आहार विहार के सामान्य नियम

आहार विहार के सामान्य नियम

वैद्य भगवान सहाय शर्मा

सह आचार्य, आयुर्वेद-यूनानी तिब्बिया कॉलेज एवं हॉस्पिटल, नई दिल्ली

आज लोग पर्याप्त पौष्टिक भोजन कर रहे हैं, परंतु उसका लाभ नहीं हो रहा है। अच्छा खाने के बाद भी रोग हो रहे हैं। इसका कारण है कि भोजन लेने का तरीका और समय सही नहीं है। उन्हें यही नहीं पता कि किस समय और क्या खाना उचित है।

दही का वर्षा ऋतु में सेवन न करें। वर्षा ऋतु को पित्त का संचय काल माना गया है। इसमें स्वाभाविक रूप से पित्त बनता है। अम्ल गुण वाला होने के कारण से दही पित्त को बढ़ाता है। इसलिए वर्षा ऋतु में दही का सेवन करने से पित्तज रोग होने की संभावना बढ़ जाएगी। पित्तज रोग यानी चर्म रोग, एसिडिटी, शरीर में उष्णता बढ़ना आदि हैं। इसके अतिरिक्त रात में कभी भी दही का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। दही स्रोतों में रूकावट पैदा करने वाला है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्रोतों का निर्बाध होना आवश्यक है ताकि रस, रक्त, मांस, मेद, हड्डी, मज्जा, वीर्य आदि के पोषण की प्रक्रिया चलती रहती है। स्रोतों के बाधित होने से आम का संचय होता है जिससे भूख घटना, जुकाम, खांसी, मोटापा, मधुमेह आदि होने की संभावना बढ़ जाती है। आज जो मधुमेह बढ़ रहा है, उसका एक बड़ा कारण दही का बढ़ता उपयोग है। पंजाब में इसलिए मधुमेह के रोगी अधिक पाए जाते हैं। हालांकि राजस्थान जैसे जांगल प्रदेशों में दही का प्रयोग लाभकारी है। थोड़ा बहुत स्थान का भी प्रभाव रहता है, परंतु ये सर्वसामान्य नियम हैं, इसका ध्यान रखना चाहिए।

दही खाना ही हो तो उसे छाछ का रूप दे दें। इसमें थोड़ा पानी मिला लें और उसमें सैंधा या काला नमक मिला लें। फिर यह लाभकारी हो जाएगा। दही पथ्य नहीं है, छाछ पथ्य है। दही में पेट के लिए लाभकारी वैक्टीरिया होते हैं, परंतु उनका लाभ लेने और नुकसानों से बचने के लिए दही में कुछ न कुछ जैसे पानी, शक्कर, शहद, घी, आंवला या मंूग का सूप आदि कुछ अवश्य मिलाएं।

भोजन का सही समय

प्रातःकाल में भरपूर भोजन करना चाहिए। रात से लेकर सुबह तक 10-12 घंटे का उपवास हो जाता है, इसलिए अग्नि काफी प्रबल हो जाती है। साथ ही रात भर आराम करने के कारण शरीर में काफी ऊर्जा रहती है जिससे भारी भोज्य पदार्थों को भी पचाया जा सकता है। इसलिए प्रातःकाल का नाश्ता हमेशा भारी होना चाहिए। इसमें पर्याप्त पौष्टिक भोजन लेना चाहिए।

दोपहर का भोजन सुबह के नाश्ते की तुलना में हल्का होना चाहिए। रात का भोजन सबसे हल्का होना चाहिए। सूर्य के ढलने के साथ हमारे शरीर की चय-अपचय की प्रक्रिया भी शांत होने लगती है। हमारी पाचक अग्नि कमजोर होने लगती है। इसलिए रात का भोजन एकदम हल्का हो और सोने से कम से कम तीन घंटे पहले कर लिया जाना चाहिए। रात को सोते समय दूध ले सकते हैं परंतु भोजन और दूध लेने में तीन घंटे का अंतराल अवश्य होना चाहिए। तीन घंटे में भोजन का पाचन हो जाता है और दूध का पाचन सरल हो जाता है। इससे नींद भी अच्छी आती है।

प्रातःकाल चाय लेना उचित नहीं है। चाय पित्तवर्धक होती है। ग्रीन टी या गरम पानी लिया जा सकता है। जिन्हें चाय लेने की आदत है, वे चाय से पहले पानी पी लिया करें। चाय के साथ कभी भी नमकीन नहीं खाना चाहिए। चाय के साथ मीठा ही लें। चाय बनाते हुए उसमें चाय की पत्ती के साथ सौंफ डाल दें। इससे उससे पित्त बढ़ने की समस्या कम होगी।

सुबह का समय कफ का होता है। इसीलिए सुबह-सुबह व्यायाम करना ठीक रहता है। इससे कफ का शमन होता है। जो लोग शाम को व्यायाम करते हैं, उन्हें इसका अधिक लाभ नहीं होता। शाम को अधिक व्यायाम करने से बाद में गठिया आदि समस्या हो सकती है। शाम तक शरीर थका होता है, उसकी ऊर्जा घटी हुई होती है। सुबह शरीर भरपूर नींद लेकर तरो-ताजा होता है। उस समय व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम के लिए आयुर्वेद कहता है कि क्षमता से आधा व्यायाम ही करना चाहिए, अधिक नहीं। व्यायाम करने के बाद शवासन जैसे शरीर को आराम देने वाले आसन अवश्य करें।

