गुरुकुल : जहाँ लड़कियां सीखती हैं मार्शल आर्ट

प्राचीन भारत में कन्याओं को शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्र शिक्षा भी दी जाती थी। उस काल में राजकन्याओं के युद्धकर्म करने के अनेक उदाहरण पुराणों आदि में प्राप्त होते हैं। मध्यकाल का इतिहास, राजपूतानियों (क्षत्राणियों) की गौरवगाथाओं से भरा पड़ा है। अभी हाल ही में निर्मित फिल्म मणिकर्णिका में झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई के युद्ध-कौशल को बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है।

वाराणसी के पाणिनि संस्कृत कन्या महाविद्यालय में आर्य समाज के नियमों के आधार पर परंपरागत शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों के सञ्चालन की भी शिक्षा दी जा रही है। इनके शस्त्र-कौशल को देख लोग आश्चर्यचकित हो रहे हैं। 1971 में स्थापित इस महाविद्यालय में लगभग सवा सौ कन्याओं के शिक्षण की व्यवस्था है। ये कन्याएं गुरुकुल में मॉडर्न एजुकेशन (कंप्यूटर, अंग्रेजी, जुडो-कराटे) के साथ वेदशास्त्र की शिक्षा ले रही हैं। ये कन्याएं वैदिक मन्त्रों के साथ षोडश_संस्कार तथा हर प्रकार के कर्मकांड कराने में निपुण हैं।

यहां संस्कृत बोलनेवाली कन्याओं का शस्त्राभ्यास देखने पर रानी लक्ष्मीबाई का चित्र सामने आ जाता है। यहां कन्याओं को वैदिक शस्त्रों, ज्योतिष, कर्मकाण्ड आदि के साथ-साथ तलवार, लाठी, धनुष_बाण, भाला, तलवारबाजी और एयरगन को अभ्यास कराया जाता है। इन्हें पूरी सैन्य शक्ति और परेड के गुण सिखाए जाते हैं। आज बहुत-से स्कूलों में लड़कियों को मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसे और भी प्रसारित किए जाने की आवश्यकता है।