता है। इसे कई स्थानों पर तिखुर के नाम से भी जाना जाता है।
गिलोय सत्व या गुडुची सत्व को बुखार, लीवर की कमजोरी-रोग, प्रतिरक्षा और कमजोरी समेत अनेक रोगों में प्रयोग किया जाता है। गिलोय सत्व को गुडूची सत्व, अमृता सत, गिलो सत आदि कई अन्य नामों से जाना जाता है। यह एक रसायन औषधि है।

बडा उपयोगी है गिलोय सत्व
< यह त्रिदोष को कम करता है लेकिन वात-पित्त को अधिक कम करता है।
< इसके सेवन से बढ़ा हुआ पित्त कम होता है जिससे एसिडिटी, पेट के अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि में लाभ होता है।
< यह इम्यून सिस्टम को ताकत देने वाली औषध है।
< यह शरीर से आम दोष को दूर करता है।
< यह लीवर को ताकत देता है।
< यह एंटीऑक्सीडेंट है।
< यह जोड़ों के दर्द में लाभप्रद है।
< यह हृदय को ताकत देता है और हृदय की अनियमित धड़कन में लाभप्रद है।
< बहुत प्यास लगना और मूत्र रोगों में फायदेमंद है।
< यह बढ़े यूरिक लेवल, अपच, गैस, भूख न लगना, शरीर में जलन, पेशाब में जलन, प्रमेह रोग, लीवर रोगों आदि सभी में लाभप्रद है।


गिलोय सत्व की बर्फी बनाने की विधि

सामग्री:

दूध – एक लीटर
चीनी – 200 ग्राम (चीनी की बजाय बूरा या शकर का भी उपयोग कर सकते हैं।)
गिलोय सत्व पाउडर – 100 ग्राम
छोटी इलायची – दो
केशर – 12 धागे
काजू किशमिश आदि सूखे मेवे इच्छानुसार

विधि:
दूध को एक भारी तले वाली कड़ाही में उबलने के लिए चढ़ा दें। एक कप ठंडे दूध में गिलोय सत्व को घोल लें। दूध जब उबलने लगे, तब इसे उसमें डाल दें। इसे लगातार चलाते रहें, अन्यथा इसमें गांठें पड़ जाएंगी। कुछ मिनटों में दूध गाढ़ा होता हुआ हलवे की तरह हो जाएगा। इसमें इलायची, सूखे मेवे, केशर आदि मिला दें। फिर इसमें चीनी मिला लें। थोड़ी देर में जब यह जमने लगे, तो एक थाली में घी लगा कर मिश्रण को उसमें फैला लें। सतह को बराबर समतल करके ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठीक से जम जाने पर इसे बर्फी के आकार में काट लें। स्वादिष्ट और पौष्टिक गिलोय की बर्फी तैयार है। एक स्वादिष्ट मिठाई ही नहीं, बल्कि इसके साथ स्वस्थ जीवन का भी आनंद लें।