खेती का ऐसा ढंग जो बचाएगा सरकार के लाखों करोड़ रुपए

भारत सरकार द्वारा पदमश्री से सम्मानित हुए सुभाष पालेकर द्वारा प्रचारित शून्य लागत खेती न केवल किसान की आय कई गुना बढा सकती है, दिल्ली जैसे महानगरों के जीवन को पराली जलाने से पैदा हुए प्रदूषण से बचाएगी बल्कि अगर सरकार द्वारा दी जाने वाली रासायनिक उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सीडी, प्रदूषण से बचने के लिए और प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों पर किए जाने वाले खर्च को जोड़ दिया जाए तो सरकार के लाखों करोड़ रुपए भी बचा सकती है। अगर नीति नियन्ता गंभीरता से विचार करें तो नदियों को जोडने की परियोजना पर होने वाले भारीभरकम खर्चों से भी बचा जा सकता है। खेती करने की इस विधि में पराली का उपयोग गाय बैल के चारे के रुप में और जैविक खाद बनाने में हो जाता है इसलिए किसानों को पराली जलाकर नष्ट करने की आवश्यकता नहीं रह जाती। इस ढंग से खेती करने से किसान की आय कई गुना बढा सकती है। शून्य लागत खेती के लिए आवश्यक है कि किसान अपने खेत में मुख्य फसल के साथ साथ अन्य फसल भी पैदा करें। अन्य फसलों से खेती की लागत निकालने और मुख्य फसल को लाभ के रुप प्राप्त करने की इस पद्धति से खेती करने में गौवंश की बडी आवश्यकता होती है। खेती का यह ढंग रासायनिक खाद और कीटनाशकों के दम पर होने वाली खेती के उल्ट हमारी भूमि जल और वायु संपदा का कोई नुकसान नहीं करता बल्कि उनका संरक्षण करता है। विशेष बात यह है कि इस ढंग से खेती शुरू करने वाला किसानों की आय आम धारणा के विपरीत पहले साल से ही बढ जाती है।   More……