सुपरफूड है सहजन

ममता रानी
लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं।


देश की राजधानी दिल्ली के एक विद्यालय में पढऩे वाली मेरी पाँच वर्ष की बेटी से उसकी शिक्षिका ने पूछा कि उसकी मनपसंद सब्जी कौन-सी है। बेटी ने उत्तर दिया मुनगा, सहजन। शिक्षिका को समझ नहीं आया कि उसने क्या कहा। उसने मुनगा या सहजन नाम की किसी सब्जी के बारे में सुना ही नहीं था, खाना तो दूर की बात है। परंतु जब हमें यह पता चलता है कि यही मुनगा कुपोषण से पीडि़त देशों में स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराने के लिए भारी मात्रा में अपने देश से निर्यात किया जाता है तो निश्चित ही हमें आश्चर्य होगा। मुनगा जिसका प्रचलित नाम सहजन है, की फलियां दिल्ली के बाजारों में आसानी से बिकती मिल जाती हैं, परंतु दिल्लीवासी उसे खाने का तरीका नहीं जानते। चाहे हम आज सहजन का उपयोग भूल रहे हों, लेकिन आज का भोजन-विज्ञान सहजन को एक सुपर फूड मानने लगा है।
यह एक सुखद संयोग है कि आज के सुपर फूड के जमाने में जिन भोज्य पदार्थों का भी नाम लिया जा रहा है, चाहे वह अलसी हो या फिर रागी, ये सभी देश की पारंपरिक भोजन-परंपरा का हिस्सा रहे हैं। सहजन भी ऐसा ही एक सुपर फूड है जिसे मुनगा के नाम से भी जाना जाता है। सहजन एक ऐसा पेड़ है जिसके पत्ते, फूल और फल तीनों ही खाए जाते हैं और उसके तने, जड़ बीज और छाल के औषधीय उपयोग हैं। इस प्रकार उसके सभी हिस्से उपयोगी हैं। बिहार, बंगाल आदि देश के पूर्वी इलाकों सहजन का बड़े पैमाने पर भोजन में उपयोग होता है और इसलिए वहाँ सहजन के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं। वहाँ सहजन की पत्तियों और फूल की सब्जी भी बनती है और उसे दाल में डाल कर भी खाते हैं। सहजन की फलियों की सब्जी बनाते हैं। दक्षिण भारत में भी सहजन का थोड़ा बहुत प्रयोग होता है। परंतु वहाँ केवल इसकी फलियों का ही प्रयोग किया जाता है, पत्तों और फूलों का नहीं। वहाँ सांभर में सहजन की फलियों के टुकड़े डाले जाते हैं।
सहजन के पेड़ बंजर भूमि में भी आसानी से लग जाते हैं। सहजन की खेती कम लागत और न्यूनतम रखरखाव में अधिक लाभ देती है। सहजन की डाली को भी काट कर लगाया जा सकता है। इसे किसी भी प्रकार के खाद की आवश्यकता नहीं होती और इसका पेड़ स्वयं ही कीटों से लडऩे में सक्षम होता है। फली लगने के बाद इसकी डालियों को काट डालना चाहिए। उपयुक्त मौसम में इसमें फिर से नई डालियां आ जाती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार सहजन की पत्तियों में 300 से अधिक बीमारियों को दूर करने की क्षमता है। यदि आधुनिक विज्ञान की नजरों से देखें तो सहजन की पत्तियां विटामिन का खजाना हैं। इनमें विटामिन ए, बी और सी पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन आदि भी प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। सहजन का फूल वाजीकारक होता है। यह स्त्री और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी है। विशेषकर शुक्राणुओं की मजबूती में यह काफी उपयोगी है। सहजन को दर्द व वायु विकारों का शमन करने वाला बताया जाता है। इसकी सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय आदि वात रोगों में लाभ होता है।
औषधीय उपयोग
सहजन के काफी अधिक औषधीय उपयोग हैं। उच्च रक्तचाप में इसकी पत्तियों का काढ़ा पीना चाहिए। कैल्शियम की मात्रा अधिक होने के कारण बढ़ते बच्चों के लिए सहजन का सेवन अत्यधिक लाभकारी है। मोटापे को कम करने में भी यह उपयोगी है। सहजन की पत्तियों का रस पीने से शरीर की वसा कम होती है और इससे मोटापा घटता है।
सहजन का तेल शरीर की त्वचा के लिए काफी लाभकारी है। सहजन की फली और उसके बीजों के तेल का उपयोग अधिकांश सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला विटामिन ए और लौह तत्व के कारण इसके सेवन से त्वचा की सुंदरता और चमक बनी रहती है।
इसके पत्तों को पीस कर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है। पैर में आई मोच में सहजन की पत्ती को तेल में पकाकर लगाने से आराम मिलता है। सहजन कोशिकाओं की सूजन को भी ठीक करता है। शरीर में यदि लंबे समय तक सूजन रह जाए तो इससे मधुमेह, हृदय रोग जैसी कई बीमारियां होने का खतरा पैदा हो जाता है। सहजन का नियमित सेवन शरीर में होने वाले किसी भी प्रकार के सूजन को कम करता है। सहजन के पत्ते खून में बढ़ी हुए शर्करा को भी कम करता है और इसप्रकार यह मधुमेह के रोगियों को दोहरा लाभ पहुँचाता है।
सहजन में संक्रमण को रोकने का भी गुण है। यह हमारे जिगर और मस्तिष्क के लिए भी टानिक का काम करता है।
सहजन की पती का उपयोग
सहजन की हरी हरी कोमल पत्तियों की सब्जी बनाकर खा सकते है। जैसे, पालक मेथी आदि की सब्जी बनाते हैं। साथ ही इसे बारीक काट कर लाल मसूर की दाल में भी डालकर बना सकते है। दोनों रूपों में यह बहुत ही पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है। जहां सहजन के ताजे पत्ते उपलब्ध नहीं हो सकते, वहां इसको सूखे हुये पत्तों का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए नरम मुलायम पत्तों को टहनी के साथ तोड़ लें।
इसे धोकर साफ कर लें और पतले कपड़े पे छाया में सुखा लें। सूखे हुए पत्तों को एयर टाइट डब्बे में रख लें। यह लंबे समय तक खराब नहीं होता है इस साल-छह महीने आराम से खा सकते हैं। इसका पाउडर भी बना कर रख सकते हैं। सूखे पत्तों को मसलकर सब्जी में या दाल में मिला लें या फिर पानी में उबालकर पी सकते हैं। किसी भी रूप में इसे खाना लाभकारी ही होता है।
सहजन के फूल
सहजन के फूल सफेद तथा पीले-मटमैले रंग के होते हैं। छोटे-छोटे तथा गुच्छों में फूलते हैं। इनका स्वाद सामान्यत: थोड़ा कसैला होता है। सहजन के फूल काफी पौष्टिक और वाजीकारक होते हैं। पेट के रोगों तथा कफ कम करने में भी ये सहायक होते हैं। सहजन के फूलों को कई प्रकार से खाया जा सकता है।
इसकी सब्जी भी बनती है। इसे दाल में डाल कर भी बना सकते हैं और इसकी पकौडिय़ां भी बना कर खाई जा सकती है। इसके कसैलेपन को निकालने के लिए बनाने से पहले इसे पानी में एक चम्मच नमक डाल कर थोड़ी देर तक उबाल लेना चाहिए। उसके बाद पानी निथार कर फेंक दें। सहजन की पत्तियों की भांति ही इसे दाल में डाल कर बना सकते हैं।


