गुणों की खान है बाजरा

नंदकिशोर प्रजापति कानवन

भारत में सर्दी के मौसम में खाया जाने वाला अनाज है बाजरा। पर इसकी उपयोगिता हम भूल चुके हैं, यदि आप इस लेख को पूरा पढ़ लें तो 10 किलो बाजरा निश्चित ही पिसवा लेंगे। सर्दी की मौसम में इसकी रोटी या खिचड़ी अवश्य खानी चाहिये। बाजरा शरीर को गर्मी देने के साथ साथ हमारी हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी बाजरा से बनी रोटी ओर चूरमा लड्डू को ठंड में बहुत पसंद किया जाता है। बाजरा में मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीज, ट्रिप्टोफेन, फास्फोरस, फाइबर यानी रेशा विटामिन बी, एण्टीऑक्सीडेण्ट आदि भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। बाजरा शरीर को ऊर्जा देता है। यह वजन घटाने में सहायता करता है। बाजरा कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा ये मैग्नीशियम और पोटैशियम का भी अच्छा स्त्रोत है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मददगार है।
बाजरे में भरपूर मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में सहायक हैं। बाजरा खाने से कब्ज की समस्या नहीं होती है। कई अध्ययनों में कहा गया है कि बाजरा कैंसर से बचाव में सहायक है। इसके नियमित सेवन से मधुमेह का खतरा भी कम हो जाता है। बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो कि हड्डियों की कमजोरी दूर करता है। आयरन भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते। गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाये तो इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक कैल्शियम और आयरन की कमी से होने वाले रोग नहीं होते। इतना ही नहीं, बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में असामान्य पीड़ा के मामले भी न के बराबर पाए गए हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम की गोलियां खाने की जगह रोज बाजरे की दो रोटी खानी चाहिए।