सर्दियों का मेवा अखरोट

नंदकिशोर प्रजापति कानवन

सर्दी आते ही अखरोट की मांग स्वत: बढ़ जाती है। अखरोट को आयुर्वेद में अक्षोट, अक्षोत, शैलभावपीलू, कर्पराल आदि नामों से जाना जाता है। अखरोट की न केवल गिरी, बल्कि पत्ते, जड़, टहनी सभी चिकित्सीय दृष्टि से उपयोगी हैं। अखरोट तासीर में गर्म होता है, इसलिए सर्दियों में इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है। अखरोट का नित्य प्रयोग शारीरिक और मानसिक शक्ति को बढ़ाता है। शारीरिक बल, स्वास्थ्य और दिमागी ताकत को बढ़ाने के लिए, रोजाना अखरोट को चार बादाम के साथ चबाकर खाना चाहिए और ऊपर से मिश्री युक्त दूध पीना चाहिए। सर्दियों में अखरोट शहद के साथ खाने चाहिए। यह वात रोगों के उपचार में भी लाभदायक है। अखरोट की गिरियां सुबह खाली पेट खाने से कमरदर्द, घुटनों के दर्द और पीठ के दर्द से राहत मिलती है। वजन बढ़ाने के लिए दुबले-पतले लोगों को सुबह अखरोट, बादाम तथा किशमिश का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से प्रजननशक्ति बढ़ती है। यह वीर्य को बढ़ाता है। इसके लिए अखरोट की 10-20 ग्राम गिरी को पीस कर दूध में मिलाकर लेना चाहिए।
शरीर में सूजन होने पर, गौमूत्र में 10 ग्राम अखरोट तेल मिलाकर पीने से सूजन उतर जाती है। यह दिल के लिए एक अच्छा टॉनिक है। अखरोट के सेवन से शरीर में बुरा कोलेस्ट्रोल कम होता है जबकि अच्छा कोलेस्ट्रोल बढ़ता है। बाल गिर रहे हों तो भी इसे खाने से लाभ होता है। दूध पिलाने वाली माताओं द्वारा इसका सेवन दूध की वृद्धि करता है तथा मां को भी ताकत देता है। बच्चों द्वारा इसका नियमित सेवन अच्छे विकास में सहयोग करता है और स्मरणशक्ति को बढ़ाता है। कब्ज होने पर अखरोट का तेल दूध में मिलाकर पीने से पेट साफ होता है और कब्ज दूर होती है। यह आंतों को मुलायम बनाता है।