कनेरी मठ की लखपति खेती


भारतीय खेती के ढेर सारे प्रयोग देश में चल रहे हैं। उन्हें अद्भुत सफलता भी मिली है। ऐसा ही एक शानदार प्रयोग चल रहा है महाराष्ट्र के सिद्धगिरी मठ में। सिद्धगिरी मठ, कनेरी, कोल्हापुर 300 एकड़ में फैला प्राचीन 1400 वर्ष पुराना मठ है। यहाँ परम आदरणीय स्वामी श्री काड सिद्धेश्वर जी के मार्गदर्शन में गोकेंद्रित ग्राम विकास पर प्रयोग किए जा रहे हैं। यहाँ भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करता एक संग्रहालय है जिसे देखने हजारो लोग प्रतिदिन आते हैं। इसके अतिरिक्त एक विशाल गोशाला, हॉस्पिटल, कई आदर्श गाँव, एक एकड़ लखपति खेती, गुरुकुल, कामधेनु मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, गोबर गैस से विद्युत उत्पादन जैसे कई अद्भुत कार्यो को सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
कम जमीन से भी किसान यदि ठीक से खेती करे तो लाखों कमा सकता है, इसके लिए कनेरी मठ का प्रयोग सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। एक एकड़ लखपति खेती कनेरी मठ का विशेष प्रयोग है। इस पद्धति में एक एकड़ जमीन में एक किसान परिवार न केवल अपना भरण-पोषण कर पाता है, बल्कि साल में 2 लाख रुपये तक भी बचा लेता है। उल्लेखनीय है कि एक एकड़ में 43 हजार 5 सौ 60 स्क्वेयर फीट जमीन होता है। उसी में एक परिवार के रहने के लिए घर, बाथरूम, टॉयलेट और गोबर गैस संयंत्र बना होता है। 6- 7 लोगों का परिवार, जिनके पास 2 गायें होती हैं, उसमें रहता है। गाय के गोबर और मानव मल-मूत्र से रसोई गैस और सोलर लाइट से बिजली जलाते हैं। इस जमीन में साल भर के चक्र में बारी-बारी से लगभग 50 किस्म की सब्जियां उगाई जा रही हैं। 12 प्रकार की सब्जियां, 12 प्रकार के फल और 10 प्रकार की लता वर्गीय मौसमी साग-सब्जियां उगाई जा रही हैं।
इसमें अनाज और गन्ना भी उगाया जा रहा है। 1/ 4 एकड़ जमीन में करीब 8- 10 हजार गन्ना बोकर किसान साल में लगभग 80 हजार रुपये की कमाई कर रहे हैं। एक परिवार खुद अपने खान -पान के बाद हर दिन 4 -5 सौ का फल -सब्जी आसानी से बेच रहा है। इस तरह साल में लगभग 120 हज़ार की कमाई किसान फल, साग सब्जियां बेंच कर रहे हैं। हर 50 किलो मीटर पर जलवायु बदल जाती है। प्रशिक्षण पाकर किसान अपने क्षेत्र की जलवायु के मुताबिक फसल उगा सकते हैं।
कनेरी मठ कोल्हापुर के स्वामी काड सिद्धेश्वर जी इसकी संकल्पना के तहत किसानों प्रशिक्षित कर रहे हैं। हजारों किसान और अन्य लोग प्रतिवर्ष यहाँ का प्रयोग देखने आते हैं और प्रेरणा लेकर लौटते हैं।