भोजन के बाद कॉफी या आइसक्रीम लेने का प्रचलन स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। फिर भी यदि लेना ही हो तो भोजन के बाद गरम चीज ही लेनी चाहिए ठंडी नहीं। इसलिए भोजन के बाद आइसक्रीम लेना बिल्कुल गलत है। भोजन की शुरूआत में आइसक्रीम ले लें। मीठा भी भोजन की शुरूआत में ही लें। इसका कारण यह है कि वात की वृद्धि होने और ग्लूकोज की कमी होने से हमें भूख लगती है। इसलिए पहले मीठा लें। मीठा लेने से कम भोजन में भी पूरी तृप्ति होगी। तो अधिक खाने से होने वाली समस्याएं जैसे कि बदहजमी, मोटापा आदि से बच सकेंगे।

इसी प्रकार भोजन भूख लगने पर और निश्चित समय पर ही करें। दिन भर थोड़ा-थोड़ा न खाएं। खाना पचे बिना फिर खाना सभी प्रकार के रोगों का कारण है। इसलिए पहले खाया खाना पूरा पचने के बाद ही दोबारा भोजन करें। इच्छा होने पर बीच में फल और उनका रस लिया जा सकता है।

शहद खाना भी काफी लाभकारी है। यह शरीर से वसा को खरोंच कर निकालता है। इसलिए मोटापे को दूर करने के लिए शहद लेने की सलाह दी जाती है। परंतु शहद को गरम जल से नहीं लेना चाहिए। वह विरूद्ध आहार हो जाएगा। इससे कई प्रकार की अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जैसे कि इससे धमनियां कठोर हो जाएंगी और संधिवात जैसी बीमारियां बढ़ेंगी। कफ प्रकृति के लोगों को शहद लेना चाहिए। शहद को चाटना चाहिए। शहद स्वाद में मीठा होते हुए भी कषाय रस में आता है। इसलिए इसे मधुमेह के रोगी भी ले सकते हैं। यह मधुर नहीं है परंतु मधुरता का अहसास कराता है। मधुमेह रोगी को शुद्ध शहद आराम से दिया जा सकता है।

फल और सब्जी कैसे खाएं

फल खाना काफी लाभकारी है परंतु आज हम जिस प्रकार फल खा रहे हैं उससे हमें लाभ नहीं हो रहा है। सबसे पहली बात यह है कि एक बार में एक ही प्रकार फल खाना चाहिए। कभी भी फलों की चाट बना कर नहीं खाना चाहिए। हमेशा मौसमी और स्थानीय फल ही खाने चाहिए। हम जहां पैदा होते हैं, वहां जिन तत्वों की कमी होती है, प्रकृति उनको पूरा करने वाले फल पैदा करती है। इसलिए स्थानीय फल अधिक लाभकारी होंगे।

इसी प्रकार सब्जी का भी मामला है। सब्जी हमेशा मौसमी ही खानी चाहिए। सब्जियों की पोषकता पर ऋतु का प्रभाव पड़ता है। जैसे कि बाजरा है। यह दीपावली के आस-पास होता है। इसलिए यह गरम होता है और इसे पूरे ठंड भर फरवरी तक खाया जाता है। इससे शीत ऋतु में पूरा पोषण मिल जाता है। इसी प्रकार अन्य अनाज और सब्जियों को हमेशा मौसम के अनुसार ही खाना चाहिए। इसलिए मल्टी ग्रेन का सिद्धांत भी लाभकारी नहीं है। मल्टीग्रेन आटे में बाजरा भी मिला होता है और उसे लोग पूरे साल भर खाते हैं। यह ठीक नहीं है। जिस ऋतु में जो पैदा होता है, उसे उसी ऋतु में खाया जाना चाहिए।

स्थान के अनुसार भी फल-सब्जी का लाभ होता है। एक उदाहरण खजूर का है। खजूर को आमतौर पर गरम माना जाता है। जबकि यह शीतवीर्य है। इसलिए यह पित्त प्रकृति वालों के लिए लाभप्रद है कफ प्रकृति वालों के लिए। खजूर का उत्पत्ति स्थल अरब देश हैं। अरब गरम देश हैं, इसलिए खजूर गरमी नहीं कर सकते। हमेशा पारंपरिक भोजन ही किया करें। फलों को दूध में नहीं मिलाना चाहिए। शेक बनाना भी सही नहीं है। यह विरूद्ध आहार होता है।

आयुर्वेद अग्नि के संरक्षण पर विशेष ध्यान देता है। अग्नि की रक्षा करने से बीमार नहीं होंगे। फलों को दूध में मिलाने से अग्नि मंद होती है। वह नहीं लेना चाहिए। इसी प्रकार अधिक ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए।