मां को भगवान मानने का विज्ञान जानते हैं आप …….

वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी एवं प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के मर्मज्ञ प्रोफेसर ओमप्रकाश पाण्डेय के अनुसार ईशावास्योपनिषद में कहा गया है

पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते 

इसका अर्थ है कि परमात्मा पूर्ण है और यह जगत् भी पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण प्रकट होता है और फिर भी पूर्ण शेष बच जाता है। पूर्ण से पूर्ण निकल जाए, फिर भी पूर्ण शेष बचे तो वही ईश्वर है। क्योंकि सामान्य गणित में यदि नौ में से नौ जाए तो शून्य बचता है नौ नहीं या आठ में से आठ जाए तो भी शून्य बचेगा आठ नहीं। परंतु ऋषि कहता है कि पूर्ण से पूर्ण निकल जाए तो उसमें शून्य नहीं, पूर्ण ही बचेगा। यह एक विशेष घटना है।

सामान्यतः भौतिक स्तर पर संसार में ऐसा कहीं नहीं होता लेकिन इसका एक अपवाद है। वह यह कि एक स्त्री गर्भ धारण करती है, संतान को जन्म देती है। जन्म लेने वाली संतान पूर्ण होती है और उसे जन्म देने वाली माँ भी पूर्ण ही रहती है। इसलिए माँ ईश्वर का ही रूप है। संसार की सभी माताएं भले ही वह किसी भी योनि की क्यों न हों ईश्वर का ही स्वरूप हैं। More …..