गौ-हत्या से बढ़ रहा है समाज में वैमनस्य

गौ-हत्या से बढ़ रहा है समाज में वैमनस्य

गौ-हत्या से बढ़ रहा है समाज में वैमनस्य
पिछले दिनो दादरी में घटित घटना के बाद से देश में एक अलग प्रकार की चर्चा चल पड़ी है कि भारतीय समाज में असहिष्णुता बढ़ रही है। असहिष्णुता के नाम पर तथाकथित सेक्युलर वर्ग द्वारा एकजुट होकर भारत के बहुसंख्यक समाज को निशाना बनाया जा रहा है। देश का एक बड़ा साहित्यकार वर्ग भी इस कार्य में पीछे नहीं रहा। देश की कैसी विडम्बना है कि गौरक्षा के लिए अग्रसर समाज को असहिष्णु कहकर तिरस्कृत किया जा रहा है।
समझने की बात यह है कि गौ भारत की पहचान है सुख और समृद्धि का आधार है। गौ को कामधेनु कहा गया है। भारतीय समाज ने उसे माता कहा है। हमारे ऋषियों ने ‘सर्वदेवमयी‘ कहकर पूजा है। भारत की अर्थ व्यवस्था का आधार गौ-माता को माना गया है भारत जब विश्व में सर्वोपरि था, सोने की चिड़िया कहा जाता था, उस समय का इतिहास देखें तो पता चलता है कि गौपालन सर्वाधिक होता था। किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए गौसेवा की बात कही जाती थी और गौसेवा से कार्य सिद्धि होती थी।
गौ-माता का महत्त्व केवल धार्मिक ही नहीं अपितु वैज्ञानिक महत्त्व भी है। वास्तव में गौ के वैज्ञानिक महत्त्व की रक्षा के लिए उसे धर्म से जोड़ा गया। हमारे ऋषि-मुनियों ने उस प्रत्येक वस्तु को धार्मिक महत्त्व दिया, जिससे समाज और राष्ट्र का हित होता है और जिसकी रक्षा होनी चाहिए। चाहे वे वृक्ष हों, नदियाँ हों या फिर पशु हों। नदियों में सर्वाधिक महत्त्व गंगा का, वृक्षों में पीपल का, पौधों में तुलसी का, और पशुओं में गौ का है। इसलिए इनकी पूजा का विधान किया गया जिससे सम्पूर्ण समाज इनकी रक्षा करना अपना धर्म समझे और प्राणपण से इनकी रक्षा करें।
वास्तव में, समाज और राष्ट्र के हित साधक सभी तत्त्व हमारे लिए पूज्य हैं। उनकी रक्षा करना हमारा धर्म है। गौ केवल पशु मात्रा नहीं है, उसके अन्दर देवताओं का निवास है, यह समाज ने अनुभव किया है। जिस घर में गौपालन होता है, वह घर शुभ संस्कार और समृद्धि का आगार होता है। गौमूत्रा औषधि है। गाय के शरीर से निकलने वाली तरंगे अनेक प्रकार के रोगों से रक्षा करती हैं। गाय का गोबर सर्वोत्तम खाद के रूप में उपयोगी है। कृषि को कीटरहित रखने के लिए गोबर तथा गौमूत्रा से निर्मित खाद दिव्य मानी गयी है। कैंसर जैसे रोग की औषधि में गौमूत्रा उपयोग होता है। गाय का दूध अमृत माना गया है। गाय का घी अनेक औषधीय गुण से युक्त है। गौघृत से दीपक जलाने से सर्वाधिक आक्सीजन का उत्सर्जन होता है।
इसलिए वेदों में गौवध का सर्वथा निषेध किया गया है और गौहत्या को अनर्थकारी कहा गया है। गौहत्या करने से समाज में अनेक प्रकार की अनर्थकारी बुराईयाँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए देश की समृद्वि के लिए गौरक्षा आवश्यक है। ऐसे में, आज गौरक्षकों को असहिष्णु कहकर जिस प्रकार का वातावरण बनाने की कोशिश हो रही है, वह चिन्ताजनक है। असहिष्णुता के नाम पर समाज में वैमनस्य बढ़ाया जा रहा हैं। इससे सावधान रहने की आवश्यकता है।