सहजन फली की सब्जी

सामग्री
सहजन— 250 ग्राम
आलू— दो या तीन
टमाटर — दो
लहसून— पांच कलियां
नमक हल्दी – स्वादानुसार
धनिया, गरम मसाला
तेल – दो तीन चम्मच

बनाने की विधि
कड़ाही गर्म करें। सबसे पहले तेल डालें। उसमें राई जीरा, हींग,एक मिर्च, डालें। जब तडकने की आवाज आने लगें तो तोडकर रखें सहजन और आलू को डाल दें। अब नमक हल्दी, धनीया, डालें और भूना जब सब्जी थोडी भूनने लगें तो टमाटर काटकर डाल दें। उसके बाद लहसुन का पेस्ट और गरम मसाला डालें। सब भुन जाने और टमाटर के गल जाने पर पानी डालें। धीमी आंच पर दस मिनट उबालें बाद गैस बन्द कर दें। यह सब्जी भी आप चावल या रोटी के साथ खा सकते हैं। उतारने से पहले आप सरसों या खस—खस पीस कर डाल सकते हैं।


सहजन के पत्तो या फूलों की दाल

सामग्री
लाल मसूर की दाल — 200 ग्राम
सहजन की पत्ती या फूल — 100 ग्राम
टमाटर — 2-3
नमक और हल्दी — स्वादानुसार
तड़के के लिए – दो चम्मच सरसों का तेल, एक छोटा चम्मच जीरा, एक लाल मिर्च, एक चुटकी हींग और बारीक कटी चार कली लहसुन

बनाने की विधि
प्रेशर कुकर में दाल धोकर डालें, साथ में पत्तों या फूलों को भी साफ करके धोकर डाल दें। अगर फूल बना रहे हैं तो फूलों को पहले 10 मिनट गरम पानी में उबाल लें। फिर धोकर दाल में डालें। अन्दाज से दो-तीन ग्लास पानी डालें जिससे पूरी दाल पानी में डूब जाए। अब नमक, हल्दी, कटे टमाटर डाल कर तीन—चार सीटी लगने तक पकाएं ताकि सब कुछ गलकर एक सार हो जाए। गैस निकलने के बाद इसको तड़का लगाएं। तड़का लगाने के लिए एक पैन में दो चम्मच सरसों का तेल गरम करें। उसमें एक छोटा चम्मच जीरा, एक लाल मिर्च, एक चुटकी हींग, बारीक कटी चार कली लहसुन डाल कर गरम करें। लहसुन जब लाल होने लगे तो पैन का सारा सामान दाल में डाल दें और दाल को ढंक दें। इस दाल को गरम गरम चावल या रोटी के साथ खाएं।


सहजन के फूलों की पकौड़ी

सामग्री
बेसन – 100 ग्राम, चावल का आटा – 100 ग्राम
सहजन के फूल – 100 ग्राम
हल्दी, काली मिर्च पाउडर और नमक – स्वादानुसार
लहसुन की कलियां – 4-5
अदरक – आधा इंच टुकड़ा, टमाटर – 2 बारीक कटा, तलने के लिए तेल

बनाने की विधि
सहजन के फूलों को पानी में एक च मच नमक डाल कर 5-7 मिनट उबाल लें। ठंडा होने पर पानी निथार कर फेंक दें और फूलों को ठंडे पानी से धो लें। लहसुन और अदरक का पेस्ट बना लें। बेसन, चावल का आटा, नमक, हल्दी, काली मिर्च पाउडर, लहसुन-अदरक का पेस्ट और टमाटर को मिला लें। इसमें फूलों को मिला दें। पकौडिय़ां या चीला, जो भी बनाना हो, उसके घोल को गाढ़ा या पतला बना लें। अब इच्छानुसार नानस्टिक पैन में चीला बना लें या फिर तल कर पकौडिय़ा बना लें। हरी धनिया की चटनी के साथ गर्म-गर्म परोसें।